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महामारी फैलने के डर से आमजन व सामाजिक संगठन उठा रहे कचरा, टकराव पर उतारू हड़ताली कर्मी, पुलिस ने खदेड़ा

3 वर्ष पहले
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नगर निकायों में 11 दिन से सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इसके चलते प्रदेश के सभी शहरों में कूड़े ढेर लगे हैं। महामारी न फैले इस डर से अब आमजन और सामाजिक संगठनों ने पहल की है। सभी शहरों में पुलिस प्रशासन को साथ लेकर सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता और आमजन खुद कचरा उठा रहे हैं। वहीं, हड़ताल पर गए सफाई कर्मचारी इसके विरोध कर रहे हैं, शुक्रवार रात रेवाड़ी में हड़ताली कर्मियों की पुलिस के साथ झड़प हुई।

सोनीपत में शनिवार को कचरा उठाने के विरोध में आए कर्मियों की पुलिस के साथ बहस के बाद झड़प हो गई। पुलिस ने सख्ती बरतते हुए 323 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद फिर जमानत पर िरहा किया गया। इधर, जींद में लगातार बदहाल हो रही सफाई व्यवस्था पर शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने सामाजिक संस्थाओं व लोगों के सहयोग से कूड़ा उठवाने का प्रयास किया। इस दौरान हड़ताली कर्मियों ने काफी देर तक ट्रैक्टर-ट्राॅलियों, डंपर आदि के आगे खड़े होकर रास्ता रोका। सफाई कर्मियों ने कई ट्रैक्टर-ट्राॅलियों व डंपर में सूए घोंप कर हवा निकाली दी। इसके बाद प्रशासन ने ठेकेदार से साधन मंगवाए और सड़कों पर बिखरे करीब 800 टन कूड़े में से 150 टन का उठान किया गया। प्रदेश के शहरों में कूड़ा उठान न होने से हालात बदत्तर हो गए हैं। सड़कों पर कूड़े के अब बड़े-बड़े ढेर लगे गए हैं।

इधर, पानीपत में श्री दिगंबर जैन मंदिर के पास पड़े कचरे को साफ कर रहे निजी कंपनी के कर्मचारियों के साथ अज्ञात लोगों ने हाथापाई की। एक कर्मचारी को ईंट मार दी। इसी दौरान ट्रैक्टर के डीजल टैंक में चीनी डालकर उसे जाम कर दिया। लोगों की भीड़ व विरोध बढ़ता देख अज्ञात मौके से फरार हो गए।

सोनीपत | शहर के सेक्टर-23 में पुलिस बल और अधिकारियों द्वारा कचरा उठाया जा रहा था। इस दौरान हड़ताली सफाई कर्मचारी विरोध करने पहुंचे तो उनकी पुलिस के साथ भिड़त हो गई। फोटो- भास्कर

250 पुरुष और 73 महिला सफाई कर्मी पाबंद, जमानत पर छोड़े गए

सोनीपत में सेक्टर-23 में कचरा उठाने से रोकने के लिए सफाई कर्मचारी भारी तादाद में पहुंच गए थे। यहां ठेका सफाई कर्मचारियों ने पुलिस का घेराव करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने सफाई कर्मचारियों को खदेड़ दिया। खींच-खींचकर सफाई कर्मचारियों को बसों में भरकर पुलिस अपने साथ ले गई। कर्मचारी नेता खासकर पुलिस के निशाने पर रहे, इनसे तीखी बहस हुई तो पुलिस ने इन्हें भी राउंडअप किया। कर्मचारियों व कर्मचारी नेताओं को पुलिस लाइन में लाकर बाउंड अर्थात पाबंद कर दिया गया। एसएचओ सिटी राजपाल ने बताया कि दोपहर बाद इनकी एसडीएम प्रशांत कुमार के यहां से जमानत हो गई। कैथल, कुरुक्षेत्र, जींद, सिरसा, हिसार में भी पुलिस और कर्मचारियों के बीच तनातनी हुई। पुलिस और आमजन का कहना है कि हड़ताल को कमजोर पड़ता देख कर्मचारी कूड़ा उठाने का विरोध कर रहे हैं। लोगों ने कहा कि यह कूड़ा समय रहते न उठाया गया तो प्रदेश बीमारी की चपेट में आ सकता है।

इन 4 मांगों पर फंसा पेच

1. ठेका प्रथा तुरंत खत्म की जाए। सरकार समय खत्म होने पर दोबारा ठेका नहीं देंगी।

2. समान काम- समान वेतन। इस बारे में सरकार का रवैया स्पष्ट नहीं हैं।

3. सरकार न्यूनतम वेतन 18 हजार दे या चुनावी घोषणा के अनुसार 15 हजार रुपए दे। इस पर भी सरकार ने कुछ नहीं कहा है।

4. कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए। वर्ष 2014 की नीति पर कोर्ट का स्टे लगा हुआ है।

सफाई से रोका तो सख्ती से निपटेंगे: कविता जैन

शहरी एंव स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन ने कहा कि सरकार ने सफाई कर्मचारियों की सभी जायज मांगें मान ली हैं। अब इन्हें हड़ताल खत्म कर काम पर लौटना चािहए, नहीं तो सरकार सख्त एक्शन लेगी। प्रदेश में जन सहयोग से सफाई का कार्य शुरू हो चुका है। जनता में बीमारी न फैले इसलिए सफाई कराई जा रही है। यदि कोई भी कर्मचारी सफाई कार्य में बाधा डालेगा तो सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।

सभी मांगें हो पूरी

कर्मचारी नेता नरेश कुमार शास्त्री और सुभाष लांबा का कहना है कि जब तक निकाय कर्मचारियों की सभी मांगों का समाधान नही होगा हड़ताल किसी भी हालत में वापस नहीं होगी। मुख्य मांग कर्मचारियों को पक्का करने की है।

अब तक की दूसरी बड़ी हड़ताल

वर्ष 1996 में 79 दिन की थी, 43 दिन भूख हड़ताल पर रहे थे प्रधान

फतेहाबाद | हविपा-भाजपा गठबंधन सरकार के समय वर्ष 1996 में भी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल हुई थी, जो 79 दिन चली थी। इस हड़ताल में फतेहाबाद नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रधान रह चुके पूनम चंद रति और भिवानी के शेर सिंह 43 दिन तक भूख हड़ताल पर रहे। पूनम रति ने बताया कि उस समय कर्मचारियों की मांग केवल इतनी ही थी कि उनका वेतन महीने की एक तारीख को मिल जाए। इसके लिए इतनी लंबी हड़ताल चली। बता दें कि उस भी भाजपा- हविपा की सरकार थी। स्थानीय निकाय मंत्री कमला वर्मा थी। अब भी भाजपा सरकार है और मंत्री कविता जैन हैं। दोनों मंत्री की नाम राशि भी एक है। सरकार को उस समय मांगें माननी पड़ी थीं। पूनम रति ने बताया कि इसके बाद 1998 में नर्सों के एक आंदोलन के दौरान दिल्ली में हुई लाठीचार्ज में उनकी एक आँख खराब हो गई थी।

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