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लाइसेंस के लिए अब स्वचालित ड्राइविंग ट्रैक पर देना होगा ट्रायल

3 वर्ष पहले
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प्रदेश में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए परिवहन विभाग ने अब लाइसेंस ड्राइविंग प्रक्रिया को और ज्यादा सख्त और ऑनलाइन बनाने की कवायद शुरू की है। वाहन चालकों को यातायात नियमों की पूरी जानकारी हो और उसे ठीक से वाहन चलाना आए इसके बाद ही लाइसेंस जारी करने के लिए अब आटोमैटिक ड्राइविंग ट्रैक बनवाए जा रहे हैं। पाली में भी दुपहिया व चार पहिया वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले अभ्यर्थियों के ट्रायल के लिए ऐसे ट्रैक बनाए जा रहे हैं। परिवहन विभाग का दावा है कि अगले तीन माह में ये आटोमैटिक ट्रैक बनकर तैयार हो जाएंगे। ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रैक पर मॉनिटरिंग के लिए 17 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। पूरे ट्रैक पर सेंसर भी लगे होंगे जो स्पीड ब्रेकर, स्लोप, लाल बत्ती पर वाहन चालक के नियमों की पालना की निगरानी रखेगा। लाइसेंस के लिए पूरी ट्रायल प्रक्रिया का वीडियो बनाया जाएगा जो ऑनलाइन होगा। पाली में 1 करोड़ 57 लाख की लागत से ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रैक बनाया जा रहा है।

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चालक की निगरानी के लिए कैमरे और नियमों की पालना जांचने के लिए स्पीड ब्रेकर से लेकर जेबरा लाइन तक पर सेंसर

इस ट्रैक पर यदि चालक सही तरीके से वाहन चलाता है और यातायात नियमों की जानकारी रखने में पास हो जाता है तो ही उसे लाइसेंस जारी किया जाएगा। ट्रैक पर एचडी गुणवत्ता के सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। लाइसेंस अभ्यर्थी को यातायात नियमों की कितनी जानकारी है और वह उनकी कितनी पालना करता है इसकी जांच के लिए ट्रैक पर स्पीड ब्रेकर, स्लोप, जेबरा लाइन, ट्रैफिक लाइट भी होंगी। इनकी निगरानी के लिए यहां सेंसर लगाए जाएंगे।

दुपहिया व चार पहिया वाहन चालकों के लिए अलग-अलग ट्रैक, देना होगा ट्रायल

इस ड्राइविंग टेस्ट से दुपहिया और चारपहिया दोनों वाहन चालकों को गुजरना होगा। इन दोनों के लिए अलग- अलग ट्रैक बनाए गए हैं। ट्रैक के पास कंट्रोल रूम होगा। जो ट्रैक पर परीक्षा दे रहे वाहन चालक पर नजर रखेगा। इतना ही नहीं यह पूरी तरह से ऑनलाइन भी होगा। यानि एक क्लिक पर वाहन चालक की सारी गलतियां भी पता चल जाएगी।

ड्राइवर को दिखाएंगे वीडियो रिकाॅर्डिंग ताकि उसे बताया जा सके कि कौनसी गलती की

17 एचडी सीसीटीवी कैमरों से युक्त इस ट्रैक पर चालक की हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। वहीं प्रत्येक गलती का अंक भी काटा जाएगा। इतना ही नहीं यदि वह इसमें पास या फेल हो जाता है तो इसके लिए उसे वीडियो रिकाॅर्डिंग दिखाने के साथ उसकी सीडी भी सौंपी जाएगी। इससे उसे यह पता चलेगा कि उसने कहां पर कौनसी गलती की।

ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रैक का निर्माण कार्य शुरू किया जा चुका है। इसमें एचडी कैमरे व सेंसर के माध्यम से वाहन चालक का परीक्षण किया जाएगा। नियमों की जागरूकता और ड्राइविंग स्किल सुधरने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। तीन महीने में इस ट्रैक का काम पूरा कर दिया जाएगा। - प्रवीणा चारण, आरटीओ, प्रादेशिक परिवहन विभाग, पाली

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