इंडिया इज ए ग्रेट। यह शब्द एक मां ने तब कहे जब वह अपनी बेटी के उपचार के लिए नाइजीरिया में अपना सब कुछ खर्च कर चुकी थी और भारत में मुफ्त इलाज से उनकी बेटी ठीक हो गई। हार्ट की बीमारी से पीड़ित दस वर्ष की बच्ची की मां ने बताया कि उन्होंने दस वर्ष की आयु तक अपनी बेटी को ठीक कराने के लिए अपना ही नहीं, अपने दोस्तों, रिश्तेदारों व चर्च के सदस्यों से भी सहयोग लिया, लेकिन बच्ची ठीक नहीं हुई। इसी दौरान उनके एक दोस्त ने भारत में हार्ट की इस बीमारी का मुफ्त व सफल इलाज करने की बात बताई।
इसके बाद महिला बच्ची को लेकर नाइजीरिया से आठ हजार किलोमीटर दूर दिल्ली से 55 किलोमीटर दूर पलवल जिले के सत्य सांई संजीवनी अस्पताल पहुंची। जहां उपचार के बाद उनकी बेटी ठीक हो गई। नाइजीरिया के ओगुन राज्य की रहने वाली उक्त मां ने बताया कि उनकी दस वर्षीय बेटी निफेमी दिल की बीमारी से पीड़ित थी। जिससे स्कूल में निफेली अन्य बच्चों के साथ चलने, दौड़ने व खेलने में असमर्थ थी। मां को निफेमी के अलावा तीन अन्य बच्चों का भी पालन-पोषण करना था। इसके बाद जो भी जहां बताता निफेमी की मां उसे उपचार के लिए ले जाती। निफेमी के पिता नाइजीरिया में शिक्षक हैं। जिनका मामूली वेतन है।
पिता ने निफेमी के इलाज के लिए अपने दोस्तों, रिश्तेदारों व चर्च के सदस्यों से समर्थन मांगा, जिससे परिवार पर काफी असर पड़ा। लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि निफेमी एक दिन ठीक अवश्य हो जाएगी। माता-पिता का यह संघर्ष उस दिन सफल हुआ, जब पलवल के श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल आकर मुफ्त उपचार के बाद 30 अप्रैल को निफेमी बिल्कुल ठीक हो गई। निफेमी को बीमारी ठीक होने का सर्टिफिकेट जिला अस्पताल के सीएमओ डॉ. बीर सिंह सहरावत के हाथों सौंपा गया।
पलवल. निफेमी के ठीक होने पर सीएमओ डॉ. बीर सिंह सहरावत बच्चों को स्वस्थ्य सर्टिफिकेट देते हुए व साथ खड़ी निफेमी की मां।