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भाजपा पार्षदों ने एफिडेविट सौंपा, बोले-अटेंडेंस लगाई थी प्रोसीडिंग बुक कांग्रेसियों ने छीन ली थी, साइन कैसे करते ?

3 वर्ष पहले
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28 मार्च को हुई नगर निगम की बजट मीटिंग में हुए हंगामे और छीनाझपटी के बाद बजट का एजेंडा पास होने को लेकर संशय बना हुआ है। हंगामे के दौरान प्रोसीडिंग बुक पर बहुमत वाले भाजपा के सभी पार्षदों के हस्ताक्षर नहीं हो पाने के कारण पैदा हुए संवैधानिक संकट के बीच अब मीटिंग में मौजूद रहे भाजपा के 22 पार्षदों ने एफिडेविट सौंपा है। उनका कहना है कि मीटिंग के दौरान उन्होंने हाजिरी सीट पर हस्ताक्षर किए थे, प्रोसीडिंग बुक पर तो कांग्रेसियों ने कब्जा कर लिया था। ऐसे में हस्ताक्षर कैसे करते?

बता दें कि 28 मार्च को हुई निगम की मीटिंग में निगम का साल 2018-19 का बजट एजेंडा पेश किया गया था। एजेंडा पेश करते ही कांग्रेस पार्षद विभूति शर्मा व उनके साथियों ने मेयर अनिल वासुदेवा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। मामला मेयर को बोतल मारने तक पहुंच गया। मेडिकल करवाने के बाद दोनों ने एक-दूसरे पर हमले की पुलिस में भी शिकायत दर्ज करवाई थी।

भाजपा ने मेयर पर हमले की वीडियो पेश कर कांग्रेसियों पर एफआईआर दर्ज करने की एसएसपी से भी मांग उठाई। मीटिंग में हंगामे के कारण दोनों पक्ष बाहर निकल गए थे और प्रोसीडिंग बुक पर सिर्फ 4 पार्षदों के ही हस्ताक्षर हुए थे। अब भाजपा मेयर और पार्षदों कह रहे हैं कि बजट पास हो गया है जबकि कांग्रेस समर्थित पार्षदों का दावा है कि जब प्रोसीडिंग बुक पर भाजपा पार्षदों ने हस्ताक्षर ही नहीं किए, तो बजट पास नहीं माना जाएगा। मेयर को दोबारा मीटिंग बुलानी चाहिए।

निगम कमिश्नर का कहना

उधर, निगम कमिश्नर कुलवंत सिंह ने मीटिंग का एजेंडा सरकार को भेज दिया है और उनका कहना है कि इस पर फैसला सरकार लेगी। बजट पारित करवाने के लिए अब भाजपा के सभी 22 पार्षदों ने एफिडेविट सौंपकर सरकार को भेजा है। इसमें सभी ने कहा है कि उन्होंने हाजिरी सीट पर हस्ताक्षर किए हैं, कांग्रेसियों ने हंगामा किया और प्रोसीडिंग बुक पर कब्जा कर लिया, तो उस पर हस्ताक्षर कैसे करते? इसलिए बजट को पारित माना जाए। अब फैसला सरकार को करना है अगर वह इसे मान्यता नहीं देती तो बजट पारित कराने के लिए फिर से मीटिंग बुलानी पड़ सकती है। निगम में भाजपा के 30, कांग्रेस के 19 और 1 आम आदमी पार्टी का पार्षद है।

सरकार को भेज दिया है मीटिंग का एजेंडा बनाकर

भाजपा पार्षदों ने निगम की बजट मीटिंग के दौरान हाजिरी लगाई है। प्रोसीडिंग बुक कांग्रेसियों ने छीन ली और हंगामा किया। जब प्रोसीडिंग बुक उनके पास थी, तो कैसे साइन होते। सभी पार्षदों ने इसी को साफ करते हुए एफिडेविट दिया है। -अनिल वासुदेवा, मेयर

73.99 करोड़ का है बजट|28 मार्च को लाए गए बजट में 73.99 करोड़ का एजेंडा पेश किया गया था, जिसमें विकास के लिए 44.19 करोड़ और कर्मियों की सैलरी के लिए 28.20 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया था। निगम पहले ही आर्थिक संकट में है और बजट पारित नहीं होने से कई विकास कामों पर ब्रेक लग सकती है।

अटेंडेंट सीट पर तो घर बैठकर भी भाजपा पार्षदों की हाजिरी लगवाई जा सकती है, मान्यता तो प्रोसीडिंग बुक पर हस्ताक्षर से है। प्रोसीडिंग बुक तो मेयर के पास होती है कांग्रेसी कैसे कब्जा कर सकते हैं। बजट पास नहीं है। -विभूति शर्मा, कांग्रेस पार्षद

एक्स-रे रिपोर्ट में किसी को चोट नहीं : एसएचओ निगम की बैठक के दौरान कांग्रेसी पार्षद विभूति शर्मा ने मेयर अनिल वासुदेवा के पेट में बोतल मार दी थी। इसकी शिकायत मेयर ने पुलिस में की थी। वहीं, विभूति ने भी अपना मेडिकल करवाया था। उसकी रिपोर्ट में सामने आया है कि दोनों को कोई चोट नहीं आई है। एसएचओ अवतार सिंह ने इसकी पुष्टि की है। उन्हांेने कहा कि पुलिस ने 323 की रिपोर्ट बनाकर सौंप दी है।

कांग्रेस और हलका विधायक को फंड लाकर मदद करनी चाहिए और निगम को अपना काम करने देना चाहिए। जब कांग्रेस के अनिल विज कौंसिल प्रधान थे, तब भी भाजपा विपक्ष में होने के बावजूद सहयोग करती रही थी। अनिल रामपाल, पार्षद एवं भाजपा जिलाध्यक्ष

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