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शहर के सबसे व्यस्त 15 प्रमुख चौक-चौराहे, इन्हीं पर 24 घंटे लगे रहते हैं गंदगी के ढेर, आमजन परेशान

3 वर्ष पहले
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इंसान और स्थान की पहचान उनकी किसी खासियत के कारण होती है, इयी तरह पानीपत में सबसे व्यस्त व प्रमुख माने जाने वाले 15 ऐसे चौक चौराहे हैं, जिनकी पहचान गंदगी के ढेरों से ही है। ये गंदगी के ढेर ही इनके पते हैं। 24 घंटों में शायद ही किसी समय यहां से कचरा साफ होता हो। इन स्थानों पर ज्यादातर लावारिश पशुओं व सुअरों का भी जमावड़ा रहता है और यह जानवर गंदगी में मुंह मारकर उसे और फैलाते हैं। शहर में घरों से निकलने वाले सूखे कचरे को डालने के लिए लोगों की सुविधा के लिए 25 स्थानों पर 38 डस्टबिन रखे हैं। इनमें से ज्यादातर टूट चुके हैं। गंदगी वाले क्षेद्यों में रहने वाले लोगों का कहना है कि विधायकों या निगम अधिकारियों के पास शहर के साफ सुथरे पार्कों को उजाड़कर दोबारा सुंदर बनाने या पहले से पक्की व साफ सुथरी सड़काें को उखाड़कर या उखाड़े बिना ही इंटरलॉकिंग टाइल बिछाने के लिए तो राशि है। लेकिन खस्ताहाल व टूटे-फूटे डस्टबिन को बदलने के लिए राशि नहीं है।

इन सथानों पर रहती है गंदगी की ढेर : शहर में प्रमुख रूप से असंध रोड फ्लाई ओवर के पास, स्काई लार्क रोड पर लोधी पार्क के चौक, तहसील कैंप में फतेहपुरी चौक, सेक्टर-12 में कमिश्नर चौक, सनौली रोड पर गंगापुरी रोड, सनौली रोड पर मंदिर भीम गौडा चौक, सनौली रोड पर लऊवाला गुरुद्वारे के सामने, किशनपुरा में खन्ना रोड, बस स्टैंड के पास सुखदेव नगर रोड, संजय चौक पर पालीवाल भवन के पास, देवी मंदिर रोड, देशराज कॉलोनी में ड्रेन-1 के पास कूड़े के ढेर हैं। वहीं नूरवाला तालाब, सेक्टर-25 में जिम खाना क्लब के पास, गोहाना रोड पुलिस चौकी के नीचे, नूरवाला, सेक्टर-12 मेें ऊझा रोड पर बनाए गए डस्ट जोन की भी नियमित सफाई नहीं हो पाती।

16 लाख रुपए में ही आ सकते हैं करीब 40 डस्टबिन : एक डस्टबिन तैयार होने पर अनुमानित कीमत 40 हजार रुपए तक आएगी। इस तरह शहर में 40 नए डस्टबिन रखे जाएं तो ये मात्र 16 लाख रुपए में ही तैयार हो जाते हैं। एक डस्टबिन की क्षमता करीब एक टन तक रहती है।

पानीपत . सनौली रोड पर फैली गंदगी। जिस कारण लोगों को परेशानी हो रही है।

शहर में सफाई व्यवस्था दुरुस्थ करने पर ही ध्यान केंद्रित है

इन दिनों शहर में सफाई व्यवस्था ही दुरुस्त करने पर ध्यान केंद्रित है। आए दिन अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ बैठक करके यही विषय तैयार कि जाते हैं कि किस तरह से शहर को सुंदर बनाया जाए। कंपनी अधिकारियों से भी यही बातचीत चल रही है कि सफाई व्यवस्था की कार्यप्रणाली कैसे मजबूत की जा सकती है।\\\'- प्रदीप कुमार, कमिश्नर, नगर निगम पानीपत।

साफ-सुथरे पार्कों की बजाय गंदे व टूटे डस्टबिन बदले जाए

शहर के साफ सुथरे पार्काें को उजाड़ कर दोबारा निर्माण कराया जा रहा है। हमारे द्वारा चुने गए प्रतिनिधि अपनी नजर कभी टूटे-फूटे डस्टबिन पर भी डाल लें तो ये भी बदल सकते हैं।\\\' -राजेंद्र सिंह, सनौली रोड।

कोई ऐसा चौक नहीं, जो गंदा ना हो

शहर में शायद ही कोई ऐसा चौक चौराहा हो, जो साफ सुथरा हो। ज्यादातर चौराहों पर गंदगी के ढेर ही लगे रहते हैं। प्रशासन व नेता सफाई की ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे। -\\\'सौरभ, न्यू् हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी।

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