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‘अगर चाहते हो कि भगवान मिले तो ऐसे कर्म करो’

3 वर्ष पहले
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भगवान के प्रत्येक श्लोक में जीवन का दर्शन छिपा है। श्रीभागवत कथा के मनन चिंतन एवं श्रवण से लोक और परलोक सुधर सकता है। अगर चाहते हो कि भगवान मिले तो ऐसे कर्म करो जिससे दुआ मिले। रोजाना नेक कार्य करने की सोचे। श्री बांके बिहारी की लीला संगिनी गोपियां एक आर्दश है। उन्होंने अपना गृहस्थ जीवन नहीं छोड़ा, वन में जाकर तप नहीं किया। केवल भगवान से प्रेम किया और भगवान को प्राप्त हो गई। ये संदेश श्री गंगा धाम मंदिर के वार्षिक महोत्सव के दूसरे दिन में पंडित श्री राधे महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि सत्संग व कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है। किंतु संसार में आकर मनुष्य मोह माया के चक्कर में पड़ जाते हैं। इसलिए मनुष्य को भागवत कथा सुननी व पढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि भागवत कथा ज्ञान का संपूर्ण सार है। जीवन में हमेशा भगवान की मर्जी में खुश रहना चाहिए। क्या पता भगवान किसी दिन हमें पूरा समुद्र देना चाहते हो, और हम हाथ में चम्मच लेकर खड़े हो। हमेशा खुश रहना सिखिए, जीवन का नियम भी यहीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रकृति को बचाने के लिए भी कार्य करने चाहिए। कोई व्यक्ति कितना भी महान क्यों न हो जाए प्रकृति से महान कोई नहीं हो सकता। इस अवसर पर सतपाल गर्ग, पं वेद शर्मा, निरंजन पाराशर, महेंद्र शर्मा, कृष्ण गर्ग, दीपक गोयल, मनोज गर्ग, सतीश सैनी,ताराचंद सैनी, सचिन बुद्धिराजा, प्राचार्या मोना बुद्धिराजा, तिलक राज, विनोद मंगला, अजय भाटिया, विजय सिंगला, सन्नी, शिव प्रकाश, डॉ. अतुल गर्ग व भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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