पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • अवैध खनन नहीं रोका तो भूकंप आने से होगा नुकसान: भू वैज्ञानिक

अवैध खनन नहीं रोका तो भूकंप आने से होगा नुकसान: भू वैज्ञानिक

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पिंजौर, कालका का एरिया हो या रायपुरानी, बरवाला। अवैध माइनिंग का काम लगातार जारी है। इस धंधे में पक्ष-विपक्ष में बैठी राजनीतिक पार्टियों के नेता भी इन्वॉल्व है। इस वजह से पुलिस भी शिकायतें मिलने पर एकाध ट्रक या माइनिंग कराने वालों के कुछ करिंदों को पकड़कर अपना पल्ला झाड़ लेती हैं। माइनिंग रोकने के लिए केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। इस रोकने के लिए स्थाई कदम नहीं उठाए जा रहे जिससे पुलिस की सख्ती पर दो-तीन दिन बाद दोबारा रात के समय माइनिंग शुरू कर दी जाती है। पंचकूला जिले में चल रही यह अवैध माइनिंग भूकंप की दृष्टि से भी खतरनाक साबित हो सकती है। मार्च 2011 में पंजाब यूनिवर्सिटी- चंडीगढ़, आईआईटी-कानपुर के भू-वैज्ञानिकों के साथ जापान से आए भू वैज्ञानिकों ने चंडीगढ़-चंडीमंदिर-नाडा साहिब-पिंजौर आदि क्षेत्रों का दौरा किया था। सर्वे में पाया गया कि इस एरिया में एक दशक से एक्टिव 3.5 मीटर फाल्ट लाइंस है। मनीमाजरा से सोलन जिला बड़ोग तक सिस्मिक जोन 4 में शामिल है। यहां कभी भी भारी भूकम्प आ सकता है। साल 1905 में कांगड़ा में भूकम्प आया था, जिसमें 20 हजार लोग मारे गए थे। भू वैज्ञानिकों का दावा है कि 100 साल बाद भूकम्प एरिया में रिपीट करता है। ऐसे में सौ साल से ज्यादा समय होने के कारण यह एरिया सेंसिटिव जोन में हैं। अवैध माइनिंग जारी रहने और मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के निर्माण से एरिया में भूकम्प आने पर ज्यादा तबाही हो सकती है।

शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल ने हरियाणा सरकार के मुख्यमंत्री व चीफ सेक्रेटरी को लेटर लिखकर इस एरिया में चल रही अवैध माइनिंग को तुरंत रोकने की मांग की है। विजय बंसल का आरोप है कि जिला पंचकूला की पहाड़ियों और नदियों में अफसरों-प्रशासन-खनन माफिया व स्थानीय प्रतिनिधियों की मिलीभगत से अवैध खनन हो रहा है। इस कारण एरिया में भूकम्प आने की संभावना बढ़ गई है। हाल ही में शिमला में भूकम्प के झटके महसूस किए गए हैं।

चिंता की बात...

शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल ने सीएम को लेटर लिखकर अवैध माइनिंग तुरंत रोकने की मांग की, क्योंकि...

पहाड़ियों में भी 3-3 मीटर की दरारें...

विजय बंसल का कहना है कि साल 2004 में खनन माफिया के विरुद्ध जनहित याचिका नंबर 20134/2004 दायर की थी जिसमें कहा गया था कि इस एरिया में पीएलपीए 1900 एक्ट की धारा 3, 4 व 5 और वन संरक्षण एक्ट 1980, भारतीय वन अधिनियम 1927 लागू है। इस एरिया में कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है। अगर अवैध खनन व मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाने से नही रोका गया तो भूकंप आने पर जान-माल का काफी नुकसान होगा। जिला पंचकूला के चंडीकोटला व नाडा साहिब की पहाड़ियों में भी 3-3 मीटर की दरारें आ चुकी है। चंडीकोटला में कई मकान तहस नहस हो चुके हैं। भूकंप रोकने व इसके आने पर जान-माल के ज्यादा नुकसान को रोकने के लिए विजय बंसल ही साल 2011 में जनहित याचिका नंबर 18188/2011 दायर की थी।

मिलीभगत के कारण हो रही अवैध माइनिंग...

हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए थे कि दो महीने में अवैध माइनिंग की कार्रवाई रोकी जाए। बंसल ने याचिका में कहा था कि जिस एरिया में पीएलपीए 1900 एक्ट की धारा 3, 4 व 5 और वन संरक्षण एक्ट 1980, भारतीय वन अधिनियम 1927 लागू होता है, वहां नाॅन फाॅरेस्ट एक्टिविटी को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता है। माइनिंग डिपार्टमेंट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति के बिना ही नदियों के खनन के टेंडर दे दिए। माइनिंग डिपार्टमेंट ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र देकर कहा था कि हर साल 10 मीटर तक खुदाई मैन्युल साधनों से की जा सकती है, आबादी की सीमा, राष्ट्रीय मार्ग, राज्य मार्ग, पुलों आदि से 50 मीटर दूरी पर खनन किया जा सकता है। जबकि माइनिंग डिपार्टमेंट व माइनिंग ठेकेदारों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए पोकलेन लगाकर 200-200 मीटर आबादी की सीमा, राष्ट्रीय मार्ग, राज्य मार्ग, पुलों आदि से 50 मीटर की सीमा व किसानों की निजी भूमि में अवैध खनन कर दिया है।

खबरें और भी हैं...