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अब जिमखाना क्लब को चलाएगी प्राइवेट कंपनी पांच साल पहले हुए मर्डर केस के बाद से है बंद

3 वर्ष पहले
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सेक्टर-25 स्थित जिमखाना क्लब कभी शहर के वीआईपी लोगों की शान होता था, वो एक मर्डर होने के बाद से बंद पड़ा है। सीएम 3 साल पहले इसके रेनोवेशन के लिए घोषणा कर चुके हैं। दो डीसी इसका रेनोवेशन करवा कर इसे दोबारा शुरू करने की योजना बना चुके हैं, लेकिन अभी तक इसे शुरू नहीं कर पाए। अब नई डीसी ने नए सिरे से काम करने का मन बनाया है, जिस पर जल्द ही योजना बनाई जाएगी।

17 नवंबर 2003 में शहरवासियों की सुविधा और मनोरंजन के लिए सेक्टर-25 पार्ट-2 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने इस जिमखाना क्लब का उद्‌घाटन किया था। कुछ वर्षों तक काफी अच्छा चला और शहर के वीआईपी यहां एकत्रित होते थे।

8 नवंबर 2013 को यहां हुए एक मर्डर के बाद इसे बंद कर दिया गया था। इसके बाद शहर के लोगों की तरफ से कई बार इसे शुरू करने की मांग की गई। इसी के आधार पर सीएम मनोहर लाल ने इसे शुरू करने की घोषणा की थी। करीब पांच एकड़ जमीन में निर्मित जिमखाना क्लब शहर की शान था। उस समय में इसका सदस्य बनने के लिए 25 हजार रुपए सदस्यता फीस और 200 रुपए प्रति माह शुल्क तय किया गया था।

जानिए... जिमखाना पर कब क्या-क्या हुआ

फाइल घूमती रही

8 जून 2015 को सीएम मनोहर लाल ने लोगों की मांग पर 1 करोड़ रुपए खर्च कर इसे शुरू करने की घोषणा की। हुडा अधिकारियों की कार्यशैली का हिसाब इसी से लगाया जा सकता है कि जिमखाना के रेनोवेशन की फाइल डेढ़ साल तक केेवल घूमती रही।

‌‌‌‌‌‌6 करोड़ की बात कह कर मना किया

पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन से 5 करोड़ और हुडा ने 1 करोड़ का एस्टीमेट तैयार कराया था। 5 करोड़ से इसमें स्विमिंग पूल का नवीनीकरण, लिफ्ट सहित अन्य सुविधाएं और एक करोड़ से बिल्डिंग पेंट, मरम्मत, आिद होना था। लेकिन बजट का अभाव दिखाकर बाद में मना कर दिया।

वेस्ट कर दिए पैसे

वर्ष 2017 में हुडा ने खुद इसका रेनोवेशन शुरू किया। जिसमें 35 लाख रुपए से बिल्डिंग पेंट, मरम्मत, बाथरूम सुधार, टायल लगाना, नया फर्नीचर, एसी व्यवस्था, जिम एवं खेल उपकरण और लाइटिंग जैसी सुविधाओं का सुधार भी किया गया। वहीं, 65 लाख की राशि से इसके अंदर इंटीरियर डिजाइन, स्वीमिंग पूल और लान टेनिस की सुविधा पर काम हुआ। लेकिन इन सब पर पैसा लगाकर उसे वेस्ट कर दिया और इसे शुरू नहीं किया गया।

2 डीसी भी कर चुके प्रयास

जिमखाना क्लब शुरू करने के लिए सीएम की घोषणा के बाद दो डीसी प्रयास कर चुके हैं, जो फ्लाॅप रहे। सबसे पहले डीसी समीर पाल सरो ने इसके लिए योजना बनाई, लेकिन बजट के अभाव में केवल कागजों में ही प्रयास सीमित रह गए। वहीं, इनके बाद आए डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे ने इसमें रेनोवेशन शुरू कराया। एक अप्रैल 2017 को इसे शुरू करने की तारीख तक फाइनल हो गई थी, लेकिन उनकी योजना भी काम नहीं आई।

अब पास के एरिया में अवैध कब्जे

जिमखाना क्लब अब पूरी तरह बंद है। यहां की स्थिति देख किसी को अंदर जाने का मन नहीं करता। इसके पास करीब 8 एकड़ पर रेत बजरी का खुलेआम कारोबार हो रहा है। फिलहाल ये प्रशासन की नजरों से तो दूर है, लेकिन जनता की आंखों में धूल झोंक रहा है। अगर कोई यहां अपना कार्यक्रम करना भी चाहे तो इसे रेत बजरी के कारण नहीं कर सकता।

कब्जे हटाना चुनौती भी और जरूरी भी

जिमखाना क्लब के पुराने सदस्यों का कहना है कि जब ये क्लब चलता था तो इससे शहर के वीआईपी जुड़े हुए थे। इसके बंद होने के बाद कोई ऐसा स्थान नहीं रहा, जहां शहर का उच्च वर्ग एकत्रित होता हो। इसके दोबारा शुरू होते ही यह वर्ग अब भी इससे जुड़ने को तैयार है, लेकिन पास की जमीन पर कुछ प्रभावी लोगों ने रेत बजरी और मकान बनाने का अन्य मैटीरियल डाल कर कब्जे किए हुए हैं। इनके रहते यहां पर आयोजन संभव ही नहीं हैं।

प्रशासन केवल थोड़ी मरम्मत कराएगा

नई डीसी सुमेधा कटारिया ने इसे शुरू करने के लिए फिर से प्रयास किए हैं। इस बार प्रशासन कोई पैसा खर्च नहीं करेगा। डीसी ने इसको लेकर विभिन्न अधिकारियों की बैठक बुलाई थी, जिसमें तय किया गया कि इसे प्राइवेट हाथों में सौंपा जाए। जिसके लिए प्रशासन केवल मामूली मरम्मत या पेंट आदि का काम करवाकर इसे ठेके पर देगा। क्लब को ज्यादा पैसे, ज्यादा सुविधा देने वाले को दिया जाएगा।

जल्द से जल्द करेंगे शुरू : एसडीएम

इसके लिए बैठक हुई थी, जिसमें हमसे भी सुझाव मांगे गए थे। इसके बाद प्राइवेट संस्था से इसे शुरू करने की योजना बनाई है। जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय होने के बाद इसे किसी संस्था को सौंपा जाएगा। हमारा प्रयास है कि इसे जल्द से जल्द से शुरू किया जाए। - विवेक चौधरी, एसडीएम।

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