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कविताओं के माध्यम से बताया-समाज में नारी पर लगातार हाे रहे अत्याचार

3 वर्ष पहले
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कोई कविता यूं ही नहीं बन पाती, उठता जब दर्द, कलम खुद ब खुल चल जाती। सेक्टर 7 में बुधवार को आयोजित कवि दरबार में कवियत्री मंजू बिसला ने अपनी रचना में कविता लिखे जाने के पीछे की कहानी बयां की। इस कवि दरबार का आयोजन उमंग अभिव्यक्ति मंच की ओर से किया गया। इसमें ज्यादातर कवि-कवियत्रियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से नारी पर समाज में हो रहे अत्याचार को बयां किया। सविता गर्ग ने अपनी कविता, पत्थर के शहरों में रहकर, पत्थर से ही हो गए लोग, में समाज में फैले धोखाधड़ी, फरेब को बताने की सफल कोशिश की। शिखा श्याम राणा ने अपनी कविता, झूठ ही लिखा जाता है, झूठ ही पकाया जाता है, झूठ ही परोसा जाता है और झूठ ही पसंद किया जाता है, को पेश किया। नंदिता हुडा की, खुदा ने गजब की दुनिया बनाई है, कहीं महोब्बत तो कहीं बेवफाई है, डॉ. प्रतिभा माही की, मिलने की तैयारी है, खोज पिया की जारी है, चर्चा जांच सितारों में, छाई खूब खुमारी है, कविता भी सराहनीय रही। कवि दरबार में एसएल धवन, निम्मी वशिष्ट, परमिंदर सोनी ने भी कविता व गजलें पेश की।

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