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सिविल अस्पताल के इमरजेंसी गेट पर ऑटो में डिलीवरी, बच्चे की मौत

3 वर्ष पहले
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सिविल अस्पताल में इमरजेंसी गेट पर बुधवार को महिला ने ऑटों में बच्चे को जन्म दिया। डॉक्टरों ने तुरंत महिला व बच्चे को प्रसूति वार्ड में भेजा। मगर तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी। महिला खतरे से बाहर है। बाबरपुर के अमित की 25 साल की प|ी हरीश 9 माह की गर्भवती थी। सुबह दर्द उठने के बाद वह दोपहर 1:30 बजे प|ी को ऑटो से लाया था। परिसर में ही महिला ने बच्चे को जन्म दिया। डॉक्टर ने नर्सों की मदद से ऑटो को चादर से ढक ट्रीटमेंट शुरू किया। जच्चा-बच्चा को प्रसूति वार्ड में ले जाया गया। जांच करने पर शिशु मृत मिला। मौत का कारण इंफेक्शन बताया गया है। बच्चा गली-सड़ी हालत में था। उसकी मौत 24 घंटे पहले ही हो चुकी थी। हरीश पहले एक बच्ची की मां है। सीएमओ ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षा मातृत्व अभियान के तहत हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है। इसमें महिलाओं को पूरी जानकारी दी जाती है।

स्टील बर्थ नाम की बीमारी के कारण गई जान

पानीपत. डॉक्टरों और स्टाफ ने ऑटो में ही महिला का उपचार शुरू कर दिया था।

संक्रमण व पानी की कमी से सिकुड़ गया था बच्चा

डा. सुखबीर कौर ने बताया कि बच्चे की मौत संक्रमण व पानी की कमी से हुई है। बच्चा सिकुड़ा हुआ था। महिला ने समय पर जांच कराई होती व डॉक्टर की सलाह ली होती तो बच्चे की जान भी बच सकती थी।

गर्भ अवस्था में ही मर गया था

सिविल सर्जन डाॅ. संतलाल वर्मा ने बताया कि बच्चे को स्टील बर्थ बीमारी थी। 24 घंटे पहले ही मौत हो चुकी थी। इसमें बच्चा सिकुड़ा हुआ होता है। सांस की कमी से बच्चा गर्भ अवस्था में ही मर जाता है। गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद किसी भी समय स्वाभाविक कारणों से गर्भवती महिला का बच्चा गर्भावस्था में मर जाता है, इसे स्टील बर्थ कहते हैं।

महिला ने समय पर जांच नहीं कराई : महिला ने समय पर जांच नहीं करवाई। न ही किसी आशा वर्कर से संपर्क किया जिससे समय रहते बच्चे को बचाया भी जा सकता था। एंबुलेंस की बजाए परिजन महिला को ऑटो से लेकर आए थे।

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