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बिजली कनेक्शन की फाइल खोजने के लिए एईएन कार्यालय में उपभोक्ताओं को लगा दिया, मिल गई तो ठीक वरना नई की डिमांड

3 वर्ष पहले
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हर घर तक बिजली पहुंचाने की योजना को सरकार के ही कार्मिक कितनी गंभीरता से लेते हैं। यह बुधवार को जोधपुर डिस्कॉम के नोखा एईएन (ओएंडएम) कार्यालय में देखने काे मिला। यहां नवंबर, 2017 में जमा एपीएल वर्ग के लोगों की फाइल उनके आवेदकों को मिल नहीं। कार्मिकों से संपर्क किया तो बोले खुद खोज लो। मिल जाए तो ठीक, वरना दूसरी फाइल लाना। इसके बाद उन्हें एईएन कार्यालय के स्टोर रूम में लगे फाइलों के अंबार के बीच बैठा दिया। उन्हें जरा भी अफसोस नहीं हुआ कि वे किसी के घर में पहली बार बिजली पहुंचने के सपने को तोड़ रहे हैं।

29, 640 आवेदन के डिमांड जारी करने का दावा :डिस्कॉम एसई (ग्रामीण) हवासिंह ने बताया कि अभी तक इन्हें पंडित दीनदयाल योजना में 29,640 अावेदन मिले। इनमें से सभी के डिमांड नोटिस जारी कर दिए। अभी तक 10,620 डिमांड जमा हुए हैं और उनमें से 25 अप्रैल तक 2716 कनेक्शन कर भी दिए।

फाइल के तीन सौ रुपए लेते हैं कार्यालय के बाहर : नई फाइल बनाने के लिए एईएन ऑफिस के बाहर ही दुकानदार तीन सौ रुपए का चार्ज ले रहे हैं।

हर फाइल की जिम्मेदारी एईएन की, सुधार के लिए कार्रवाई करेंगे: एईएन ऑफिस में आने वाली हर फाइल की जिम्मेदारी एईएन की ही होती है। यह कहना है डिस्कॉम एसई का। उन्होंने कहा कि ऑफिस में अगर फाइल सही नहीं है तो उस सिस्टम में सुधार करवाएंगे। उपभोक्ताओं को परेशान करने वालों पर कार्रवाई करेंगे।

अपने घर तक पहली बार बिजली पहुंचाने के लिए लगाए आवेदन को खोजते ग्रामीण

टेबल कुर्सी पर बैठे डिस्कॉम के तकनीकी सहायक रुघ सिंह के पास रिकॉर्ड रूम में फाइल खोजने का जतन करते ग्रामीण।

एपीएल को फाइल के साथ देते हैं रसीद, उसमें होती है सारी जानकारी, बीपीएल से लेते हैं कार्ड

पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में एपीएल व बीपीएल दोनों के लिए आवेदन अलग-अलग होते हैं। बीपीएल से डिस्कॉम केवल कार्ड की कॉपी लेता है, सारी फाइल वे ही बनाते हैं। वहीं एपीएल से दो सौ रुपए की रसीद कटाई जाती है, उसमें फाइल की सारी जानकारी होती है।

जिसे मिलती है वह अपनी ले जाता है दूसरे

की फाइल कचरे की तरह बिखेर देता है

पांचू के रूपाराम जाट व कूदसू के रामचंद्र बिश्नोई का कहना है कि उन्होंने 19 नवंबर, 2017 को गांव में लगे शिविर में फाइल जमा करवाई। वे एपीएल आवेदक है तो दो सौ रुपए भी दिए। छह महीने से चक्कर निकाल रहे हैं मगर कार्मिकाें को फाइल नहीं मिल रही। अब हमें कह दिया कि खुद खोज लो। मिल जाए तो ठीक वरना दूसरी बनाकर लाओ। उन्होंने बताया कि जिसे अपनी फाइल मिल जाती है वह दूसरी फाइल को कचरे की तरह बिखेर कर चला जाता है।

कूदसू का रामचंद्र बिश्नोई हो रहा परेशान।

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