वार्डबंदी पर 10 दिन तक डीसी को दे सकते हैं शिकायत
सुधार के लिए वार्डबंदी का ड्राफ्ट ओपन कर दिया गया है। वार्डबंदी के वर्तमान स्वरूप में सुधार चाहते हैं तो 10 दिनों तक डीसी कार्यालय में शिकायत दे सकते हैं। नगर निगम कमिश्नर शिव प्रसाद शर्मा ने कहा कि वार्डबंदी ड्राफ्ट निगम कमिश्नर कार्यालय के साथ ही डीसी कार्यालय में भी देख सकते हैं। कमिश्नर ने कहा कि जिसे वर्तमान वार्डबंदी से आपत्ति है वह तर्कों के साथ अपनी समस्याएं रख सकते हैं। डीसी के पास ही अंतिम समाधान होगा।
इस बीच शुक्रवार को कांग्रेस पार्षदों ने वार्ड-17 से सुनील वर्मा व वार्ड-21 से बृजभूषण ढींगड़ा के साथ ही सुभाष बठला, सरदार बलजीत सिंह व रामचंद्र कादियान ने वार्डबंदी का विरोध किया। सुनील वर्मा ने कहा कि निगम कार्यालय से ड्राफ्ट कॉपी मांगी है। एक बार पूरा ड्राफ्ट देखने के बाद शिकायत करेंगे। वहीं, सरदार बलजीत सिंह ने कहा कि वार्ड-20 को अब 26 बनाकर 6 किलोमीटर दायरा कर दिया गया है। गीता कॉलोनी और बाबरपुर को एक ही वार्ड में डालकर निगम वाले क्या साबित करना चाहते हैं, समझ से परे है।
26 वार्डों में 7 रिजर्व
नए नगर निगम में 26 वार्ड होंगे। जिसमें 19 सामान्य वर्ग, 5 अनुसूचित जाति और 2 पिछड़ी जाति के वार्ड होंगे। इन 26 17 वार्ड पुरुषों के और 9 वार्ड महिलाओं के होंगे। महिलाओं में दो वार्ड एससी कैटेगरी के लिए आरक्षित किए जाएंगे।
भास्कर न्यूज | पानीपत
सुधार के लिए वार्डबंदी का ड्राफ्ट ओपन कर दिया गया है। वार्डबंदी के वर्तमान स्वरूप में सुधार चाहते हैं तो 10 दिनों तक डीसी कार्यालय में शिकायत दे सकते हैं। नगर निगम कमिश्नर शिव प्रसाद शर्मा ने कहा कि वार्डबंदी ड्राफ्ट निगम कमिश्नर कार्यालय के साथ ही डीसी कार्यालय में भी देख सकते हैं। कमिश्नर ने कहा कि जिसे वर्तमान वार्डबंदी से आपत्ति है वह तर्कों के साथ अपनी समस्याएं रख सकते हैं। डीसी के पास ही अंतिम समाधान होगा।
इस बीच शुक्रवार को कांग्रेस पार्षदों ने वार्ड-17 से सुनील वर्मा व वार्ड-21 से बृजभूषण ढींगड़ा के साथ ही सुभाष बठला, सरदार बलजीत सिंह व रामचंद्र कादियान ने वार्डबंदी का विरोध किया। सुनील वर्मा ने कहा कि निगम कार्यालय से ड्राफ्ट कॉपी मांगी है। एक बार पूरा ड्राफ्ट देखने के बाद शिकायत करेंगे। वहीं, सरदार बलजीत सिंह ने कहा कि वार्ड-20 को अब 26 बनाकर 6 किलोमीटर दायरा कर दिया गया है। गीता कॉलोनी और बाबरपुर को एक ही वार्ड में डालकर निगम वाले क्या साबित करना चाहते हैं, समझ से परे है।