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किले से कब्जा हटाने के लिए 27 को चौथी बार कार्रवाई करेगा प्रशासन

3 वर्ष पहले
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नगर निगम को हाईकोर्ट में 15 मई को जवाब देना है कि किले पर कब्जे मामले में क्या कार्रवाई की है। जैसे जैसे केस की तारीख नजदीक आ रही है प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन ने 27 अप्रैल को चौथी बार कार्रवाई के लिए तहसीलदार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर लिया है। कार्रवाई किस जगह से शुरू करेंगे, इसकी अभी जानकारी नहीं है। इस बार प्रशासन ने की ओर से डीटीपी (डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर) ने अनुमति ली है। डीटीपी विजय राठी ने कहा कि कहां कार्रवाई करेंगे, यह बताना मुश्किल है। एक केस के जवाब में निगम ने हाईकोर्ट में रिपोर्ट दे किले की 54 हजार वर्ग गज जमीन में से 43 हजार वर्गगज पर 242 लोगों का कब्जा दिखाया था। तीन साल पहले निगम के जॉइंट कमिश्नर की कोर्ट में केस चलने के बाद 22 लोगों के हक में फैसला आया था। 218 लोगों को कोर्ट में एक्स पार्टी घोषित कर दिया गया। जबकि दो की पहचान नहीं हो पाई थी। अब यह पूरा मामला एसडीएम विवेक चौधरी की कोर्ट में चल रहा है।

4 कैटेगरी में बंटे केस, जल्दी आएगा फैसला: एसडीएम ने कहा कि पूरे मामले को चार अलग-अलग केस में बांट दिया है। एक जो केस जीत चुके हैं, दूसरा जिनका पुराना केस चल रहा, तीसरा जिनके पास रजिस्ट्री है और चाैथा जिन्हें डिफाॅल्टर घोषित किया था।

किला प्रकरण: पिछले 6 सालों से उलझा है मामला

दो फरवरी को तोड़ी थी जॉइंट कमिश्नर की गाड़ी

2 फरवरी को निगम की टीम किले से कब्जा हटाने पहुंची थी। गुस्साए लोगों ने संयुक्त कमिश्नर की गाड़ी का बंपर तोड़ दिया था। टीम लौट आई थी। केस में 27 फरवरी को निगम को हाईकोर्ट में जवाब देना था। केस की तारीख 15 मई हो गई।

सरकार व प्रशासन लगातार किलावासियों को राहत पहुंचाने का आश्वासन देता रहा है, लेकिन साथ ही मामला हाईकोर्ट में होने की वजह से कार्रवाई का दिखावा भी करता है

सरकार इस केस को क्यों उलझाए बैठी है

सवाल ये नहीं है कि किसने गलती की और किसको सजा मिल रही है। सवाल ये है कि सरकार इस केस को इतने दिनों से उलझाकर क्यों बैठी है। यह दूसरी सरकार है, जिसके कार्यकाल में यह विवाद चल रहा है। हम और पूरा शहर तो यह जानना चाहते हैं कि आखिर इस केस को कब पूरी तरह से निपटाया जाएगा। -ओपी माटा, उपाध्यक्ष, इनेलो

निगम वाले ही असली डिफॉल्टर, क्योंकि एक घर के अलग-अलग नंबर बनाकर भेजे नोटिस

किले वाले निगम अफसरों को ही डिफॉल्टर बताते हैं। नगर निगम की जॉइंट कमिश्नर की कोर्ट ने 242 घरों में 57 को डिफाॅल्टर बनाकर मकान खाली करने और हर्जाना भरने के नोटिस जारी कर दिए। इस पर एसडीएम की कोर्ट में सुनवाई हो रही है। निगम ने एक घर के अलग-अलग नंबर बनाकर नोटिस भेजे हैं। 27 जनवरी 2016 के नोटिस में 284/6 मकान नंबर बताकर नोटिस भेजा। 19 दिसंबर 2017 को इसी मकान को 286/6 बताकर नोटिस भेजा। अब 24 अगस्त 2018 को नोटिस भेजकर फिर इसी मकान को 284/6 बताकर नोटिस भेजा, यही मकान का सही नंबर है।

सही वक्त पर सही पैरवी क्यों नहीं

चुनाव के वक्त ही नेता क्यों जागते हैं। पिछले चुनाव में भी पक्षनेताओं ने वादा किया कि जीते तो रजिस्ट्री आपके हाथ में होगी। मेरे दादा-दादी के साथ माता-पिता भी यहीं गुजरे , 60 साल पहले बसाया गया, लेकिन निगम ने किला पर बसे लोगों की सही पैरवी नहीं की। जानना चाहते हैं कि सही वक्त पर पैरवी क्यों नहीं की जाती। -सुशील भराड़ा, प्रधान, देवी मंदिर इंसार बाजार रोड

सरकार कब किला वालों को राहत देगी

जो लोग आजादी के वक्त से बैठे हैं । कलेक्टर रेट के अनुसार सरकार किला वालों से पैसे लेकर जमीन दे दे। एक तरफ तो लोगों को घर देने की बात होती है और दूसरी ओर उजाड़ने की। हम तो जानना चाहते हैं कि आखिर किला वालों को सरकार कब राहत देने जा रही है। -भीम सचदेवा, प्रधान, दशहरा कमेटी बरसत रोड

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