राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को ईमानदार व्यक्ति बताया। कहा कि बोफोर्स घोटाले में वे शामिल नहीं थे। लेकिन उनके साथ कई भ्रष्ट थे, जिन्होंने तोप खरीद में धन लिए। राज्यपाल शुक्रवार को व्यावसायिक शिक्षा-चुनौतियां एवं रणनीति पर आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन कर रहे थे। कहा कि वीपी सिंह की सरकार से भाजपा के समर्थन वापस लेने के बाद सरकार बचाने के लिए कुछ गलत प्रयास होने लगे, तो मैंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
बोफोर्स इफेक्ट
बोफोर्स घोटाला ने 1989 के लोकसभा चुनाव को पूरी तरह प्रभावित किया था। हर चुनाव में बोफोर्स का मामला कांग्रेस के विरोधी उठाते रहे। आगामी चुनाव में भी यह मामला फिर उठेगा। हाल में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह बोफोर्स मामले की फिर से जांच करने को तैयार है।
क्या है बोफोर्स सौदा : तत्कालीन सेनाध्यक्ष सुंदरजी ने फ्रांस की सोफ्मा कंपनी की तोपों की खरीद की सिफारिश की थी। लेकिन केंद्र सरकार ने बोफोर्स से ही तोप खरीदने का इशारा किया। दरअसल सोफ्मा कंपनी दलाली देने को तैयार नहीं थी। बोफोर्स घोटाले 1987 में उजागर हुए। इसी मुद्दे पर राजीव गांधी की सरकार चली गई।