श्यामलाल पुंडीर | पांवटा साहिब
पुलिस व प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी पांवटा साहिब के जंगलों में अवैध शराब का गोरखधंधा लगातार जारी है। पुलिस की टीम कई बार अवैध शराब का कारोबार करने वालों के खिलाफ मुहिम चला चुकी है। कई बार जंगलों के आसपास ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं व संस्थाओं ने कई बार अवैध शराब का धंधा करने वालों के खिलाफ आवाज बुंलद की है। मगर अवैध शराब निकालने का धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा है।
यह अवैध शराब तस्करों की सहायता से पांवटा शहर में पहुंच रही है। पांवटा क्षेत्र में जामनी वाला पंचायत के खारा के जंगलों में, गिरिपार के भंगानी, डाकपत्थर व कालाअंब के जंगलों में खुलेआम अवैध शराब बन रही है। इन जंगलों में क्षेत्र के कुछ शराब व्यवसायियों ने जंगलों में ही रात-दिन डेरा डाला हुआ है। जंगलों में तारकोल के खाली ड्रमों में तीन दिन तक लाहन भरा जाता है। हैरानी बात तो यह है कि कुछ शराब के धंधे में लगे लोग इसमें नौसादर का उपयोग कर रहे हंै। इससे यह शराब धीमा जहर बनती जा रही है। मगर फिर भी यह अवैध शराब पांवटा के शहर के साथ लगते क्षेत्र बेहड़ेवाला, शिवपुर व जामनीवाला के कई अड्डों पर बिक रही है। पांवटा साहिब क्षेत्र में अवैध शराब जंगलों में बन रही है। इन जंगलों में ही शराब माफियाओं ने कुछ गरीब लोगों को इस काम के लिए दिहाड़ी पर रखा है। यह लोग जंगलों में ही रहते हंै। वहीं पर शराब निकालते हैं। मगर वन विभाग इस पर कोई कार्रवाई नहीं करता, जबकि वन विभाग को वन रक्षक को जंगल बचाने का जिम्मा सौंपा है। मगर जंगलों से ही लकड़ी काटते हंै। इस लकड़ी का उपयोग शराब निकालने के लिए किया जाता है। फिर भी वन विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता। अवैध शराब निकालने का गोरखधंधा पिछले लंबे से बदस्तूर जारी है।
सूचना मिलती है तो पुलिस कार्रवाई करती है | पांवटा के डीएसपी प्रमोद चौहान ने कहा कि जैसे ही पुलिस को कोई सूचना मिलती हैं। पुलिस रणनीति बनाकर अवैध शराब के ठिकानों पर छापेमारी करती है। पिछले दिनों खारा व इसके बाद गिरिपार क्षेत्र में सिंघपुरा पुलिस ने जंगलों में जाकर कार्रवाई की थी।