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कोई बीमार पड़ जाए तो मरीज काे 3 किमी चारपाई पर लेकर आते हैं मेन रोड तक

3 वर्ष पहले
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पंचकूला से 35 किमी दूर है मोरनी, फिर भी यहां पर असुविधाएं

संतोष अग्रिहोत्री|मोरनी

हरियाणा विधानसभा से मात्र 60 किलोमीटर दूर तथा पंचकूला से 35 किलोमीटर दूर मोरनी की नाइटा पंचायत के कई गांवों में आज भी सड़कें नहीं हैं। कोई इतरजेंसी हो या अन्य जरूरी काम हो तो ग्रामीणों को मेन मोरनी-पंचकूला रोड तक पहुंचने के लिए परेशानियांे का सामना करना पड़ता है। यहां की महिलाओं को डिलीवरी से सप्ताह पहले अपने रिश्तेदारों के घर पर जाकर रहना पड़ता है। अचानक इमरजेंसी में गांव में कोई हादसा हो जाए तो घायल या कोई बीमार पड़ जाए तो उनको चारपाई पर उठाकर मेन रोड तक लाना पड़ता है। आज भी चंडीगढ़ व पंचकूला के साथ लगते क्षेत्र के लोग आदिवासी जैसी जिंदगी जी रहे हैं। सरकारें व उसके नुमाइंदे विकास की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं।

एक्सईएन ने कहा-बडीसेर व निमवाल नदी पर पुल मंजूर : इस बारे में एक्सईयन हरपाल सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मोरनी पहाडी क्षेत्र में निमवाला, बडीसेर आदि स्थानों पर पुल निर्माण के लिए बजट मंजूर हो चुका है और कार्य शुरू किया जा रहा है। बाकि यदि अन्य स्थानों पर भी पुल निर्माण की अवश्यकता है तो उसका प्लान भी तैयार कर अगामी कार्यवाही के लिए भेज दिया जायेगा।

पुल निर्माण का प्लान सरकार को भेजा है: इस बारे में लोकनिर्माण विभाग के जेई सुनील कुमार ने कहा कि सड़क व नदी में पुल का प्लान अप्रूवल के लिए सरकार को भेजा गया है। जैसे ही मंजूरी मिलती है नदी पर पुल का काम शुरू करवा देंगे।

लोग बोेले-हालत ऐसी है कि डिलीवरी के दौरान महिलाअों को हफ्ते पहले ही रिश्तेदारों के घर जाकर रहना पड़ता है

नाइटा पंचायत के इन गांवों में नहीं हैं सड़कें

नाइटा पंचायत के गंाव सैड़ा, दाबसू, कमारू, रिवाडी, खागड़ी, बाग, खील, जोहडी, बेरटा, मरोग, सिरमडा व अन्य गांवों में आजादी के 70 साल बाद भी सड़कें नहीं है। लोगों में हरियाणा सरकार के खिलाफ रोष है।

फाइल फोटो

कहा-सड़क और पुल के अभाव में जान जोखिम में

नाइटा पंचायत के ग्रामीण हरिसिंह, रामचन्द्र, केसर सिंह, सरदार सिंह, किशन सिंह नरेश कुमार, प्रकाश चंद, नराता राम, प्रेम सिंह, कला देवी, खेम सिंह ने बताया की उनके गंावों के पास बड़ी नदी गुजरती है। ग्रामीणों तथा 50 के करीब स्कूली बच्चों को हर रोज नदी पार करनी पड़ती है। इससे बच्चे नदी में डूबने का डर रहता है।

कई बार अस्पताल में टाइम पर नहीं पहुंचता मरीज

लोगों ने कहा कि सड़क सुविधा न होने के कारण मरीजों को चारपाइयों पर उठाकर तीन किलोमीटर का सफर तय करके मेन रोड तक लाना पड़ता है। क्योंकि सड़कें न होने से गांव में एंबुलेंस भी नहीं आ सकती। कहा कि अगर गंाव में किसी महिला की डिलीवरी होनी होती है तो उसे एक सप्ताह पहले अपनी रिश्तेदारों के घर जाकर रहना पड़ता है। कई बार तो बीमार समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं। इस समस्याओं को लेकर लोगों ने हलका विधायक लतिका शर्मा, डीसी पंचकूला, सांसद कटारिया से सड़कें बनवाने और नदी पर पुल निर्माण की मांग की है।

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