बेटे का खेल देखने को मां ने सुबह 4 बजे जगकर किया घर का काम
भास्कर न्यूज | पानीपत/थर्मल
बेटे नीरज चोपड़ा का कॉमनवेल्थ में फाइनल मैच सुबह 10 बजकर 5 मिनट से शुरू होना था। इसलिए पहले दिन से ही परिवार तैयारी में जुटा हुआ था। नीरज की मां सरोज को रातभर नींद भी नहीं आई। सुबह 4 बजे उठकर घर के काम निपटाने में लग गईं। पारिवारिक सदस्य और पड़ोसी सुबह 9 बजे से ही टीवी के सामने बैठ गए थे। कुछ ऐसा माहौल था पानीपत के खंडरा निवासी और गोल्ड मेडल विजेता नीरज चोपड़ा के घर का।
10 बजकर 5 मिनट पर मैच शुरू हुआ। मगर दो विदेशी खिलाड़ियों के थ्रो दिखाकर टीवी पर दौड़ का मैच दिखाना शुरू कर दिया। तब चाचा भीम सिंह ने ट्विटर के जरिए लाइव अपडेट बताना शुरू किया। पहले थ्रो में नीरज सबसे आगे चल रहा था, लेकिन अपने बेस्ट से काफी पीछे थे। लेकिन जैसे ही नीरज ने तीसरे अटेंप्ट में 86.47 मीटर भाला फेंका तो मां एकदम से उठ कर बोली अब तो जीत गया नीरज, इसे अब कोई नहीं हरा सकता। करीब सवा 11 बजे परिणाम आया और नीरज ने गोल्ड मेडल जीत लिया तो कहीं ढोल बजने लगे और कहीं मिठाई बांटी। मां ने नीरज से फोन पर बात की।
शाम तक बधाई आई, स्थानीय नेता और प्रशासन भूल गए : नीरज की जीत के तुरंत बाद से लेकर देर शाम तक कहीं से फोन पर बधाई आती रही तो कोई व्यक्तिगत गांव में जाकर बधाई दे रहा था। परिवार को इस बात दुख है कि स्थानीय नेता और प्रशासन इतनी बड़ी उपलब्धी के समय में भी उन्हें भूल गया।
पानीपत. नीरज चोपड़ा के मेडल जीतने के बाद खुशी मनाते परिवार के सदस्य।
17 सदस्यों के संयुक्त परिवार में रहता है नीरज
नीरज खंडरा गांव के एक साधारण से किसान परिवार से आता है। उसके दादा धर्म सिंह ने बताया कि उनका 17 सदस्यों का संयुक्त परिवार एक ही छत के नीचे रहता है। नीरज के पिता और चाचा कुल 4 भाई हैं। नीरज बच्चों मे घर मे सबसे बड़ा है। वह अकेला भाई है और उसकी दो बहनें हैं। 2016 मे उसे भारतीय सेना ने नायब सूबेदार का पद दिया था और अभी वो सेना का हिस्सा है।नीरज 20 साल में कुल 28 मेडल जीत चुका है।
नीरज ने हमेशा हार से सबक लिया
नीरज के दादा धर्म सिंह का कहना है कि वह बहुत मेहनती एथलीट है उसने हमेशा हार से सबक लिया और कमजोरी दूर की। पोलैंड में तीन महीने से विदेशी कोच कैरी कालवर्ड के दिशा निर्देश में तैयार की और उसकी मेहनत रंग लाई है।
बहनें बोलीं : राखी का तोहफा दिया
छोटी बहन संगीता, सविता, चचेरी बहन निक्की, नैंसी और गरिमा भी गौरवांवित हैं। उनका कहना है कि नीरज ने पोलैंड जाने से पहले स्वर्ण पदक लाने का वादा किया था। स्वर्ण पदक जीतकर नीरज ने उन्हें रक्षाबंधन का सबसे बड़ा उपहार दिया है। सुबह व शाम तीन-तीन घंटे अभ्यास करता है। एक महीना नीरज चोट से जूझा, लेकिन हौसला था कि वह देश के लिए कुछ कर दिखाएगा। नीरज ने सपनों को हकीकत में बदल दिया।