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अभी भी जारी इल्लीगल माइनिंग, पुलिस, प्रशासन और डिपार्टमेंट के होते हुए क्यों नहीं रुक पा रही

3 वर्ष पहले
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बेशक इल्लीगल माइनिंग को रोकने के लिए पुलिस और माइनिंग डिपार्टमेंट की टीमें बना दी गई हैं, लेकिन इसके बाद भी इल्लीगल माइनिंग रुक नहीं रही है। जब इल्लीगल माइनिंग होती है, तो उसके बाद ही डिपार्टमेंट को पता चलता है। जिसके चलते अब यहां पिंजौर में दो माइनिंग के मामले सामने आए हैं, जिसमें करणपुर में 10 फुट की गहराई तक खुदाई की गई है। जिसमें पोकलेन से ग्रेवल को टिप्परों में डालकर सप्लाई किया जाता है। वहीं दूसरा मामला यहां बुर्जकोटियां में सामने आया है। जिसमें यहां पोकलेन, जेसीबी से ग्रेवल को भरा जाता है और उसके बाद सप्लाई किया जाता है। इन दोनों मामले में पिंजौर पुलिस थाने में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है, लेकिन अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

असल में पंचकूला के पिंजौर, कालका, रामगढ़, बरवाला, रायपुररानी एरिया में माइनिंग जोन हैं, यहां नदियां लगती हैं। जहां पर इल्लीगल माइनिंग की जाती है। इन नदियों के साथ लगने वाले क्रैशर, स्क्रीनिंग प्लांट की आड़ में ये काम किया जाता है। कहीं से भी ग्रेवल को उठाकर नजदीक के क्रैशर पर गिरा दिया जाता है, जिसके बाद वो इल्लीगल नहीं रहता, बल्कि एक नंबर पर तब्दील हो जाता है।

पिंजौर में इल्लीगल माइनिंग के दो मामले दर्ज: पंचकूला माइनिंग अधिकारी राजीव धीमान ने पिंजौर पुलिस थाने में दी शिकायत में कहा है, कि पिंजौर के करणपुर गांव में इल्लीगल माइनिंग की गई है, यहां सरकारी जमीन की खुदाई दूर तक की गई है, उसके बाद ग्रेवल को निकाल कर सप्लाई किया गया है। जिसमें यहां करीब 500 फुट के एरिया में 10 फुट की गहराई तक खुदाई की गई है। जिसमें यहां से मैटीरियल को निकाला गया और उसके बाद शहर में सप्लाई किया जाता है। वहीं इस काम को यहां राजेश कुमार नाम का व्यक्ति करवाता है, जो पहले भी इस एरिया में माइनिंग करवाता रहा है। जिसके चलते उसके खिलाफ माइनिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया गया है।

दूसरा मामला यहां गांव बुर्जकोटियां में सामने आया है, जिसमें राजीव धीमान ने करीमदीन और कमालदीन के खिलाफ माइनिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया है। जिसमें कहा गया है कि यहां अंबाला से ये दोनों आते हैं और उसके बाद माइनिंग को करवाते हैं। जिसके चलते बुर्जकोटिया के एरिया में आकर जेसीबी, पोकलेन से खुदाई कर ग्रेवल भरते हैं और उसके बाद टिप्परों में डालकर सप्लाई किया जाता है। ये काम रात के समय ज्यादा किया जाता है। इन दोनों के खिलाफ पर मामला दर्ज करवाया गया है।

पंचकूला में यहां होती है इल्लीगल माइनिंग: पंचकूला के रूरल एरिया में लगने वाली नदियों के क्षेत्र से इल्लीगल माइनिंग होती है। जिसमें पिंजौर, कालका, रामगढ़, बुर्जकोटियां, आस्सरेवाली, बरवाला , मौली , नटवाल एरिया शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा पिंजौर, कालका एरिया और आस्सरेवाली से होती है, क्योंकि इस एरिया में ग्रेवल ज्यादा मिलता है, जिसकी डिमांड ज्यादा हैं। रामगढ़ के माणक्यां, बुर्जकोटिया, बरवाला, मौली, नटवाल एरिया में माइनिंग होती है।

अफसरों की टीम की भी होती है रैकी, पहले ही बात देते हैं छापेमारी की बात

माइनिंग जोन के बाहर सड़क से ही पता लगा लेते हैं कि अफसर छापा मारने आ रहे हैं: माइनिंग माफिया बड़े ही अलग तरीके से काम करता है, जिसमें माइनिंग जोन के अंदर तो गाड़ियों को भरने का काम किया जाता है। इस एरिया तक पहुंचने के लिए कच्चे रास्ते बने हैं, इसलिए मेन सड़क पर एक मुखबीर को खड़ा किया जाता है। जैसे ही माइनिंग या पुलिस की टीम आए, तो वो सूचना दे देता है। टिप्परों को भगाने में इन्हें कोई परेशानी नहीं होती है, लेकिन पोकलेन की परेशानी रहती है। इसलिए मुखबीर को माइनिंग माफिया यहां खड़ा करके रखता है।

अमित शर्मा | पंचकूला

बेशक इल्लीगल माइनिंग को रोकने के लिए पुलिस और माइनिंग डिपार्टमेंट की टीमें बना दी गई हैं, लेकिन इसके बाद भी इल्लीगल माइनिंग रुक नहीं रही है। जब इल्लीगल माइनिंग होती है, तो उसके बाद ही डिपार्टमेंट को पता चलता है। जिसके चलते अब यहां पिंजौर में दो माइनिंग के मामले सामने आए हैं, जिसमें करणपुर में 10 फुट की गहराई तक खुदाई की गई है। जिसमें पोकलेन से ग्रेवल को टिप्परों में डालकर सप्लाई किया जाता है। वहीं दूसरा मामला यहां बुर्जकोटियां में सामने आया है। जिसमें यहां पोकलेन, जेसीबी से ग्रेवल को भरा जाता है और उसके बाद सप्लाई किया जाता है। इन दोनों मामले में पिंजौर पुलिस थाने में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है, लेकिन अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

असल में पंचकूला के पिंजौर, कालका, रामगढ़, बरवाला, रायपुररानी एरिया में माइनिंग जोन हैं, यहां नदियां लगती हैं। जहां पर इल्लीगल माइनिंग की जाती है। इन नदियों के साथ लगने वाले क्रैशर, स्क्रीनिंग प्लांट की आड़ में ये काम किया जाता है। कहीं से भी ग्रेवल को उठाकर नजदीक के क्रैशर पर गिरा दिया जाता है, जिसके बाद वो इल्लीगल नहीं रहता, बल्कि एक नंबर पर तब्दील हो जाता है।

पिंजौर में इल्लीगल माइनिंग के दो मामले दर्ज: पंचकूला माइनिंग अधिकारी राजीव धीमान ने पिंजौर पुलिस थाने में दी शिकायत में कहा है, कि पिंजौर के करणपुर गांव में इल्लीगल माइनिंग की गई है, यहां सरकारी जमीन की खुदाई दूर तक की गई है, उसके बाद ग्रेवल को निकाल कर सप्लाई किया गया है। जिसमें यहां करीब 500 फुट के एरिया में 10 फुट की गहराई तक खुदाई की गई है। जिसमें यहां से मैटीरियल को निकाला गया और उसके बाद शहर में सप्लाई किया जाता है। वहीं इस काम को यहां राजेश कुमार नाम का व्यक्ति करवाता है, जो पहले भी इस एरिया में माइनिंग करवाता रहा है। जिसके चलते उसके खिलाफ माइनिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया गया है।

दूसरा मामला यहां गांव बुर्जकोटियां में सामने आया है, जिसमें राजीव धीमान ने करीमदीन और कमालदीन के खिलाफ माइनिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया है। जिसमें कहा गया है कि यहां अंबाला से ये दोनों आते हैं और उसके बाद माइनिंग को करवाते हैं। जिसके चलते बुर्जकोटिया के एरिया में आकर जेसीबी, पोकलेन से खुदाई कर ग्रेवल भरते हैं और उसके बाद टिप्परों में डालकर सप्लाई किया जाता है। ये काम रात के समय ज्यादा किया जाता है। इन दोनों के खिलाफ पर मामला दर्ज करवाया गया है।

पंचकूला में यहां होती है इल्लीगल माइनिंग: पंचकूला के रूरल एरिया में लगने वाली नदियों के क्षेत्र से इल्लीगल माइनिंग होती है। जिसमें पिंजौर, कालका, रामगढ़, बुर्जकोटियां, आस्सरेवाली, बरवाला , मौली , नटवाल एरिया शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा पिंजौर, कालका एरिया और आस्सरेवाली से होती है, क्योंकि इस एरिया में ग्रेवल ज्यादा मिलता है, जिसकी डिमांड ज्यादा हैं। रामगढ़ के माणक्यां, बुर्जकोटिया, बरवाला, मौली, नटवाल एरिया में माइनिंग होती है।

पिंजौर में दो जगह करणपुर और बुर्जकोटियां में सामने आए मामले, टीम पर नजर रखते हैं कि कहां जाएगी और आने पर बंद कर देते हैं काम, बरवाला एरिया में अभी भी जारी है यह अवैध धंधा, पुलिस, प्रशासन और जिम्मेदार अफसर इसे रोकने में नाकाम...

ये ऑन रिकॉर्ड है, जिसके बारे में माइनिंग डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने लिखित में अपने अधिकारियों को भी दिया है। क्योंकि माइनिंग की टीम अभी फील्ड में निकलती भी नहीं हैं, माइनिंग माफिया को इस बारे में पता चल जाता है।

इसके लिए माइनिंग डिपार्टमेंट के ऑफिस के बाहर मुखबीर को बिठाया जाता है। इसके अलावा टीम के पीछे भी एक मुखबीर को लगाया जाता है। खास बात यह है, इस बारे में कई बार माइनिंग टीम को पता भी चल जाता है। जिसके चलते अधिकारियों को बताया भी गया है। जिस एरिया में टीम जाती है, उस बारे में पहले ही जानकारी दे दी जाती है। जिसके चलते इन्हें पकड़ना मुशिक्ल होता है।

पब्लिक को होने वाला नुकसान...

-सबसे पहले इल्लीगल माइनिंग के कारण सरकार को उसका टैक्स नहीं मिलता है। क्योंकि हर गाड़ी पर रॉयल्टी लगाई जाती है, जो ठेकेदार के पास जाती है, जबकि ठेकेदार या कॉन्ट्रेक्टर पहले ही सरकार को पेमेंट जमा करवाता है।

-इल्लीगल माइनिंग करने वाले कहीं से भी खुदाई शुरू कर देते हैं, जिसके कारण कई बरसाती नदियों के रूख तक बदल गए हैं। खेतपुराली की नदी को तो 20 फुट तक गहरा कर दिया गया है।

-लोगों के एरिया की सड़कों को तोड़ा जाता है, वहीं जो सामान उन्हें सस्ते रेट पर मिलना चाहिए, वो महंगे रेट पर दिया जाता है। क्योंकि बोला जाता है कि पुलिस या माइनिंग डिपार्टमेंट पकड़ लेगा। जिसके कारण रेत, बजरी दो नंबर में महंगी बेची जाती हैं।

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