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लूट की 29 साजिशें पर एक ही कहानी

3 वर्ष पहले
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शनिवार रात काे 3 युवक लूट की साजिश रचते गिरफ्तार किए गए। पुलिस ने दावा किया कि तीनों की गिरफ्तारी टीडीआई पुल के नीचे से हुई है। इस पर लूट की साजिश व गिरफ्तारी के 29 मामलों की पड़ताल की तो सामने आया कि हर बार पहले लुटेरे ही पुलिस को लूटने के लिए रोकते हैं और आखिर में खुद पकड़े जाते हैं। बाद में पुलिस एफआईआर में एक ही स्क्रिप्ट लिखती है कि मुखबिर से सूचना मिली कि फलां जगह पर युवक लूट की साजिश बना रहे हैं। जैसे ही पुलिस वहां गाड़ी की बत्ती उतारकर गई तो आरोपियों ने लूट के इरादे से गाड़ी रुकवाकर सादा कपड़ों में बैठे ड्राइवर पर िपस्तौल तान दी। जैसे ही लाइट जलाई तो पुलिस को देखकर आरोपी भागने लगे और उन्हें पकड़ लिया गया। हमारी पुलिस इतनी तेज है कि लूट की साजिश बनाते हुए बदमाशों को तो पकड़ लेती है, मगर लूट व डकैती होने के बाद पता नहीं क्यों गिरफ्तारी तो दूर सुराग तक नहीं लगा पाती। पानीपत में एसपी संगीता कालिया के जॉइन करने के बाद लूट की साजिश बनाते हुए 3 बार बदमाशों को पकड़ने से पानीपत पुलिस चर्चा में है। इससे पहले जनवरी 2017 से अब तक लूट की साजिश बनाते हुए 29 बार बदमाशों को पकड़ा जा चुका है।

शहर में आए दिन पुलिस अपनी उपलब्धि के तौर पर लूट की साजिश का प्रर्दाफाश करने का दावा करती है। इन मामलों में अधिकतर सजायाफ्ता या आदतन अपराधी प्रवृत्ति के लोगों की गिरफ्तारी दिखाई जाती है। भास्कर ने इस साल के ऐसे सभी मामलों को खंगाला तो यह पाया कि पुलिस द्वारा दर्ज अधिकांश एफआईआर में एक ही तरह की कहानी दी गई है।

केस  : 8 जनवरी

पुलिस सौंदापुर चौक पर थी। मुखबिर ने सूचना दी कि 5 लड़के गढ़ी सिकंदरपुर गांव के पास लूटने की फिराक में खड़े हैं। एएसआई वर्दी और बाकी के पुलिसकर्मी सिविल कपड़े में गाड़ी की बत्ती उतारकर पहुंचे। तभी एक लड़के ने गाड़ी रोक ली। गाड़ी के रुकते ही खेतों में से 4-5 लड़के गाड़ी के चारों तरफ आ गए। एक लड़के ने ड्राइवर की कनपटी पर बंदूक लगा दी। तभी अन्य लड़कों ने गाड़ी के अंदर देखकर आवाज लगा दी कि भागो पुलिस की गाड़ी है। पुलिस ने दबोच लिया।

केस  : 17 जनवरी

पुलिस इंडो फार्म पर थी, मुखबिर ने सूचना दी कि 3 लड़के रिसालु रोड पर राहगीरों को लूटने के लिए खड़े हैं। एएसआई वर्दी में और बाकी के पुलिसकर्मी सिविल कपड़ों में गाड़ी की बत्ती उतारकर पहुंचे। 3 लड़कों ने सामने आकर गाड़ी रोकी व ड्राइवर की कनपटी पर पिस्तौल लगाकर कहा कि जो कुछ ले रहे हो निकाल दो, नहीं तो गोली मार देंगे। गाड़ी के अंदर की लाइट जलाई तो वर्दी में एएसआई काे देखकर आरोपी बोले भागो पुलिस है। बाद में पुलिस ने उन्हें काबू कर लिया।

टीडीआई पुल जहां बनती है हर तीसरी साजिश

केस  : 19 अप्रैल

पुलिस मतलौडा रोड पर ऊंटला मंदिर के पास गश्त पर थी। मुखबिर ने सूचना दी कि 4 लड़के असंध रोड पर ऊंटला मंदिर के पास लूट की फिराक में हैं। मौके पर 4 लड़कों ने गाड़ी को रुकवा लिया। एक लड़के ने सिविल कपड़े में बैठे ड्राइवर की कनपटी पर पिस्तौल लगाकर कहा तुम्हारे पास जो कुछ है, निकाल दो। जैसे ही गाड़ी के अंदर की लाइट जलाई तो गाड़ी के अंदर वर्दी में एएसआई को देखकर चारों भागने लगे। तभी पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।

‘गुप्त सूचना पर पुलिस गाड़ी की बत्ती उतार कर गई तो बदमाशों ने बंदूक तानी, लाइट जलाने पर लुटेरे भागे और हमने पीछा करके दबोच लिए’

...जैसा कि पुलिस की रिपोर्ट में बार-बार दर्ज है

केस  : 13 मई

पुलिस एनएफएल नाका पर थी। मुखबिर ने सूचना दी कि 3 लड़के भादड़ मोड़ पर राहगीरों को लूटने की कोशिश कर रहे हैं। एएसआई वर्दी में और बाकी की पुलिस टीम सिविल ड्रेस में गाड़ी की बत्ती उतारकर पहुंचे। ड्राइवर ने गाड़ी रोकी तो दो लड़के झाडिय़ों से निकले। एक सरिया लेकर गाड़ी के आगे खड़ा हो गया और दूसरे ने ड्राइवर पर पिस्तौल लगा दी। कहा कि जो कुछ ले रहे हो निकाल कर दे दो। नहीं तो गोली मार दूंगा। तभी पुलिस ने तीनों को पकड़ लिया।

19 मई को पुलिस जीटी रोड बाबरपुर अड्डे के पास गश्त पर थी। पेप्सी फ्लाईओवर के नीचे 3 युवकों को लूट की साजिश बनाते पकड़े। सरकारी गाड़ी की बत्ती उतारकर पुलिस गई तो तीनों ने गाड़ी रोक ली। तभी पुलिस ने उन्हें पकड़ा।

ये 4 बड़ी लूट, जिन्हें पुलिस नहीं सुलझा पाई

29 जनवरी को सनौली रोड पर गोल्ड लोन कंपनी आईआईएफएल में 4 करोड़ कैश, सोने की लूट।

22 मार्च को देवी मंदिर के पास देवीमूर्ति कॉलोनी में सूर्या वूलन स्पिनिंग मिल के मालिक की कोठी में 25 लाख की डकैती।

7 अप्रैल को सेक्टर 25 पार्ट-टू में एक्सपोर्टर प्रेम सागर विज के कैशियर शम्मी उर्फ चरणजीत से 10 लाख की लूट।

16 फरवरी की रात को श्रीकृष्णा फिलिंग स्टेशन पर बदमाशों ने पिस्तौल के बल पर सेल्समैन को बंधक बनाकर 48 हजार व 3 मोबाइल लूटे।

पुलिस अपनी मर्जी से कुछ नहीं लिखती : डीएसपी

आरोपियों काे पकड़ने का जो स्थान रिपोर्ट में लिखते हैं असल में भी वहीं से ही पकड़ते हैं। पुलिस अपनी मर्जी से कुछ नहीं लिखती। रही बात गोल्ड लोन कंपनी में हुई 4 करोड़ की लूट के मामले की, जांच डीजीपी की ओर से बनाई गई एसटीएफ को सौंप दी है। वह मामले की अपने तरीके से जांच कर रही है। -राजेश लोहान, डीएसपी

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