गर्मी में रैनीवेल परियोजना को गति देने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से ट्यूबवेलों का सहारा लिया जाएगा। हथीन उपमंडल के करीब दर्जनभर बड़े गांवों में विभाग की ओर से ट्यूबवेल लगाने की योजना है। इस योजना पर विभाग का लाखों रुपए खर्च होने हैं। योजना के तहत कुछ गांवों में जमीनी बोर हो चुके हैं और कुछ में कार्य चल रहा है। जहां बोर हो चुके हैं वहां बिजली की व्यवस्था कराई जा रही है, ताकि गर्मी में जल्द कनेक्शन हो जाएं तथा लोगों को पेयजल की समस्या न झेलनी पड़े।
रैनीवेल परियोजना हथीन क्षेत्र में काफी हद तक सफल रही, लेकिन परियोजना में अवैध कनेक्शनों की भरमार के चलते इसकी सार्थकता पर उंगली उठने लगी। क्योंकि विभाग अवैध कनेक्शनों हटाने से कन्नी काटता नजर आने लगा। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पूरा पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा। गर्मी में यह समस्या और भयंकर बनने लगी है। इसलिए जनस्वास्थ्य विभाग ने हथीन उपमंडल के गांव नांगल जाट, कोट, पचानका, लखनाका, बुराका, उटावड़, गहलब, कौंडल व रुपड़ाका में बोर लगाने की योजना बनाई है। एक बोर पर विभाग के करीब दो लाख रुपए खर्च होंगे। ट्यूबवेल के पानी से संबंधित गांवों की पेयजल आपूर्ति की जाएगी। इन गांवों में रैनीवेल का पर्याप्त पेयजल लोगों को उपलब्ध नहीं हो रहा है। विभाग के अधिकारियों की मानें तो ट्यूबवेल का पानी मिलने से जो कमी रैनीवेल की सप्लाई से हो रही है उसकी पूर्ति होगी। योजना के तहत नांगल जाट, कोट, पचानका, लखनाका व बुराका में ट्यूबवेल लग भी चुके हैं। दूसरे गांवों में ट्यूबवेल की तैयारी चल रह रही है। जिन गांवों में ट्यूबवेल लगे चुके हैं, वहां विभाग की तरफ से बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही कनेक्शन मिलने पर इन्हें चालू कर दिया जाएगा।