विपक्षी पार्टियों के नेता सत्ता में नहीं हैं तो उन्होंने जनता की परेशानियों से भी मुहं मोड़ रखा है। कई दिनों से कर्मचारियों की हड़ताल के कारण चरमराई शहर की सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए धार्मिक व सामाजिक संगठन के अलावा सतापक्ष के नेताओं व पार्षदों ने प्रशासन व कंपनी के कर्मचारियों को आमंत्रित करके कचरा उठवाने में सहयोग दिया। फिर भी शहर में करीब 2500 टन से अधिक कूड़ा जमा है। इस पर भी विपक्षी पार्टी का कोई नेता इस समस्या से जूझ रहे शहरवासियों के सहयोग के लिए आगे नहीं आया। तेज धूप में कचरे के सड़ने से टाइफाइड, फंगल संक्रमण, इंफेक्शन, त्वचा रोग तथा बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। पर्यावरणविद चिंतित हैं कि गंदगी के आसपास के क्षेत्र में लगे नए पौधों को विकसित होने का मौका नहीं मिलेगा।
वार्ड की समस्याओं पर पार्षदों की राय और उनके जवाब, वार्ड-22 में जुलाई 2015 में 5 बच्चों समेत 7 की हुई थी मौत
सुरेश वर्मा, मेयर एवं वार्ड-7 पार्षद,
सवाल : पूरे शहर की जिम्मेदारी है, सफाई के लिए क्या-क्या कदम उठाए।
जवाब : विकास कार्यों में कोई राजनीति नहीं। शहर के विकास कार्यों के लिए सभी को एकजुट होकर आगे आना चाहिए। वार्डवासियों के साथ तो हैं, ही पूरे शहर की भी चिंता है। अपने वार्ड के साथ-साथ कर्मचारियों को सफाई के लिए भेज रहे हैं।
मंजू कादियान : वार्ड-14
प्रश्न : विपक्षी हुए तो क्या हुआ, हैं तो शहरवासी। जरूरत में साथ क्यों नहीं।
उत्तर : हम शहर को संभालने को तैयार। आज कहां गई व स्वच्छता अभियान की पार्टी। जिस दिन बीजेपी विधायक इस्तीफा देकर हाथ खड़े कर लेंगे, हम व्यवस्था सुधारने के लिए आगे आ जाएंगे। जिस दिन कांग्रेस हाथ में झाड़ू उठाएगी, उस दिन किसी कर्मचारी की जरूरत नहीं होगी। 48 घंटे में कहीं गंदगी नहीं मिलेगी।
सुखविंद्र कौर प|ी बलजीत : वार्ड-20 सवाल : अपने क्षेत्र के लिए आगे क्यों नहीं आए। जवाब : जहां शहर और शहरवासियों के हितों की बात आती है, उस समय कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। कूड़ा उठाने वालों को कई बार बुलाकर सफाई करवाई है।
क्या कहते हैं नेता
शेर सिंह खर्ब : इनेलो नेता
सवाल : मुसीबत में साथ देने के लिए आगे आना चाहिए या नहीं।
जवाब : इन दिनों सरकार पूरी तरह से नाकामयाब है। यही रण है कि सभी कर्मचारी हड़ताल पर है। प्रशासन को शहर की इस भारी समस्या का समाधान करना चाहिए। अगर जल्द ही कर्मियों की हड़ताल खत्म नहीं हुई तो, जनता की परेशानी को देखते हुए इनेलो के कार्यकर्ता भी शहर की सफाई में अपना पूरा योगदान दें।
बुल्ले शाह, कांग्रेसी नेता
सवाल : विपक्ष का काम सिर्फ हंगामा ही है क्या, जनता की सुविधाएं कहां हैं
जवाब : कांग्रेस के शासन काल में कभी ऐसे काम नहीं होते थे। शहर को साफ रखने का सफाई कर्मचारियों का है। हम इसके लिए कस्सी क्यों उठाएं। 10-10 दिन तक शहर में कूड़ा साफ नहीं होता। तो इसे साफ कराने की सरकार की ही जिम्मेदारी बनती है कि कर्मचारियों की मांग मानकर हड़ताल खत्म करवाएं। जनता इसीलिए टैक्स देती है कि उसे मूलभूत सुविधाएं मिलती रहे। हमारा पूरा समर्थन हड़ताली कर्मचारियों के साथ है।
सुशील शर्मा, पार्षद वार्ड-16
सवाल : क्या विपक्ष का काम जनता के साथ खड़ा होने नहीं है।
जवाब: प्राइवेट कर्मी कब तक सफाई करवाएंगे। सरकार को कर्मचारियों को तो मनाना ही होगा। कंपनी के कर्मचारियों की बजाय क्षेत्रीय लोगों को साथ लेकर सफाई करवा रहा हैं। 1996 में बंसी लाल की सरकार में भी इसी तरह से 8 दिन हड़ताल चली थी। यह 12 दिन हो गई है।
बृज भूषण ढींगड़ा, पार्षद, वार्ड-21
सवाल : आपके वार्ड में महामारी का खतरा रहता है, फिर भी आप गंदगी को लेकर गंभीर नहीं हैं
जवाब : ऐसा नहीं है। सफाई कर्मचारियों के साथ खड़े होकर सफाई करवा रहे हैं। असंध रोड क्षेत्र में पास खड़े होकर ट्राली में कूड़ा डलवाया है। सोमवार तक हड़ताल नहीं रुकी तो पूरी गलियों से कूड़ा उठाए।
सुनील वर्मा, वार्ड-17
सवाल : क्या जनता शिकायतें लेकर नहीं मिलती
जवाब : हम सफाई कर्मचारियों का समर्थन करते हैं। सरकार को सफाई कर्मचारियों की मांगें मान लेनी चाहिए। मेरे वार्ड में सफाई कर्मचारी बुलाने पर भी नहीं आते। एक दिन सफाई करने आए थे, दोबारा नहीं आए। हम तो यह चाहते हैं कि सफाई कर्मचारियों की मांग पूरी हो।