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गर्मियों में बिजली संकट से निपटने के लिए मंगवाए 22 बड़े ट्रांसफार्मर

3 वर्ष पहले
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सुशील भार्गव | राजधानी हरियाणा

बिजली का संकट बड़ा न हो, इससे निपटने के लिए बिजली निगम ने दो माह पहले ही तैयारी शुरु कर दी है। बिजली घरों में ट्रांसफार्मर जलने की सूरत में आपातकाल के लिए 22 बड़े ट्रांसफार्मर मंगाए गए हैं। ये 66 से 132 केवी के होंगे। इनमें से कुछ नए मंगाए गए हैं, जबकि कुछ निगम के पास पहले से उपलब्ध थे। निगम के अधिकारियों का दावा है कि इन्हें पहले से ही बिजली घरों में फिट किया जाएगा। यह ट्रांसफार्मर धान उगाने वाले जिलों के बिजली घरों में स्थापित किए गए हैं, ताकि जून में बिजली सप्लाई के दौरान बाधा आने पर इन्हें तुरंत प्रभाव से चालू किया जा सके।

जून से अगस्त तक बढ़ती है खपत: प्रदेश में जून से अगस्त तक बिजली की खपत बढ़ती है। क्योंकि इन दिनों में खूब उमस होती है और 13 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी होती है। ऐसे में टयूबवेल चलते हैं और बिजली की दरकार अधिक होती है। यही नहीं उमस बढ़ने से सभी एसी, कूलर व पंखे आदि चलते हैं। जहां अभी 1132 लाख यूनिट के करीब खर्च हो रही है, वहीं जून में यह बढ़कर 1500 लाख यूनिट तक पहुंच जाती है।

प्रदेश के बिजली घरों में होगा कंपीटिशन

प्रदेश में बिजली सुधार के लिए करीब 2500 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। मेनटेनेस पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। बिजली कर्मियों को अच्छे उपकरण दिए जा रहे हैं। धान बेल्ट के जिलों करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, फतेहाबाद, पानीपत व हिसार आदि में अधिक जोर दिया जा रहा है, क्योंकि यहां बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है। प्रदेश के सभी बिजली घरों में सफाई को लेकर कंपीटिशन होगा। जहां अधिक सफाई होगी, उस बिजली घर के कर्मियों को सम्मानित किया जाएगा। अक्सर देखने में आता है कि बिजली घरों में साफ सफाई का अभाव रहता है, इससे फाल्ट बड़ी संख्या में होते हैं।

लोगों को नहीं होगी दिक्कत

22 ट्रांसफार्मर प्रदेश के विभिन्न बिजली घरों में रखे जाएंगे, जो आपातकाल में तुरंत चालू हो जाएंगे। इससे बिजली को लेकर लोगों को दिक्कत नहीं होगी। जहां अधिक बिजली की डिमांड होगी, इन्हें वहां रखा जाएगा। जबकि बिजली सुधार पर 2500 करोड़ की राशि खर्च होगी। -पीके दास, एसीएस, बिजली निगम हरियाणा।

11 हजार केवी की लाइन भी टावरनुमा

सर्वे कर पता लगाया कि खेतों में गढ़े बिजली के खंभों के साथ जोड़ी स्टे को किसान उखाड़ देते हैं, क्योंकि यह खेत जुताई में बाधा बनती है। आंधी आती है तो बिजली खंभे उखड़ जाते हैं। इससे लाइन लोस बढ़ता है। अब 11 हजार केवी के बिजली खंभे भी टावरनुमा बनाए जाएंगे। जो कि आंधी को सहन कर सकेंगे।

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