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यज्ञ:गृहस्थाश्रम ज्येष्ठ व श्रेष्ठ आश्रम है : महात्मा श्रद्धानंद सरस्वती

3 वर्ष पहले
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पलवल| आर्य समाज हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के तत्वावधान में पर्यावरण संरक्षण के लिए यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद सत्संग किया गया। इसमें यज्ञ का महत्व बताया गया। यज्ञ में गौरव दहिया ने यजमान की भूमिका निभाई। पंडित तुलाराम आर्य व नारायण सिंह आर्य ने यज्ञ संपन्न कराया। सत्संग में महात्मा श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि गृहस्थाश्रम ज्येष्ठ व श्रेष्ठ आश्रम है, जो गृहस्त की निंदा करे वह निंदनीय और जो प्रसंशा करे वह प्रसंशनीय है। गृहस्थ के सुधार में सबका सुधार और बिगाड़ में सबका बिगाड़ है। महात्मा ने कहा प्रत्येक गृहस्थी को पंच महायज्ञों का अनुष्ठान करना चाहिए। जिन घरों मेंं दैनिक पांच यज्ञों का अनुष्ठान होता है, वह गृहस्थ सदा सुखी रहते हैं। उन्होंने बताया कि ब्रह्म यज्ञ के करने से आत्मबल बढ़ता है। देवयज्ञ के करने से वातावरण शुद्ध होता है। पितृयज्ञ करने से माता-पिता के ऋण से उऋण हो जाते हैं। अतिथियज्ञ करने से ज्ञान कि प्राप्ति होती है और बलिवैश्वदेवयज्ञ के करने से पशु, पक्षियों की रक्षा होती है।

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