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लाल ईंटों से बना रहे सरकारी भवन, विभाग उदासीन, धड़ल्ले से चल रहा अवैध कारोबार

3 वर्ष पहले
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन ने सभी निर्माण कार्य फ्लाईऐश ईंट से किए जाने का निर्देश दिया था। इसके बाद भी कई शासकीय निर्माण कार्य आज भी लाल ईंटों से किया जा रहा हैै। लेकिन प्रशासन किसी प्रकार की कार्रवाई न कर मूक दर्शक बना हुआ है। कई बार शिकायत के बाद भी निर्माण ऐजेंसी व ठेकेदार शासकीय नियमों व कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

ब्लाॅक के देवसरा ग्राम के स्कूल में बाउंड्रीवाॅल का निर्माण लाल ईंट से किया जा रहा है। तत्कालीन कलेक्टर नीरज बंसोड़ ने 5 जनवरी को आदेश जारी कर शासकीय निर्माण में लाल ईंटों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। किन्तु आज भी लाल ईंटों का उपयोग बिना किसी रोक टोक के धड़ल्ले से किया जा रहा है। शासन व कलेक्टर के आदेश का प्रभाव ठेकेदार व निर्माण ऐजेंसियों पर दिखाई नहीं दे रहा है। लाल ईंट से निर्माण होते देखकर भी अधिकारी कार्रवाई से बचते रहे हैं। निर्माण एजेसीं लाल ईंट का प्रयोग करती है, जबकि फ्लाईऐश ईंट का बिल लगाकर रकम निकाला जा रहा है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

पंडरिया. ब्लाक के ग्राम देवसरा स्थिति स्कूल में बाउंड्रीवाॅल का निर्माण लाल ईंटों से किया जा रहा है।

हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना की पीटिशन लगाएंगे: राजू जैन

फ्लाईऐश ईंट निर्माता राजू जैन ने बताया कि फ्लाई ऐश ईट के उपयोग के लिए आदेश जारी किया था। हाईकोर्ट ने भी 4 दिसंबर 17 को फ्लाई ऐश ईट के उपयोग के लिए आदेश जारी कर चुका है। शासकीय निर्माण में लाल ईटों के उपयोग पर रोक नहीं लगाई जाती हैं तो आदेश की अवमानना का पीटिशन पुनः उच्च न्यायालय में लगाया जाएगा।

कार्रवाई का अधिकार विभाग को

सरकारी भवनों के निर्माण में लाल ईंटों के उपयोग पर शासन ने प्रतिबंध तो लगाया है। जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। लाल ईटों का उपयोग के विरूद्ध कार्रवाई का अधिकार एसडीएम और खनिज विभाग काे है। केपी संत, एई, पीडबल्यूडी

भट्‌ठों में खपा रहे कीमती लकड़ियां क्षेत्र का वातावरण दूषित हो रहा

इंदौरी|जिले में लाल ईंट की मांग अधिक होने के कारण ईंट भट्ठा का जगह जगह धड़ल्ले से संचालन किया जा रहा है। हर दिन ईंट भट्ठे लगाए जा रहे हैं। जिसमें हरे-भरे पेड़ कीमती लकड़ियां स्वाहा हो रही है। पूरे क्षेत्र का वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है। इसके बाद भी खनिज अमला लाल ईंट भट्ठा को बंद कराने के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। क्षेत्र में लगभग 50 ईंट भट्ठा संचालित हो रहा है।

शासन ने लाल ईंट का उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है। इसके बाद भी लाखों की संख्या में रोज लाल ईंट खपाए जा रहे हैं। यही कारण है कि जगह-जगह अवैध ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है।

कुकदूर वन क्षेत्र में चोरी की बिजली से चल रहे ईंट भट्‌ठे

कुकदूर| वनांचल में धड़ल्ले से संचालित हो रहे अवैध ईंट भट्ठे चल रहे हैं और लाखों रुपए की रायल्टी चोरी कर अपनी जेब भर रहे हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होना दोनों की मिलीभगत का संदेह पैदा करता है।

इन ईंट भट्‌ठों में बहुमूल्य वन संपदा और नदी, नाले व निस्तारी तालाब जैसे प्राकृतिक जल स्रोतों का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है। नतीजा वन क्षेत्र का रकबा घटने के साथ ही वनांचल में जल संकट भी गहराते जा रहा है। ईट भट्ठा के लिए राजस्व विभाग एवं खनिज विभाग की अनुमति लेकर ही केवल अपनी जरूरत के लिए ईंट बनाई जा सकती है। जबकि कुकदूर वनांचल के लोखान, मुनमुना, कुकदुर, सेमरहा, खाम्ही, अमेरा, दमगढ, महीडबरा, लखनपुर, पोलमी, पुटपुटा, कामठी अनेक गांवों में धड़ल्ले से लाल ईंट का व्यवसाय चल रहा है। वनांचल में संचालित अवैध ईंट भट्ठों में बिजली चोरी भी हो रही है। किसी भी ईंट भट्ठों में विजली कंपनी से अस्थाई कनेक्शन नहीं लिया है। शासन को जहां राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं दुर्घटना का डर भी हमेशा बना हुआ है।

जांच के बाद जल्द की जाएगी कार्रवाई

ईंट भट्ठों के लिए किसी ने अस्थाई कनेक्शन नहीं लिया है। इस मामले में जल्दी ही जांच कर कार्रवाई की जाएगी। समीर नियोगी, उपयंत्री विद्युत कंपनी, कुकदुर

अभी पंडरिया की ओर कार्रवाई चल रही है। इसके बाद जल्दी ही कुकदूर वनांचल की तरफ कार्रवाई की जाएगी। अर्चना ठाकुर, खनिज अधिकारी कबीरधाम

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