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काम बंद करा दबाव बनाना कंपनी की तानाशाही

3 वर्ष पहले
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परिवहन दर कटौती में ट्रक मालिकों ने सहमति नहीं दिए जाने के बाद माइंस कंपनी द्वारा परिहवन बंद करने का मामला अब और बढ़ता जा रहा है। ट्रक मालिक अब बंजारी माता मंदिर के पास माइंस के गेट के पास धरने पर बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

उन्होंने भी माइंस से रेलवे पाइंट तक परिवहन में लगे हाइवा वाहनों को रास्ते में रोक दिया है। इसके बाद भी कंपनी अपनी जिद पर अड़ी हुई है। किसी तरह की कोई अप्रिय घटना हो इसके लिए पुलिस मान मनौव्वल करते दिन भर सुरक्षा दे रही हैं। काम चालू करने की मांग को लेकर कलेक्टर को आवेदन देने के बाद भी कोई पहल नहीं होने से नाराज ट्रक परिवहन संघ के पदाधिकारियों ने शनिवार को अंतागढ़ प्रवास पर पहुंचे सांसद विक्रम उसेंडी मिलकर कंपनी के रवैये और रेट कम होने पर ट्रक मालिकों की स्थिति बदतर होने की व्यथा बताकर ठोस पहल करते हुए तत्काल माइंस में परिवहन कार्य चालू कराने की मांग की।

बस्तर विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष भोजराज नाग ने भी जिले में लौह अयस्क खनन, परिवहन कार्य करने वाले कंपनी के तानाशाही रवैये के खिलाफ आवाज उठाने की बात कही है। इस दौरान श्रीराम बघेल, निखिल राठौर, सुब्रत मजूमदार, रमेश गावड़े, कमलसिंह कोर्राम, शकुंतला नरेटी, घनश्याम सिन्हा, आयनुराम धु्रव, सुमन नाग, संजय सोनी, महेंद्र नाग, अनिल चौधरी, एमएल दुर्गे, अशोक कोला, रामजी नरेटी, शांतिलाल जैन, बिरेन्द्र टांडिया सहित पखांजूर, दुर्गूकोंदल, भानुप्रातपपुर परिवहन संघ के सदस्य उपस्थित थे।

आक्रोश

ट्रक मालिक माइंस के गेट के पास धरने पर बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रहे

दुर्गूकोंदल। ट्रक मालिकों ने माइंस गेट के सामने धरना किया शुरू।

सांसद बोले- कंपनियां लीज के पहले लुभाती हैं

सांसद विक्रम उसेंडी ने कहा कंपनियां लीज मिलने के पूर्व लुभावने वादे करती हैं, लेकिन जब लीज मिलती है और काम चालू होता है तो प्रभावित क्षेत्र के आम जनता और ट्रक व्यवसाय से जुड़े लोगों साथ अन्याय करती है। ट्रक मालिक माइंस के भरोसे ट्रक लिए हैं, वहीं लोहे के कीमत भी प्रति किलो बाजार अधिक दाम मिल रहा है। ऐसी स्थिति में ट्रक परिवहन का भाड़ा कटौती करने से बेहतर बढ़ाया जाना उचित है। लोहे के बाजार भाव को देखकर सामान्य आदमी भी अंदाजा लगा सकता हैं कि कंपनी घाटा में नहीं हैं। दबाव पूर्वक अपने लाभ के लिए पहाड़ी क्षेत्र के ट्रक मालिकों को दबावपूर्वक अपने मर्जी से दर घटाकर काम कराने की उद्देश्य अच्छा नहीं है। अपनी मर्जी से दर घटाने की सहमति नहीं बनी तो काम बंद कराकर ट्रक मालिकों को सड़क पर उतरने के मजबूर करना भी कंपनी के तानाशाही रवैये को दर्शाता है। इस संबंध में कलेक्टर और कंपनी के प्रबंधक से चर्चा कर ट्रक मालिकों को अच्छा परिवहन भाड़ा और काम चालू कराने की बात उन्होंने कही।

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