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घायलों को इमरजेंसी में नहीं मिलते स्ट्रेचर, कहीं कंधों का सहारा ताे कहीं एबुंलेंस में 15 मिनट स्ट्रेचर का इंतजार
सेक्टर-6 अस्पताल की इंमरजेंसी में एंबुलेंस 15 मिनट तक मरीज को लेकर खड़ी रही। स्ट्रेचर न होने के कारण मरीज को कैसे अंदर ले जाएं सोचते रहे।
एक्सीडेंटल केस में भी डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ता है
माइनर ओटी में एक्सीडेंट केस में घायल मरीजों को डायरेक्ट यहां लाया जाता है। यहां डॉक्टर को कई बार बुलाना पड़ता है। इसके बाद ही डॉक्टर माइनर ओटी में आता है। ऐसे में गंभीर मरीजों की जान पर आ सकती है। लोक सर्वहितकारी सोसायटी के चेयरमैन राकेश अग्रवाल ने हेल्थ मनिस्टर को लिखा है कि यहां इमरजेंसी में डॉक्टरों की ओर से भी क्विक रिसपॉन्स नहीं दिखाई देता। मरीज की हालत खराब होने पर उसे रेफर कर दिया जाता है।
कोई कार्रवाई नहीं की जाती
ऐसा काफी बार हो चुका है कि मरीज ट्राईएज एरिया में पड़ा रहता है और डॉक्टर रूम से ही नहीं निकलते। विज को की गई शिकायत में राकेश अग्रवाल ने बताया कि कई बार ऐसे मामलों की शिकायत भी हो चुकी है। इसके बाद भी कोई एक्शन नहीं होता। इसमें मरीजों के लिए सबसे बड़ी परेशानी है।
इमरजेंसी के एंट्रेंस पर मरीजों को हाथ तक नहीं लगाते सिक्योरिटी गार्ड
इमरजेंसी की एंट्रेंस पर सिर्फ नाम के सिक्योरिटी गार्ड लगाए हुए हैं। न तो ये कर्मचारी मरीज को स्ट्रेचर पर लिटाने में मदद करते और न ही उन्हें हाथ लगाते। इसके बाद जब मरीज को डॉक्टर रूम में ले जाया जाता है तो वहां भी कई केस ऐसे देखे जाते हैं जहां मरीज इलाज के इंतजार में रहते हंै। इसके बाद सिक्योरिटी गार्ड को बुलाने पर भी अपने आप ही मरीज के घरवाले स्ट्रेचर लाने को मजबूर हो रहे हैं।
इंमरजेंसी के बाहर एक स्टेचर पड़ा है, जिसके टायर सही नहीं हैं। लोग मरीजों को ऐसे कंधों के सहारे ले जा रहे हैं।
कोताही बरतने वालों पर कार्रवाई करूंगा : पीएमओ
पीएमओ डॉ. संजीव त्रेहन ने बताया कि मरीज स्ट्रेचर पर आते हैं और अस्पताल के अंदर ही उन्हें छोड़ देते हैं। इससे इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर नहीं दिखे होंगे। सिक्योरिटी गार्ड्स की ड्यूटी लगाई गई है कि अगर कोई भी अस्पताल के अंदर खाली स्ट्रेचर है तो उसे बाहर मरीजों के लिए रखा जाए। इसके अलावा डॉक्टरों की ओर से मरीजों के इलाज में कोताही बरतने के मामला में भी में खुद कार्रवाई करूंगा। ऐसा नहीं है कि मरीज को यहां आकर इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा हो।