कमीशन के चक्कर में मरीजों को महंगी दवाएं लिख रहे हैं सिविल के डाक्टर
हेल्थ विभाग ने डाक्टरों को केवल जेनरिक दवाएं लिखने के आदेश दिए हैं, लेकिन सिविल अस्पताल के डाक्टर कमीशन के चक्कर में मरीजों को कंपनी की महंगी दवाएं लिख रहे हैं, जो मरीजों को बाहर से लेनी पड़ रही हैं। हालांकि उसी साल्ट वाली सस्ती दवाएं सरकारी डिस्पेंसरी व जनऔषधि में उपलब्ध होती हैं, लेकिन दवा कंपनी से मिलने वाली 30 से 40 प्रतिशत कमीशन के चक्कर में मरीजों को परेशान किया जा रहा है। इसका खुलासा बीते दिनों इंटेलीजेंसी पंजाब द्वारा पंजाब भर के सरकारी अस्पतालों में सर्वे (जांच) करने पर सामने आ चुका है। इसमें पठानकोट सिविल अस्पताल का नाम भी शामिल है कि डाक्टरों की बाहर प्राइवेट मेडिकल स्टोरों से सांठगांठ है। वे हालांकि कई बार मरीजों की शिकायत पर मामला सेहत विभाग के अधिकारियों के सामने आ चुका है, लेकिन दो-तीन दिन सख्ती के बाद फिर मरीजों को स्टेंडर्ड महंगी दवाएं लिखी जा रही हैं। इंटेलीजेंसी ने सर्वे की रिपोर्ट हेल्थ सेक्रेटरी को भेजी है और जिले के सिविल सर्जनों से इस संबंधी जबाव मांगा गया है।
सरकार के आदेश दरकिनार | जनऔषधि सेंटर की बिक्री घटी
सरकार ने सरकारी डिस्पेंसरी में फ्री के अलावा सस्ते दाम पर दवाएं उपलब्ध करवाने के लिए जनऔषधि सेंटर भी खोला है जहां की दवाएं नहीं लिखने के कारण जनऔषधि की रोजाना की कमाई 6 हजार से कम होकर 2500 रुपए रह गई है। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि एक बुजुर्ग को लिखी गई पर्ची पर अंदर से कई दवाएं फ्री थीं लेकिन इसके बावजूद उसे बाहर की दवाएं रोटो-साइड बाहर 90 रुपए व जनऔषधि पर सेम साल्ट की डिपलोसोरेशे 20 रुपए, कैसबोर्न बाहर 100 रुपए, डिस्पेंसरी में फ्री व जनऔषधि में 20 रुपए है। हड्डियों के लिए लाइकोर्स बाहर 150 रुपए व अंदर लाइकोपिन 40 रुपए में उपलब्ध है। वहीं नू-एक्टिव बाहर 150 रुपए का पता, अंदर 40 रुपए, लीवोडैक्स पीने वाली बाहर 150 रुपए और अंदर 30 रुपए में उपलब्ध है। वहीं बच्चों के लिए कोजाइम सिरप बाहर 80 रुपए सिरप व अंडर सेम साल्ट का अनजाइम 20 रुपए, नैकनिप बाहर 85 रुपए व अंदर डिकलोएसपी 20 में उपलब्ध है।
डिस्पेंसरी में 150 तरह की दवा मुफ्त उपलब्ध | सिविल अस्पताल की सरकारी डिस्पेंसरी में 150 तरह की फ्री में मिलने वाली दवाएं उपलब्ध हैं। वहीं जनऔषधि में आधे रेट से भी कम 100 से अधिक दवाएं उपलब्ध हैं लेकिन मरीजों को इनका फायदा नहीं मिल रहा, क्योंकि डाक्टर उन्हें बाहर से खरीदने के लिए लिख देते हैं।
डिस्पेंसरी में मुफ्त मिलती है, बाहर से खरीदी 750 रुपए की दवा
उपरला मनवाल निवासी बुजुर्ग महिला चांद देवी ने बताया कि उसे यूरिक एसिड है। हड्डियों के डाक्टर से चेकअप करवाया और उन्होंने पर्ची पर दवा लिखी, लेकिन वह डिस्पेंसरी व जनऔषधि में नहीं है। उसे बाहरी मेडिकल स्टोर से 750 रुपए की दवा खरीदनी पड़ी।
मोहल्ला आनंदपुर निवासी रमन व स्वाति ने बताया कि वह अपने बच्चे को चैक करवाने के लिए चाइल्ड स्पेशलिस्ट के पास आए थे। उन्हें पर्ची पर जो दवा लिखी गई, वह डिस्पेंसरी से नहीं मिली। उन्हें प्राइवेट मेडिकल स्टोर से 160 रुपए की दवा खरीदनी पड़ी।
अखरोटा से भाभी पूजा का चेकअप करवाने आए सोनू ने बताया कि स्किन स्पेशलिस्ट डाक्टर से चेकअप करवाया, लेकिन अंदर से कोई दवा फ्री नहीं मिली। बाहर मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ी। अस्पताल से मिलने वाली दवा नहीं लिखी।
ब्रांडेड दवाएं लिखने पर होगी कार्रवाई : सीएस | सिविल सर्जन डा.नैना सलाथिया ने कहा कि अगर कोई डाक्टर बाहरी मेडिकल स्टोर की ब्रांडेड दवाओं के नाम लिख रहा है तो इस संबंधी चेकिंग करवाकर कार्रवाई करेंगे। जल्द ही डाक्टरों की एक मीटिंग कर उन्हें मरीजों को डिस्पेंसरी या जनऔषधि का दवा लिखने को कहा जाएगा।