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रिवाल्वर का लाइसेंस लेने वालों को सिविल में देना होगा डोप टेस्ट

3 वर्ष पहले
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ड्रग एडिक्ट हुए तो पुराना भी होगा रद्द

विवाह-शादियों में हादसों के बाद सरकार ने जारी किए आदेश

भास्कर संवाददाता | पठानकोट

रिवाल्वर या गन लेने के शौकीनों को लाइसेंस से पहले अपने जिले के सिविल अस्पताल में डोप टेस्ट करवाना जरूरी होगा। डोप टेस्ट में अगर व्यक्ति ड्रग एडिक्ट पाया गया तो उसे लाइसेंस नहीं मिलेगा। सरकार के आदेश के बाद सिविल अस्पताल में टेस्ट किटें पहुंच गई हैं। एसएमओ डा.भूपिंद्र सिंह का कहना है कि 2-3 दिन में डोप टेस्ट की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। सिविल अस्पताल में सरकारी रेट पर डोप टेस्ट होंगे। पठानकोट जिले में पुलिस आंकड़ों के मुताबिक 3324 लोगों के पास 3352 हथियार हैं।

विवाह शादियों के दौरान शराब के नशे में गोली चलने की कई घटनाओं के बाद सरकार ने डोप टेस्ट जरूरी किया है। जिला प्रशासन व सेहत अधिकारियों को लाइसेंस जारी करने से पहले खास हिदायतें दी हैं ताकि कोई ड्रग एडिक्टेड या नशे का आदी है तो उसे लाइसेंस न मिले, ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।

जिले में समारोह के दौरान कई बार चल चुकी है गोली

1 अप्रैल को कोरल रिवर रिजार्ट में हवाई फायरिंग कर दहशत मचाने पर सुजानपुर थाने में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। इससे पहले भी ऐसी ही फायरिंग कर दहशत फैलाने के दो मामले हो चुके हैं। 15 अक्टूबर 2015 की रात को शिवसेना (बाल ठाकरे) के पंजाब प्रधान योगराज शर्मा के घर पर उनकी सुरक्षा में तैनात गनमैन पलविंद्र ने गोलियां चला दी थी। योगराज ने भागकर अपनी जान बचाई थी। 22 सितंबर 2017 को गुरदासपुर उप चुनाव में आम आदमी पार्टी के कैंडिडेट रिटायर्ड मेजर जनरल सुरेश खजूरिया के गनमैन लखबिंदर सिंह ने तड़के 4.30 बजे से एक घंटे तक विक्टोरिया कालोनी में घूम-घूमकर एसएलआर से 28 राउंड फायर कर डाले जिससे 4 कारों, 4 कोठियों में गोलियां जा धंसी थी। एक घंटे बाद उसे काबू किया।

ये होता है डोप टेस्ट | डोप टेस्ट में पता चलेगा कि लाइसेंस अप्लाई करने वाला ड्रग एडिक्टेड व नशा करने का आदि तो नहीं है। डोप टेस्ट के लिए यूरीन के सैंपल लिए जाते हैं। उसकी रिपोर्ट अस्पताल प्रबंधन द्वारा लाइसेंस अप्लाई करने वाले के फार्म के साथ डीसी आफिस को सौंपेगा। रिपोर्ट के आधार पर क्लियरंस मिलने पर रिवाल्वर या गन का लाइसेंस मिलेगा।

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