ज्ञानी, ध्यानी व योगी से बढ़कर होते हैं भक्त : तेजस्वी दास
पानीपत| सनौली रोड स्थित श्री कांशी गिरि मंदिर में जीबीपीएस की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन श्री धाम वृंदावन से पहुंचे जीवानुग कृष्णतत्ववेत्ता तेजस्वी दास महाराज ने प्रवचन किया। इस दौरान उन्होंने भक्तों को संसार में ज्ञानी, ध्यानी व योगी से बढ़कर बताया। उन्होंने ऋषि दुर्वासा के एक प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि वह स्वयं को सबसे बड़ा योगी मानते थे, लेकिन उन्हें भी अंबरीश के चरणों में झुकना पड़ा था। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का भी वर्णन किया। बताया कि एक बार ऋषि दुर्वासा दुर्योधन के पास गए। दुर्योधन ने उनकी खूब सेवा की और कहा कि पांडवों को भी सेवा का अवसर दें। इसके बाद ऋषि अपने शिष्यों के साथ पांडवों के पास पहुंचे। वहां राशन नहीं होने पर द्रोपदी ने श्रीकृष्ण को याद किया और भेजन उपलब्ध हाे गया। इसके बाद ऋषि भगवान विष्णु के भक्त अंबरीश के पास गए और उनकी चरणों में गिर पड़े और बोले कि भक्त ही ज्ञानी, ध्यानी व योगी से बड़ा होता है।