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कथा सुनने से मन के विकार होते हैं दूर : कमलेश शास्त्री

3 वर्ष पहले
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परतापुर| अढ़ाईश्वर महादेव मंदिर अढ़ाई मौजा पर चल रही गौ रामकथा में रविवार को कथावाचक कमलेशभाई शास्त्री ने मैं शब्द से उठने वाली बुराइयां बताई। उन्होंने कहा कि रावण, कंस का भी मैं यानी अहम के कारण अंत हुआ।

नारी का धर्म है पति की आज्ञा का पालन करना। एक पिता के जीवन में उसके ह्रदय को तोड़ने वाली घटना बेटी की विदाई का पल होता है। जिस पिता के नसीब में बेटियों का सुख नहीं होता, परमात्मा उसे जिम्मेदारी व्यक्ति नहीं समझता। शास्त्री ने कहा कि रामकथा एक ताली है। जैसे ताली बजाने से वृक्ष पर सारे पंछी उड़ जाते है, उसी प्रकार कथा सुनने और करने से मन के विकार दूर हो जाते हैं। भोजन यजमान नारायण लाल बाडिया, मोहनलाल झड़स, लालेंग अवलपुरा, लक्ष्मीचंद पटेल, रूपेंग भाई खरवेड़ा का साफा बांधकर सम्मान किया गया। कथा में सांसद मानशंकर निनामा, पूर्व मंत्री भवानी जोशी, सलूंबर तहसीलदार डायालाल पाटीदार, रमेश नागदा का भी कमेटी सदस्यों ने स्वागत किया। प्रारंभ में मुख्य यजमान हितेश शुक्ला, लालशंकर पाटीदार, विनोद शर्मा, भेमजी पाटीदार, शांतिलाल पाटीदार ने पोथी पूजन किया। सांसद ने गौशाला निर्माण के लिए 10 लाख रुपए की घोषणा की। सोमवार शाम 7 बजे से शहीद हर्षित भदौरिया की स्मृति में कवि सम्मेलन होगा।

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