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गर्भवती को लेबरपेन के बावजूद जबरन छुट्टी कर रहा था अस्पताल स्टाफ, परिजनों के हंगामे पर फिर किया एडमिट

3 वर्ष पहले
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सिविल अस्पताल में आने वाले मरीजों को सुविधाएं कम और असुविधाएं ज्यादा मिल रही हैं। बेड की कमी के कारण अस्पताल का स्टाफ गर्भवती महिलाओं की जल्दी छुट्टी कर रहा है। शनिवार को 98 गर्भवती महिला दाखिल थी। स्टाफ ने शुक्रवार से शनिवार 12 बजे तक स्टाफ ने 46 गर्भवती महिलाओं की छुट्टी कर दी। जिन महिलाओं की डिलवरी होनी है या हो गई है, उन महिलाओं को भी स्टाफ एक ही बेड पर शिफ्ट कर रहा है। शनिवार को हथवाला रोड की रहने वाली गुलिस्ता को जो बेड मिला था, उस बेड पर एक अन्य महिला को लेटा दिया गया। गुलिस्ता ने कहा कि उसे लेबर पेन है। इससे बेड पर लेटने पर परेशानी हो रही है। उसने स्टाफ को अलग बेड की मांग की तो अस्पताल स्टाफ ने उसकी छुट्टी ही कर दी, इससे नाराज परिजनों ने स्टाफ के साथ हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा ज्यादा हुआ तो स्टाफ ने फिर से उसे एडमिट किया। इसके अलावा हालात इतने बदतर हैं कि कई मरीजों के तीमारदारों को जमीन पर समय गुजारना पड़ रहा है या फिर सीढिय़ों पर सो कर रात गुजारी पड़ रही है।

नूरवाला की रहने वाली ज्योति ने बताया कि बताया कि एक बेड पर दो महिला होने की वजह से सोने में परेशानी होती है। महिलाओं के साथ में बच्चे भी होते हैं। साथी महिला के पैर पेट पर लगते हैं। इससे बच्चों को चोट लगने का डर बना रहता है।

पानीपत. सिविल अस्पताल में एक बेड पर लेटी दो-दो गर्भवती महिलाएं।

मरीजों से किया जाता है दुर्व्यवहार : शिवनगर की रहने वाली कविता ने बताया कि एक बेड पर दो-दो महिला लेटी थी। जो बेड मुझे मिला उस पर दो अन्य महिलाएं पहले से लेटी हुई थी। वहीं दवाई लेने जाओ तो डाॅक्टर मरीजों से दुर्व्यवहार करते हैं। ठंडा पानी तक नहीं मिला रहा है। जिससे गर्म पानी ही पीना पड़ रहा है।

चादर तक नहीं बदली : रामनगर की रहने वाली दीपा ने बताया कि जिस बेड मुझे लेटाया गया था। उस पर एक अन्य महिला भी थी। उसने बेड पर उल्टी कर दी जिसके बाद बेड की चादर खराब हो गई। लेकिन अस्पताल स्टाफ ने बेड की चादर तक नहीं बदली। चादर से बदबू भी आती है। लेकिन उस बेड पर लेटना मजबूरी बना हुआ है।

औसत से ज्यादा हो रही डिलिवरी, बेड की कमी है

सीएमओ डा. संतलाल वर्मा ने बताया कि जिले की ज्यादातर डिलवरी सिविल अस्पताल में हो रही है। इस समय औसतन ज्यादा डिलवरी होती है। बेड की कमी तो है। लेकिन गर्भवती महिलाओं को वापस भी नहीं भेज सकते। अस्पताल की मजबूरी है। निजी अस्पताल में बेड की कमी हो तो वो वापिस भेज देते हैं। लेकिन हम वैसा नहीं कर सकते। अगर किसी महिला को समय से पहले स्टाफ ने छुट्टी दी है। तो उसे चेक कराएंगे। नई बिल्डिंग में 150 बेड का प्रसूति वार्ड है। उसमें अभी थोड़ा काम बाकी है। उसके बाद गर्भवती महिलाओं को कोई परेशानी नहीं होगी।

पानीपत. सिविल अस्पताल में गर्भवती महिला की छुट्टी करने पर हंगामा करते परिजन।

नॉर्मल डिलिवरी पर 48 घंटे में करते हैं छुट्‌टी : डॉ. अर्चना

डाॅ. अर्चना गुप्ता ने बताया कि अगर नॉर्मल डिलवरी होती है तो जच्चा-बच्चा को 24 से 48 घंटे में छुट्टी मिल जाती है। अगर बच्चा ऑप्रेशन से हो तो उसे कम से कम एक सप्ताह रखना होता है। अगर एक बेड पर दो महिलाओं होगी तो संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।

ठंडा पानी नहीं मिल रहा

सिविल अस्पताल में प्रसुति वार्ड में महिलाओं को ठंडा पानी तक नहीं मिल रहा है। इसके अलावा बेड की चादर तक नहीं बदल रहे स्टाफ के सदस्य। इससे गर्भवती महिलाओं को बदबू में रहना पड़ा रहा है। दो-दो महिलाओं को एक बेड पर ही शिफ्ट कर रहे।

30 बेड का है प्रसूति वार्ड

सिविल अस्पताल का प्रसुति वार्ड इस समय पुरानी बिल्डिंग में चल रहा है। इसमें सिर्फ 30 ही बेड है। बेड की कमी होने के कारण एक बेड पर दो-दाे गर्भवती महिलाओं को शिफ्ट किया जाता है। शनिवार को 98 गर्भवती थी। इसके कारण एक बेड पर तीन-तीन महिलाओं को शिफ्ट किया गया।

46 की छुट्टी कर दी

शनिवार को 98 गर्भवती महिला दाखिल थी। स्टाफ ने शुक्रवार से शनिवार 12 बजे तक स्टाफ ने 46 गर्भवती महिलाओं की छुट्टी कर दी। इनमें से कई महिलाएं तो ऐसी थी। जिन्हें 48 घंटे से भी कम समय रखा गया था। अगर जच्चा-बच्चा स्वस्थ न हो तो उसे कई दिन भी रखना पड़ता है।

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