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शौचालय बनने के 6 माह बाद भी भुगतान नहीं मिला

3 वर्ष पहले
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मामला जनपद पंचायत पत्थलगांव के ग्राम पंचायत बनगांव के आश्रित ग्राम घोघरा का है। जानकारी के अनुसार ग्रामीण महेंद्र यादव, जगजीवन चौहान, चौरनसाय, लखन साय, इंदर साय, बंशीराम, परशुराम, नटवर, श्रीमणी राम ने बताया कि उन्हें स्वच्छ भारत मिशन योजना अंतर्गत स्वीकृत्त शौचालय का निर्माण किये जाने के लिए ग्राम के सरपंच भदर साय और सचिव जलिन्धर कुजूर द्वारा प्रेरित किया गया था।

ग्रामीणों के मुताबिक उन्हें तत्काल राशि आबंटित नही हो पाने के लिए स्वयं निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। ग्रामीणों ने भी सरपंच और सचिव की बात को मानकर निर्माण कार्य पूर्ण कर उसे उपयोग में लिया जा रहा है। लेकिन उसके भुगतान को लेकर गंभीर नही है ग्रामीणों का कहना है कि 6 माह से राशि नही आया है कहकर लौटा दिया जा रहा है, लेकिन सचिव के द्वारा उन्हें यह कहकर फटकार लगाया जा रहा है कि जिन ग्रामीणों के द्वारा शौचालय निर्माण किया गया है उनका सूची में नाम नहीं है, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल सकता, इधर ग्रामीण इस बात से नाराज है कि पहले उन्हें सूची में नाम है कहकर शौचालय निर्माण के लिये प्रेरित किया अब नहीं है कहकर शासकीय योजनाओं से वंचित किया जा रहा है।

शिकायत

चहेतों को लाभ पहुंचा कर सूची से ही नाम विलोपित करने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप

शौचालय निर्माण का भुगतान नहीं मिलने से परेशान बनगांव के आश्रित ग्राम घोघरा के ग्रामीण।

चहेतों को लाभ पहुंचाने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में उनके नाम सूची में है कहकर सचिव ने दबाव पूर्वक निर्माण कार्य करवाया गया, अब उसी सूची में से दर्जनों ग्रामीणों के नाम को काटकर चहेते लोगो को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है, और पात्र हितग्राही इस योजना से वंचित होकर दुकानदारों का तगादा झेल रहे है।

इस संबंध में ग्राम पंचायत सरपंच सचिव से बात किया गया था उनका कहना है कि वर्ष 2014 में उन हितग्राहियों के शौचालय निर्माण स्वयं के द्वारा बनाया जा चुका है, इसलिए उनका नाम जांच के बाद सूची में काटा जाने की जानकारी दी गई है,मामले में मैं स्वयं जाकर पड़ताल करूंगा । \\\'\\\' भजन साय, सीईओ पत्थलगांव

गुणवत्ता विहीन शौचालय

निर्माण कार्य

सुरक्षा के मापदंडों को दरकिनार करते हुए, बेहद घटिया और स्तरहीन निर्माण कार्य पंचायत के द्वारा किए जाने की बात कही जा रही है। ग्रामीण धनसाय पैकरा ने बताया कि उनका शौचालय निर्माण पंचायत के देखरेख में किया गया था लेकिन बेहद घटिया निर्माण के कारण बनने के चंद दिनों में वह धराशाही हो गया, आखिरकार उन्हें पुनः स्वयं के खर्चे से बनाना पड़ा। उनका कहना है कि निर्धारित मापदंडों का उपयोग बिल्कुल नहीं किया गया बल्कि जैसे तैसे गड्ढे खोदकर औपचारिकता पूरी कर शासकीय योजना का बंदरबाट किया गया है, उनका कहना है कि महज पहली बरसात में ही ग्रामीणों के शौचालय धसने लगेंगे।

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