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सस्पेंड एसएसपी के दो लॉकर से मिले 18 लाख कैश, 1.71 करोड़ के एफडी के पेपर
भास्कर न्यूज | पटना/मुजफ्फरपुर
मुजफ्फरपुर के एसएसपी रहे विवेक कुमार के ठिकानों पर एसवीयू (स्पेशल विजिलेंस यूनिट) की जांच तीसरे दिन भी जारी रही। बुधवार को जांच टीम ने 2 बैंक लॉकर खोले। इनमें 1.71 करोड़ के एफडी (फिक्सड डिपॉजिट) के पेपर मिले। साथ ही करीब 18 लाख कैश और 21.75 लाख की ज्वैलरी बरामद हुई है। बीते मंगलवार को विवेक के मुजफ्फरनगर स्थित ससुराल में आधा दर्जन बैंक लॉकर की चाबी मिली थी। अन्य लॉकर को खोलने के लिए भी कवायद चल रही है। दूसरी ओर पूर्व एसएसपी के मुजफ्फरपुर स्थित सरकारी आवास की जांच में कई महत्वपूर्ण पेपर मिले हैं। जांच टीम ने विवेक कुमार के पर्सनल लैपटॉप को भी जब्त कर लिया है। उसकी जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक लैपटॉप को खोलने में उस समय अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई जब पूर्व एसएसपी ने कोड भूलने की बात कही। हालांकि बाद में कोड याद आने पर लैपटॉप खोला गया। लैपटॉप में अवैध संपत्ति व गतिविधियों से जुड़े कई राज होने की संभावना है।
21.75 लाख की ज्वैलरी जब्त, 6 लॉकर अभी खुलने बाकी
मुजफ्फरपुर आने के 7 माह बाद एक दिन में ही प|ी के नाम कराई 22 एफडी
मुजफ्फरपुर | आय से अधिक संपत्ति बनाने के केस में फंसे निलंबित एसएसपी विवेक कुमार मुजफ्फरपुर में ज्वाइन करने के 7 माह बाद एक दिन में ही प|ी निधि कुमारी के नाम 22 फिक्स डिपॉजिट कराया। विवेक कुमार ने मुजफ्फरपुर में अप्रैल 2016 को ज्वाइन किया था। इनकी प|ी के नाम पर मुजफ्फरनगर के अंसारी रोड स्थित एसबीआई शाखा में 13 नवंबर 2016 को एक-एक लाख रुपए के 22 फिक्स डिपॉजिट हुए। इससे पहले इसी बैंक में निधि के नाम से 18 दिसंबर 2014 को सवा लाख रुपए का फिक्स्ड डिपॉजिट था। इसके अलावा अलग-अलग तिथियों में प|ी के पांच अन्य फिक्स्ड डिपॉजिट में 4.25 लाख रुपए हैं।
यही नहीं, विवेक कुमार के मुजफ्फरपुर और भागलपुर में एसएसपी रहने के दौरान प|ी और ससुराल वालों के नाम 1.27 करोड़ रुपए के 91 फिक्स्ड डिपॉजिट कराए गए।
शराब के खिलाफ पुलिसिया ऑपरेशन की भी जांच
इस बीच पूर्व एसएसपी विवेक कुमार के कार्यकाल में हुए शराब के खिलाफ ऑपरेशन से जुड़ी फाइलों को भी जांच टीम खंगाल रही है। इस बात की जांच की जा रही है कि संबंधित मामलों में तत्कालीन एसएसपी के स्तर पर किसी तरह की गड़बड़ी की गई है या नहीं? खासकर कुछ संगीन मामलों में पूर्व एसएसपी की भूमिका संदेह के घेरे में है।
चर्चा यह भी है कि एक लोकल शराब माफिया को हत्या के संगीन मामले में बचाया गया था। उस माफिया को राजनीतिक संरक्षण भी मिला हुआ है।