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केस दर्ज कराने को कहा तो अगले ही दिन मिल गई निगम ऑफिस से गुम हुई फाइल

3 वर्ष पहले
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पंचकूला नगर निगम ऑफिस में एक हफ्ता पहले फाइल गुम होने पर एमसी कमिश्नर ने केस दर्ज कराने का ऑर्डर दिया तो एक ही दिन बाद फाइल मिल गई। यह फाइल कोई अलमारी में रख गया। यह फाइल डंपिंग ग्राउंड, सेक्टर 23 में मिट्‌टी डलवाने के लिए दिए गए टेंडर से संबंधित थी। इस फाइल में ठेकेदार को दी गई पेमेंट के बिल भी थे।

वहीं, मेयर उपिंदर कौर आहलुवालिया का कहना है कि पंचकूला एमसी ने शहर को स्वच्छ बनाने के लिए कुछ ट्रैक्टर-ट्रॉलियां किराये पर ली हुई हैं। इन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की पेमेंट वाली फाइल भी अकाउंट्स ब्रांच से गुम है। निगम में इम्प्लाॅइज पर कोई कंट्रोल नहीं है। यह मिसमैनेजमेंट है और भ्रष्टाचार को बढ़ाया दिया जा रहा है। इससे इम्प्लाॅइज और ठेकेदारों की मिलीभगत साबित होती है। कुछ ठेकेदार नए ठेकेदारों को काम नहीं करने देना चाहते। ठेकेदारों की मनमानी पर अंकुश जरूरी है। नगर निगम कमिश्नर राजेश जोगपाल का कहना है कि एमसी ने अब दो प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स हायर करने का फैसला किया है। ये प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स ऑफिस के बाहर बैठेंगे और ऑफिस के बाहर आने-जाने वाली हर फाइल को रजिस्टर में नोट करेंगे। इसमें नोट किया जाएगा कि कौन सा इम्प्लाॅइज किस कारण और कहां यह फाइल ले जा रहा है।

हफ्ता पहले निगम अफसरों ने फाइल मांगी थी, लेकिन नहीं मिली थी...एक हफ्ता पहले निगम अफसरों से डंपिंग ग्राउंड में मिट्‌टी डलवाने से संबंधित फाइल मंगवाई। कर्मचारियों ने कुछ देर बाद बताया कि यह फाइल नहीं मिल रही है। सेनिटेशन ब्रांच से संबंधित कर्मचारियों ने कमिश्नर को बताया कि वह अलमारी में चार बाद इस फाइल को ढूंढ चुके हैं, लेकिन यह फाइल नहीं मिल रही है। उनका दावा था कि अलमारी से सभी फाइलें निकालकर दोबारा रखी गई हैं, लेकिन डम्पिंग ग्राउंड पर मिट्‌टी डलवाने संबंधित फाइल नहीं मिली। एमसी कमिश्नर की तरफ से एफआईआर दर्ज कराने के ऑर्डर देने पर एक दिन बाद यही फाइल उसी अलमारी से मिल गई।

पहले भी फाइलें हो चुकी हैं गुम...

मेयर उपिंदर आहलुवालिया ने सात-आठ माह पहले उनके वार्ड में डेवलपमेंट वर्क संबंधी फाइलें गुम होने की शिकायत एमसी अफसरों से की थी। सितंबर-2015 में पंचकूला नगर निगम का बिल्डिंग इंस्पेक्टर संजीव कुमार शहर में होर्डिंग्स पर विज्ञापन संबंधित फाइल के साथ गायब हो गया था। वह यह फाइलें पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में एडवोकेट को दिखाने के लिए गया था। बिल्डिंग इंस्पेक्टर चार दिन बाद सेक्टर-17 बस स्टैंड से बेहोशी की हालत में मिला था। नशे की हालत में उसे जनरल अस्पताल, सेक्टर-6 में भर्ती कराया था। यहां उसने बयान दिया था कि कोई उसे किडनैपर नशे की हालत में कहीं ले गए थे और उन्होंने ही बाद सहारनपुर से चंडीगढ़ आ रही बस में बैठा दिया।

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