श्यामलाल पुंडीर | पांवटा साहिब
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर के पांवटा-नाहन एनएच से लगते हरियाणा व उत्तराखंड की सीमा से पर स्थित पांवटा के कर्नल शेरजंग नेशनल पार्क सिंबलवाड़ा में वन्य प्राणीयों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। यहां पर सबसे ज्यादा चीतल व सांभर की संख्या बढ़ी है। विभाग की ओर से सिंबलवाला में पिछले महीने एक रैंडम सर्वे किया था। इस रैंडम सर्वे में पाया गया कि सिंबलवाड़ा नेशनल पार्क में वन्य जीव बढ़े हैं। हालांकि अभी सभी वन्य जीवों की पूरी गणना की जानी है। मगर रैंडम सर्वे में नेशनल पार्क में सबसे ज्यादा चीतल व सांभर बढ़े है। यह नेशनल पार्क चीतल व सांभर के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। इस वन्यप्राणी सैंच्युरी क्षेत्र को कर्नल शेरजंग नेशनल पार्क का दर्जा वर्ष 2013 को मिला है। इससे पहले 1958 में वन्य प्राणी विहार, 1974 में वन्य प्राणी सैंच्युरी बना था। जब यह क्षेत्र सैंच्युरी था, उस समय विभाग के पास कुल 19.2 स्कवेयर किलोमीटर का दायरा था। मगर अब नेशनल पार्क बनने के बाद इस क्षेत्रफ ल बढ़कर 27.91 स्कवेयर किलोमीटर हो गया। इस सिंबलवाड़ा नेशनल पार्क में पक्षियों की जहां 101 प्राजातियां हैं।
चीतल
सांभर
यहां पर जीवों की संख्या बढ़ी
कर्नल शेरजंग नेशनल पार्क सिंबलवाड़ा के आरओ मुंशीराम बताया कि पिछले दिनों विभाग की ओर से एक रैंडम सर्वे करवाया गया। इस सर्वे में पाया गया कि यहां पर जीवों की संख्या बढ़ी है। हालांकि यह रैंडम सर्वे है। इसलिए अभी सभी जीवों की पूरी गणना की जानी बाकि है। इसके बाद ही पशु-पक्षियों की कुल संख्या बताई जा सकती है। इस नेशनल पार्क के लिए पांच साल का मास्टर प्लान केंद्र को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। इस प्लान में एक नेशनल पार्क मे होने वाली हर सुविधाओं की मांग की गई है। मास्टर प्लान स्वीकृत होता है, तो यह सबसे अच्छा नेशनल पार्क साबित होगा।