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कमिश्नर ने सेंक्शन पोस्टें भरने को यूएलबी अफसरों को लिखा

3 वर्ष पहले
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पंचकूला नगर निगम बने पौने पांच साल से ज्यादा समय हो चुका है। वर्तमान नगर निगम का केवल डेढ़ माह का कार्यकाल शेष बचा है। हरियाणा गवर्नमेंट आज तक निगम में रिक्त पड़ी सेंक्शन पोस्टों को ही नहीं भर पाई है। स्टाफ की कमी के चलते शहर में डेवलपमेंट काम स्लो स्पीड से चल रहे हैं। यहां तक कि पंचकूला एमसी के पास अपना ऑफिस तक नहीं है। सेक्टर 4 में कम्युनिटी सेंटर पर कब्जा कर और सेक्टर 14 में किराये की बिल्डिंग में एमसी ऑफिस बना है। सेक्टर 14 में किराये की बिल्डिंग में चल रहे ऑफिस का 16-17 लाख प्रतिवर्ष किराया जा रहा है।

पंचकूला नगर निगम के कमिश्नर राजेश जोगपाल ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी आनंद मोहन शरण को पांच दिन पहले लेटर लिखकर रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग की है। इस लेटर में उन्होंने लिखा है कि स्टाफ की कमी के कारण स्वच्छ भारत मिशन, सीएम विंडो, सीएम अनाउंसमेंट जैसे गवर्नमेंट इनीशिएटिव को निर्धारित समय पर सिरे चढ़ाने में दिक्कत आ रही है। पंचकूला में डेवलपमेंट वर्क और लोगों को प्रभावी ढंग से मुलभूत सुविधाएं मुहैया कराने में भी दिक्कत आ रही है। यूएलबी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी से कंपीटेंट अथॉरिटी के समक्ष इस मुद्दे को उठाने व पंचकूला एमसी में जल्द सेंक्शन पोस्ट भरने का निवेदन किया है ताकि पंचकूला में डेवलपमेंट वर्क को तेजी से सिरे चढ़ाया जा सके और क्वालिटी चेक भी मेनटेन रहे। एमसी में सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर की पोस्ट खाली पड़ी है। एग्जिक्यूटिव इंजीनियर की तीन पोस्टें हैं। इनमें से दो पोस्टें खाली पड़ी हैं।

अब तक खाली पड़ी सेंक्शन पोस्टें नहीं भर पाई और नगर निगम का अपना ऑफिस तक भी नहीं

ये काम हो रहे प्रभावित

1. इंजीनियरिंग विंग में स्टाफ की कमी के कारण कॉन्ट्रेक्टर की तरफ से जारी कामों की प्रॉपर क्वालिटी चेक व निगरानी नहीं हो पा रही है।

2. सीएम विंडो, स्वच्छ भारत मिशन, सीएम एनाउंसमेंट के काम स्लो स्पीड से चल रहे हैं।

3. शहर में अतिक्रमण हटाने का अभियान ठप है।

4. लीगल सेल में कोई इम्प्लॉयी न होने से कोर्ट केसों का कोई हिसाब किताब नहीं रख पा रहे हैं।

5. निगम की ओर से पूर्व में लिए गए फैसलों को लागू करने के लिए इंफोर्समेंट विंग में स्टाफ ही नहीं है।

6. चालू प्रोजेक्टों की स्टाफ की कमी के कारण रेगुलर निगरानी नहीं हो पा रही है।

7. ज्वाइंट कमिश्नर न होने से सभी रूटीन काम भी अप्रूवल के लिए कमिश्नर के पास जाते हैं। पावर डेलीगेट होने से काम जल्द व आसान हो सकता है।

8. एसई, एक्सईन न होने से इंजीनियरिंग विंग पर कंट्रोल नहीं है।

9. सिविल वर्क के लिए एमसी के पास एक भी एक्सईन नहीं है।

10. डीटीपी, एटीपी न होने से रेजिडेंशियल, कमर्शियल बिल्डिंग प्लान की एप्रूवल नहीं हो पा रही है।

एमसी में कितने पद खाली...

पोस्ट सेंक्शन रिक्त

ज्वाइंट कमिश्नर 1 1

सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर 1 1

एग्जिक्यूटिव इंजीनियर 3 2

एसडीओ, एमई 6 4

डीटीपी 1 1

एटीपी 2 2

असिस्टेंट आर्किटेक्ट 1 1

सेक्शन अफसर 3 3

लॉ अफसर, एडीए 1 1

लीगल असिस्टेंट 2 2

मैनेजर-आईटी 1 1

असिस्टेंट मैनेजर-आईटी 2 2

असिस्टेंट पब्लिक रिलेशन अफसर 1 1

जोनल टैक्सेशन अफसर 3 3

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