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डेढ़ किमी से रेहड़ियों पर ढो रहे पानी, दो दिन में भी अधिकारी ठीक नहीं करवा पाए मोटर

3 वर्ष पहले
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न जाम काम आए और न ही काम आए धरने। ओल्ड पंचकूला में अब भी वही हालात हैं जो पिछले 5 साल पहले थे। अब मजबूरी इतनी ज्यादा हो गई है कि रेहड़ियों पर महिलाएं अपने बच्चों तक के साथ सड़कों पर पानी ढोने लगी हैं। दो दिन से सेक्टर-1 के ट्यूबवेल की मोटर खराब होने के कारण ओल्ड पंचकूला में पानी सप्लाई ठप है। लोग दूसरे सेक्टरों से पानी ला रहे हंै। पब्लिक हेल्थ और एचएसवीपी के अधिकारियों को इस पूरे मामले के बारे में पता है। इसके बाद भी डीसी ऑफिस के बिल्कुल साथ सटे ओल्ड पंचकूला में रहने वाले 15 हजार से ज्यादा घरों में पीने का पानी नहीं पहुंच रहा। छोटे बच्चों से लेकर बड़े और बुजुर्ग पानी ढोने को मजबूर हैं। इतना सब होने के बावजूद भी अधिकारियों की ओर से कार्रवाई नहीं की जा रही।

पिछले साल लगना था बूस्टिंग स्टेशन, इस साल हुआ कैंसिल

ओल्ड पंचकूला के लोगों ने साल 2017 में भी पानी को लेकर कई बार प्रदर्शन किए। इसके बाद डीसी पंचकूला के सहयोग से पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट ने एचएसवीपी को बूस्टिंग स्टेशन के लिए एरिया के सेंटर में जमीन का प्रपोजल बनाकर दिया। इसके बाद एचएसवीपी ने इस जमीन को देने से मना कर दिया। इस साल भी अभी तक बूस्टिंग स्टेशन के लिए कोई जगह फाइनल नहीं की गई। इससे पानी की परेशानी और बढ़ने वाली है।

डीसी से लेकर पब्लिक हेल्थ और एचएसवीपी को पता है पानी की किल्लत हो रही

कागजी कार्रवाई हो रही पर ग्राउंड पर कुछ नहीं : साहिल

नग्गर खेड़ा यूथ क्लब के प्रेजीडेंट साहिल नाहर ने बताया कि पांच साल से सबसे ज्यादा पानी की किल्लत होने लगी है। सिर्फ कागजी कार्रवाई हो रही है, ग्राउंड पर कोई भी काम नहीं हो रहा। अफसरों को भी समस्या का पता है।

हमारे यहां आकर देखें पता चलेगा कैसे जूझ रहे: विजय

विजय चौहान ने कहा कि पानी की दिक्कत कोई नई नहीं है, सबको पता है ओल्ड पंचकूला में पानी की किल्लत है। एक बार अधिकारी हमारे बीच आकर देखें पता चलेगा हम पानी के लिए कैसे जूझ रहे हैं।

बच्चों का कोई कसूर नहीं, तो उन्हें क्यों दे रहे सजा : दिलीप

दिलीप अरोड़ा ने कहा कि पानी की ताे हर साल दिक्कत है। बड़े लोग तो पानी भर भी लें, लेकिन जब हम बच्चों को भी बाल्टियां और कैन लेकर पानी ढोते देखते हैं तो तरस आ जाता है। बच्चों का क्या कसूर है, किस बात की सजा इन्हें मिल रही है।

डीसी ऑफिस के साथ सटा है ओल्ड पंचकूला, फिर भी परेशान होना पड़ रहा

घग्गर किनारे बूस्टिंग स्टेशन बनाने काे कहा था

एचएसवीपी ने पब्लिक हेल्थ को घग्गर नदी के किनारे बूस्टिंग स्टेशन बनाने के लिए कहा था। लेकिन जो काम ओल्ड पंचकूला के सेंटर में 70 लाख के करीब होना है, उसे घग्गर नदी के किनारे 2 करोड़ से ज्यादा खर्च करने पर पूरा किया जाना पड़ेगा। इसके बाद अगर बरसात में पानी का बहाव ज्यादा आता है तो इस पूरे बूस्टिंग स्टेशन पर भी पानी फिरने के आसार होते।

हमने बूस्टिंग स्टेशन के लिए एचएसवीपी को जमीन के लिए प्रपोजल बनाकर दिया था। इसको उन्होंने कैंसिल कर दिया। घग्गर नदी के किनारे हमें जमीन दी जा रही थी, लेकिन हमारे डिपार्टमेंट की ओर से वेरीफिकेशन के बाद नॉट फिजिकल ऑब्जेक्शन लगा दिया गया था। अब दोबारा से प्रपोजल बनाकर दिया गया है, जैसे ही रिपोर्ट आेके होती है तो काम शुरू कर दिया जाएगा। -शिवराज सिंह, एक्सईएन, पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट

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