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कहां हैं स्वच्छता के ये ‘ब्रांड एंबेसेडर’

3 वर्ष पहले
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पानीपत | दो अक्टूबर हो या स्वच्छता के नाम पर झाड़ू लेकर फोटो खिंचवाने का कोई भी मौका न चूकने वाले और खुद काे सफाई का ब्रांड एंबेसेडर बताने वाले तमाम नेता व सामाजिक संगठन सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बाद से सफाई के लिए एक बार भी आगे नहीं आए हैं। शहर के हर चौक-चौराहे पर कूड़े का अंबार लगा है। जब भास्कर के रिपोर्टर नरेश मेहरा ने ऐसे सफाई दूतों से बात की तो सभी ने सामने न आने पर तत्काल सफाई दी और गुरुवार को शहर में सफाई अभियान चलाने की घोषणा कर दी।

सबके एक जैसे बहाने

रोहिता रेवड़ी: विधायक

 कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान सफाई के लिए प्रयास किए या नहीं

बिल्कुल किया है। हड़ताल से शहर नरक हाे गया है। कूड़ा उठाने वाली जेबीएम कंपनी को 100 कर्मचारियों की सूची दी है। इन्हें लगाकर शहर की सफाई में योगदान की बात कही है। शहर के लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

भूपेंद्र सिंह : पूर्व मेयर

हड़ताल के दौरान आपने सफाई के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किया

 सिख समुदाय ने डीसी कटारिया से इस संबंध में बातचीत की है, उन्होंने गुरुवार तक हड़ताल खत्म होने का भरोसा दिलाया है। अगर हड़ताल खत्म नहीं हुई तो शहर के सामाजिक संगठनों को साथ लेकर सफाई में जुट जाएंगे।

भास्कर ने पूछा सवाल तो नेता बोले गुरुवार को हड़ताल खत्म न हुई तो हम करेंगे सफाई

महीपाल ढांडा: विधायक ग्रामीण

सफाई अभियान के लिए आपने झाड़ू उठाया था, अब आप कहां हैं

सीएम मनोहर लाल से हड़ताली सफाई कर्मचारियों की मीटिंग हुई है। कई मांगें मान ली, कुछ पर 31 मई तक सहमति बन जाएगी। रही बात झाड़ू उठाने कि तो वह प्रयास मैसेज देने के लिए था। हम तो सिस्टम को लागू करने वालों में हैं।

सुरेश वर्मा: मेयर

आप शहर के प्रथम नागरिक, सफाई के लिए क्या प्रयास किए

 एडीसी की अध्यक्षता में कई दिन पहले बैठक हुई थी। उसमें पार्षदों ने आश्वास दिया था कि साथ खड़े हाेकर सफाई करवाएंगे। जब कंपनी वाले गए तो कोई नहीं मिला। मैंने अपने क्षेत्र में सफाई के लिए खुद फोन किए, लेकिन मेरे क्षेत्र में नहीं आए।

संजय भाटिया सही बात है कि मैं आगे नहीं आया। माफी मांगता हूं। संगठन के कार्यों में व्यस्त रहने से ध्यान नहीं दे पाया। समाज सेवियों संग सफाई करवानी चाहिए थी।

ललित गोयल: उद्योगपति व समाज सेवी

जरूरत पड़ी तो पीछे क्यों हटे

हम सिर्फ सहयोग करते रहे हैं और लोगों को जागरूक करते रहे हैं। आज हड़ताल के कारण कचरा नहीं उठ रहा है। कचरा उठाने वाले ही हड़ताल पर हैं तो हम क्या करें। हम कचरा उठाकर ट्रॉलियां तो नहीं भर सकते। यह काम तो कर्मचारियों को ही करना पड़ेगा।

फोटो खिंचाने के लिए झाड़ू और कस्सी थामने वाले नेता आजकल दिख नहीं रहे

8 जून 2017 विधायक रोहिता और ढांडा ने झाड़ू थाम खूब फोटो खिंचवाए थे।

अजय सिंगला: टीम आवाज

अकसर शहर के अहम मुद्दे उठाए, अब चारों तरफ फैली गंदगी पर क्यों चुप हो

शहर के नेता और प्रशासन नहीं चाहता कि सफाई हो। हमारी टीम सफाई को तैयार है। नगर निगम के सफाई कर्मचारी ही तो हड़ताल पर हैं। अधिकारी भी कार्यालय नहीं आते। उनकी भी मौज हो गई। जबकि सबसे पहले उन्हें ही प्रयास करने चाहिए थे।

डॉ. अर्चना गुप्ता अन्य अभियान में व्यस्त थी। इसलिए समय नहीं मिल पाया। गुरुवार तक हड़ताल खत्म नहीं होती, तो भाजपा महिला मोर्चा की महिलाएं खुद झाड़ू उठाएंगी।

सुरेंद्र गर्ग: पार्षद

कई बार सफाई के नाम पर फोटो खिंचवाए, आज आगे क्यों नहीं आए

अपने वार्ड में अपनी जिम्मेदारी से सफाई करवाई है। जेबीएम कंपनी के कर्मचारियों को साथ लेकर कूड़ा उठाया है। अब तक यही सोचते रहे कि हड़ताल खत्म होगी, जल्दी ही बंद नहीं होती तो अन्य वार्डों में भी सफाई करवाएंगे।

दुष्यंत भट्ट: पार्षद

सफाई के लिए क्या प्रयास किए

यह संवेदनशील विषय है। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर पहलेे ही सरकार व संगठन को अवगत करवाया था। इस विषय पर कोई विवाद नहीं चाहते थे। हड़ताल दुर्भाग्यपूर्ण रही, पूरा शहर नरक हो गया। वार्ड-24 में महिलाएं घर के बाहर से सफाई करती हैं।

5 जून 2017 पूर्व मेयर भूपेंद्र ने कीचड़ निकाल खूब पब्लिसिटी बंटोरी थी।

मेहुल जैन: सर्व संगठन सेवा संस्थान

सफाई के नाम अकसर फोटो खिंचवाते थे, अब आपकी जरूरत, आगे क्यों नहीं आए

डीसी ने जल्दी हड़ताल खत्म होने की बात कही थी। गुरुवार को खत्म नहीं हुई तो खुद झाड़ू व कस्सी उठाकर सफाई कराएंगे। लेकिन डर इस बात का भी है कि कर्मचारी ही कर्मचारी को पीट रहे हैं। संगठन वालों से अभद्र व्यवहार हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा।

सुरेश काबरा: सर्व संगठन सेवा संस्थान

सफाई के नाम अवाॅर्ड ले चुके हो, इस समय क्या किया

यह काम तो प्रशासनिक तौर पर होना है। आश्वासन मिलता रहा। सुपरविजन ही कर सकते हैं। स्वीपर वाला काम तो स्वीपर ही करेगा। कुरुक्षेत्र में एक आयोजन होना है। उसमें बहुत व्यस्त रहा हूं। सरकार के लेवल पर भी कुछ नहीं हो रहा।

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