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खुशी: सेमेस्टर सिस्टम खत्म हुआ तो 3.88% बढ़ा रिजल्ट चिंता: जिले के हर दूसरे विद्यार्थी में एक ही पास हो पाया

3 वर्ष पहले
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हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी की 10वीं परीक्षा में पानीपत के 53.01% स्टूडेंट्स पास हुए हैं। सेमेस्टर सिस्टम खत्म करने से जिले का परिणाम एक साल में बेशक 3.88% बढ़ा, लेकिन चिंता की बात यह है कि जिले के हर 2 स्टूडेंट्स में सिर्फ एक ही पास हुआ। यह संख्या और भी कम हो सकती थी, लेकिन बेटियों ने मान रख लिया। इसका परिणाम लड़कों से 10 प्रतिशत अधिक रहा और पानीपत का रिजल्ट 53.01 फीसदी तक पहुंच पाया। जिले के 48.46% लड़के व 58.54% लड़कियां पास हुईं। शिक्षाविद इसका कारण दो बातें मान रहे हैं। एक तो विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए कम समय दिया गया है, दूसरा मुख्य कारण शिक्षकों को जून से सितंबर तक ट्रांसफार्मर पॉलिसी में उलझाकर रखा जाना मान रहे हैं। रिटायर्ड प्रिंसिपल नरेश अरोड़ा का कहना है कि इस पॉलिसी में फंसकर शिक्षकों ने विद्यार्थियों को पढ़ाने में कम ध्यान दिया, लेकिन अपने सेंटरों का चयन करने में ज्यादा समय बिताया। जिन शिक्षकों को ट्रांसफार्मर की उम्मीद थी, वे विद्यार्थियों को पढ़ाने से दूर हो गए। जिले में सरकारी हाई स्कूल 31 और सीनियर सेकेंडरी 88 हैं। 250 निजी स्कूल हैं।

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इस बार स्थिति

17497 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी

9246 विद्यार्थी पास हुए

कुल पास प्रतिशत : 53.01%

लड़के

पास प्रतिशत : 48.46%

लड़कियां

पास प्रतिशत : 58.54%

4 सालों की स्थिति

2014-15

2015-16

9584 ने परीक्षा दी

4645 पास हो पाए

7913 ने परीक्षा दी

4632 पास हुई परिक्षा में

41.43%

2016-17

45.05%

2017-18

49.13%

53.01%

माता-पिता के कंधों की शान हैं बेटियां; जिले की टॉपर व प्रदेश में तीसरे नंबर पर रही जिज्ञासा ने साबित कर दिया

जिज्ञासा

पिता: सुखबीर व मां: ममता

निवासी : ग्रीन पार्क तहसील कैंप

स्कूल: टैगोर पब्लिक स्कूल, देवी मूर्ति काॅलोनी

अंक: मैथ 100, साइंस 99, हिंदी 98, सामाजिक अध्ययन 98 व इंग्लिश में 97 अंक हंै।

खासियत : जिला टॉप करने वाली जिज्ञासा ने बताया कि पहली कक्षा से अबतक हर बार प्रथम स्थान पर ही रही है। जो केवल दृढ़ संकल्प से सिद्ध हुआ है।

कुल अंक 494/500, 98.8% (प्रदेश में तीसरा स्थान)

जिज्ञासा का कहना है कि स्कूल में जो विद्यार्थी हर साल टॉपर रहे और जो डाउन रहे, उनके उदाहरण दिए जाते हैं। इसी से कामयाबी का मतलब समझा। पढ़ाई के साथ-साथ खेलने का भी शेड्यूल बनाया। मां ममता निजामपुर सरकारी स्कूल में लेक्चरर व पिता सुखबीर वकील हैं। वे बताते हैं कि उनकी इकलौती बेटी के स्वास्थ्य को लेकर इतने चिंतित रहते थे कि उसे कहते थे, कम पढ़ाई किया कर। मैथ फेवरेट विषय है। इकलौती बेटी होेने के कारण उसे जो बनना है उसकी छूट दी। अब बेटी का सपना आईएएस बनना है। इसमें उसकी हर तरह से मदद करेंगे। हम तो हमेशा ही व्यस्त रहे, दादा-दादी नहीं होने के कारण इसकी नानी ने ही देखभाल की। रात में जब भी आंख खुलती है वह हर समय पढ़ती ही मिलती थी। स्कूल निदेशक एसएच गुप्ता कहना है कि जिज्ञासा जो भी काम करती है, उसमें हमेशा ही प्रथम रही है। उम्मीद है कि भविष्य की परीक्षाओं में भी ऐसी ही रहेगी।

हिमांशु वत्स

पिता: अनिल कुमार व मां: ममता

निवासी: किशनपुरा

स्कूल: नेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, किशनपुरा

अंक: मैथ 99, साइंस 99, हिंदी 98, सामाजिक अध्ययन 89 व इंग्लिश में 98 अंक हैं।

खासियत : अनुशासित जीवन हिमांशु की खासियत है। स्कूल में एक बार लेट पहुंचने पर मार पड़ी थी, उसके बाद अनुशासन ही कामयाबी का मार्ग बना।

प्रेरणादायक; पिता ने अखबार बांट पढ़ाई का खर्च उठाया बेटी ने अखबार में फोटो छपने का सपना किया पूरा

फोटो खिंचने के दौरान दादी का चश्मा उतारती किशनपुरा के सेकेंडरी स्कूल की अंशिका ने 478 अंक लेकर मेरिट में जगह बनाई है। पिता संजीव अखबार बांटते हैं, उनका सपना था कि बेटी की फोटो अखबार में छपे, वो सपना आज पूरा हो गया।

487/500, 97.4%

हिमांशु का कहना है कि वह रोजाना घर से स्कूल आते ही एक घंटे पढ़ाई करता है। इसके बाद एक घंटा रोजाना क्रिकेट खेलता हूं। स्कूल व घर में जब भी समय मिला, एकाग्रता से ही पढ़ा। एमबीबीएस डॉक्टर बनना है इसलिए साइंस को फेवरेट विषय बनाया। सरकार ने वार्षिक परीक्षा लेकर तो जैसे जीवनदान ही दिया है। सेमेस्टर सिस्टम होता तो शायद पास ही हो पाता। सबसे बड़ी बात पिता जी हर रविवार को ज्यादा वक्त मेरे साथ बिताते हैं।

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