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रेप और छेड़छाड़ की घटनाओं के विरोध में ब्लैक डे

3 वर्ष पहले
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पंचकूला | पूरे देश में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। दिल्ली में साल 2012 में हुए निर्भय केस के बाद हाल ही में हुए उत्तरप्रदेश में उन्नाव व कठुआ में हुए गैंग रेप और जिले में भी रेप, छेड़छाड़ व शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों के विरोध में शहरवासियों को सड़कों पर निकलने के लिए मजबूर कर दिया है। मंगलवार शाम को करीब एक दर्जन महिला संगठनों के प्रतिनिधियों ने सड़क पर उतर पर प्रदर्शन किया। ब्लैक डे मनाया। यवनिका पार्क के बाहर ह्यूमन चेन बनाई गई। इसमें महिलाओं ने अपने मुंह पर पट्टी बांध रखी थी। मुंह पर पट्टी बांध उन्होंने छेड़छाड़ व रेप के बढ़ते मामलों का विरोध करते हुए समाज में बराबरी का हक मांगा। शहर में सक्रिय महिला संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन में शामिल होकर संदेश दिया कि वे देश के ताजा हाल से आहत हैं और असुरक्षा की भावना से ग्रसित हैं। छोटी बच्चियों के साथ हिंसा और बलात्कार, हत्याओं ने हर नागरिक की भावना को झकझोर कर रख दिया है। रेप की बढ़ती घटनाओं से लोगों में रोष हैं खासतौर पर महिलाओं में। महिलाएं चाहती हैं कि पंचकूला सेफ सिटी बने। ऐसा शहर जिसमें जरूरत होने पर महिलाएं देर रात को भी शहर में आ जा सके। अभी देर रात तो दूर, शाम के समय भी महिलाएं सड़कों पर उतरने से डरती हैं। छोटी बच्चियों को पार्क में खेलने के लिए भेजने से गुरेज की जाती है। रोष प्रदर्शन में अंकित धारीवाल मेमोरियल ट्रस्ट, रेनबो लेडीज क्लब, साईं मंदिर पंचकूला, सेक्टर 16, इम्पावर जॉय एनजीओ, उमंग अभिव्यक्ति मंच, तेशमिता मेमोरियल ट्रस्ट, पंचकूला लेडीज क्लब, पंचकूला रेनबो क्लब, वुमन टीवी नेटवर्क, एजुकेशन ब्लॉक-बरवाला, बर्न जिम टीम वुमन, परिवर्तन ग्रुप, इन्नर व्हील क्लब पंचकूला, संगम एकेडमी ऑफ आर्ट्स, यूनिक सोसायटी ऑफ आर्टिस्ट्स पंचकूला, राष्ट्रीय कवि संगम, चंडीगढ़, मनांजली मंच, पंचकूला, राष्ट्रीय महिला काव्य मंच, चंडीगढ़ यूनिट, लेडीज टैलेंट सर्च क्लब, लेडीज क्लब पंचकूला की मेंबर्स शामिल थी।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार...

रेप

साल 2017- 3

2018 से अब तक- 2

छेड़छाड़

साल 2017- 10

2018 में अब तक- 7

नाबालिगों से शारीरिक शोषण

साल 2017 - 8

2018 में अब तक- 3

दहेज उत्पीड़न

साल 2017- 27

2018 में अब तक- 1

महिला संगठनों ने यवनिका पार्क के बाहर ह्यूमन चेन बनाई

महिला कांग्रेस ने मोदी का पुतला फूंका

रेप की घटनाओं से महिलाओं और लड़कियों में खौफ

कठुआ में आठ साल की बच्ची से हुए रेप के मामले से महिलाओं और लड़कियों में खौफ है। सरकार दोषियों को सजा नहीं दे रही। ऐसे मामलों में तुरंत एक्शन की जरूरत है और दोषियों को सख्त सजा दी जाए। सरकार को चाहिए कि पोर्न साइट को तुरंत बेन करे क्योंकि यह लड़कों के दिमाग को दूषित कर रही है। शारदा कठपालिया, अध्यक्ष, पंचकूला लेडीज क्लब

शर्म की बात है छोटी बच्चियां हो रही हवस का शिकार

रेप की बढ़ती घटनाओं के विरोध में हम सड़क पर उतरे हैं। महिलाओं ने मुंह पर पट्टी बांध कर यह जताने का प्रयास किया है कि उनकी जुबान को दबाया जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि महिलाएं कुछ न बोले। देश में कंजक पूजन होता है। शर्म की बात है कि छोटी बच्चियों को हवस का शिकार बनाया जा रहा है। सुनीता धारीवाल, अध्यक्ष, अंकित धारीवाल मेमोरियल ट्रस्ट

अब तो पंचकूला भी सेफ सिटी नहीं रहा

पंचकूला कहने को चाहे सेफ सिटी कहा जाए लेकिन यहां भी लड़कियां रात को घर से नहीं निकल सकती। घरों में बेटी, पोती को शाम के समय बाहर निकलने से रोका जाता है। छेड़छाड़ जैसे मामले सामने आने पर पुलिस सख्त कदम नहीं उठाती। लड़कियों को ही तंग किया जाता है। महिलाओं से इससे रोष हैं और सड़कों पर उतर कर इसका विरोध किया जाएगा। पूनम सहगल, रेनबो लेडीज क्लब

11/15 के चौक पर यूथ खालसा ग्रुप का कैंडल मार्च

हर परिवार को बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता रही

ये मौन विरोध मात्र हाल में घटी कुछ घटनाओं के लिये ही नही, बल्कि बच्चों के प्रति हुए ऐसे अनगिनत अपराधों के लिए भी है! जो मामले नज़र में आए हैं (ख़ास कर बच्चों वाले), उनमे दिखती क्रूरता तो हमारे डर और पीड़ा का कारण है ही, परंतु आने वाले समय में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जो आशंकाएं हैं..वो बहुत तक़लीफ और खौफ़ पैदा कर रही हैं। मंजलि सहारण, सोशल वर्कर

महिलाओं की सुरक्षा पर सरकार का नहीं ध्यान

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध रोकने के लिए फांसी से कम सजा नहीं होनी चाहिए। इससे ही दरिंदों में खौफ पैदा होगा और बेटियां सुरक्षित होंगी। अपराधियों में खौफ नहीं है। महिलाओं की सुरक्षा की तरफ न केंद्र सरकार का ध्यान हैं और न स्टेट गवर्नमेंट का। रेप के बढ़ते मामले दुर्भाग्यपूर्ण हैं। नंदिता हुड्‌डा, अध्यक्ष, स्नेहांचल चैरिटेबल सोसायटी

बेटियों की सुरक्षा घर-परिवार से शुरू होनी चाहिए

बेटियों की सुरक्षा घर-परिवार से शुरू होनी चाहिए। हर मां-बाप को अपने बेटों को लड़कियों की इज्जत, सम्मान करना सिखाना चाहिए। सख्त कानून होने चाहिए कि दूसरों के लिए सबक बने। लड़कों को समझाना चाहिए कि छेडछाड़ व रेप जैसे कामों में संलिप्त होने पर उनकी भी लाइफ व कैरियर बर्बाद हो सकता है। रेणूका, चेयरपर्सन, परिवर्तन एनजीओ

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