ब्राह्मण समाज ने शोभायात्रा में दिखाई एकजुटता
बुधवार को भगवान परशुराम की जयंती के मौके पर विप्र समाज ने गरीब तबका के सैकड़ों लोगों को भोजन कराया। इस अवसर पर विप्र समाज के सक्रिय सदस्य बिष्षु शर्मा, रम्मू शर्मा के साथ उनकी टीम ने शीतलपेय के साथ मिठाई भी बांटी गई। गरीबों को भोजन कराने में विप्र समाज के युवा बेहद आत्मीयता के साथ सेवा कार्य में जुटे हुए थे।
शिव मंदिर परिसर में विप्र समाज के लोगों ने अपने ईष्टदेव भगवान परशुराम की जयंती श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाई। इस अवसर पर शाम 4 बजे निकली भगवान परशुराम की शोभा यात्रा में जयकारों की गूंज दूर तक सुनाई दी। शोभा यात्रा के दौरान शाम को रंगीन आतिशबाजी का भी रोमांचक नजारा देखा गया। भगवान परशुराम की शोभा यात्रा का अन्य समाज के लोगों ने भी जगह जगह आत्मीय स्वागत किया। परशुराम जयंती के कार्यक्रम में महिलाओं ने भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। भगवान परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में एक दिन पहले ही रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो गया था। बच्चों के लिए आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में समाज के सदस्यों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। जयंती के दिन सर्व ब्राह्मण समाज ने प्रातः 6 बजे भगवान शिव का दुग्धाभिषेक कर भगवान विष्णु के छटा अवतार परशुराम की प्रतिमा को नमन कर सभी विप्रजनों ने अपने भीतर की बुराइयों से दूर करने का संकल्प लिया। शिव मंदिर में प्रातः भगवान परशुराम की आरती एवं पूजा अर्चना के विविध कार्यक्रम के पश्चात शाम 5 बजे शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। अम्बिकापुर रोड़,रायगढ़ रोड़ के बाद शोभायात्रा का लम्बा काफिला जशपुर रोड़ पहुंचा था। बैंडबाजों की स्वर लहरियों के साथ रथ में सवार भगवान परशुराम का सभी वर्ग के लोगों ने दर्शन कर उन्हें नमन किया जा रहा था।भगवान परशुराम की शोभायात्रा में जय परशुराम का जयघोष से पूरा वातावरण गुंज उठा था।परशुराम जयंती के कार्यक्रम यहां महिलाओं की भी काफी लम्बी कतार थी। विप्र समाज की महिला समिति की अध्यक्ष श्रीमती शारदा शर्मा, श्रीमती मंजु मिश्रा, श्रीमती सीता शर्मा, श्रीमती गायत्री शर्मा, श्रीमती संगीता मिश्रा सुषमा शर्मा, आरती दुबे, ममता शर्मा, मालती शर्मा, कान्ता शर्मा, इन्द्रावती द्विवेदी,राधातिवारी, उर्मिला तिवारी,कौशल्या शर्मा, श्रीमती नारायणी शर्मा, कमला शर्मा व अनेक विप्र महिलाएं शामिल थी। शोभायात्रा में हजारों लोग भगवान परशुराम की भक्ति अर्चना में रमे रहे। शहर के मुख्य मार्गो पर निकली भगवान परशुराम की शोभायात्रा और झांकी की आकर्षक साज सज्जा देखते ही बन रही थी। यहां विप्र समाज के अलावा अन्य विभिन्न समुदाय के लोगों ने भी फरसाधारी भगवान परशुराम पर फूल बरसा कर आत्मीय स्वागत किया। इस कार्यक्रम के आयोजक युवा ब्राह्मण समाज के नवयुवकों ने यात्रा मार्ग पर ट्रेफिक व्यवस्था को भी काफी अनुशासित ढंग सम्हाल रखा था। शोभायात्रा का आयोजन के दौरान पूरे शहर में ट्रेफिक व्यवस्था सुचारू रही।
पत्थलगांव में परशुराम जयंती पर निकली रैली
जशपुर में भी हुई
परशुराम जी की पूजन
जशपुर में भगवान बालाजी मंदिर में सर्व ब्राहम्ण समाज के द्वारा भगवान परशुराम जी की पूजा सुबह 10 बजे की गई। जिसमें बडी संख्या में समाज के लोग शामिल होकर पूजन और हवन कार्यक्रम में भाग लिये एवं शाम में संगोष्ठी का कार्यक्रम रखा गया है। वहीं अगले दिन समाज के द्वारा ईचकेला के वृध्दा आश्रम में सुबह 11 बजे आयोजित की गई है। 20 तारीख को शाम 4 बजे रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन होगा। शोभायात्रा का 22 अप्रेल को निकाली जाएगी।
समस्याओं पर की चर्चा
परशुराम जयंती के समारोह में शोभायात्रा के पश्चात विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। इसमें युवा अधिवक्ता उधव शर्मा ने भगवान परशुराम के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए सभी से उनके दिखाए मार्ग पर चलने का आग्रह किया। उन्होंने इस गोष्ठी में समाज की एकजुटता को सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया। संगोष्ठि में पं.नत्थूराम शर्मा ने कहा कि भगवान परशुराम को त्रेतायुग में शिव की विशेष आराधना के बाद इन्हे भोले बाबा ने अमोघ परशु का अस्त्र प्रदान किया गया था। इस अस्त्र को सदैव अपने पास धारण किए रहने से ही उन्हें परशुराम कहा गया था। अमरनाथ तिवारी ने बताया कि विष्णु भगवान के दस अवतारों में से छटा अवतार भगवान परशुराम का माना गया है। उन्होंने बताया कि इन्हे वामन एवं रामचन्द्र के मध्य में गिना जाता है। इनका जन्म अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया को हुआ था। अतः इस दिन को उत्सव के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। पं.सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि भगवान परशुराम ने क्षत्रियों का अनेक बार विनाश कर धर्म की रक्षा के काम में अपना अविश्मरणीय योगदान दिया था। भगवान परशुराम अपने माता पिता के भक्त थे। दुर्वासा की भांति परशुराम को उनका क्रोधी स्वभाव के लिए जाना जाता है।