18.52 करोड़ खर्च करने के बावजूद लाडोचक्क सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) शुरू नहीं होने के मामले में सोमवार को चंडीगढ़ में सीएम के टेक्निकल एडवाइजर ने सीवरेज बोर्ड से रिपोर्ट तलब कर प्रोजेक्ट पर चर्चा की। एसटी शुरू न होने के कारण गंदा पानी बिना ट्रीट किए ही पास से गुजरती ड्रेनेज में छोड़ा जा रहा है। सिंचाई विभाग ने सीवरेज बोर्ड को कई बार नोटिस भी भेजा, लेकिन बोर्ड अधिकारी जिम्मेदारी से पल्ला छुड़ा रहे हैं। दूसरी तरफ सीएम के टेक्निकल एडवाइजर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल बीएस धारीवाल ने बोर्ड अधिकारियों से चंडीगढ़ में कलेक्टिंग टैंक की रिपोर्ट पर चर्चा की। एक्सईन ने सोमवार को लगभग 1.70 करोड़ से होने वाले काम के बारे में सारी जानकारी दी है। उधर, हालात ये हैं कि गंदे पानी से नहर का पानी जहरीला होता जा रहा है, जिसे समस्या गंभीर हो सकती है।
जहरीला होता जल
सिंचाई विभाग | कई बार नहर में गंदा पानी डालने से रोका
एसडीओ सुरिंद्र सिंह कलेर कहते हैं कि सीवरेज बोर्ड को नोटिस भेजकर थक चुके हैं। फिर भी पूरे म्यूनिसिपल टाउन का गंदा पानी फरीदानगर नहर में छोड़ा जा रहा है जो आगे बयास दरिया तक पहुंचता है। कई बार नहरों को गंदा करने से रोका गया है। अब तो नोटिस भेज-भेज कर विभाग के हाथ भी खड़े हो चुके हैं।
18.52 करोड़ खर्च करने के बावजूद बंद पड़े प्रोजेक्ट पर सीएम के टेक्निकल एडवाइजर ने की चर्चा
भास्कर में 21 मई के अंक में छपी खबर।
सीवरेज बोर्ड | कलेक्टिंग टैंक बनने से पहले शुरू नहीं हो सकता एसटीपी
सीवरेज बोर्ड के एसडीओ द्वितेष विरदी का कहना है कि हमने पानी प्लांट तक चढ़ाने की कोशिश की थी। पीछे लीकेज शुरू हो गई, इसलिए कोई रिस्क नहीं लिया। लीकेज के कारण सड़क भी बैठनी शुरू हो गई है। जब तक कलेक्टिंग टैंक नहीं बनता तब तक पानी चढ़ाया नहीं जा सकेगा। इसलिए एसटीपी चालू करना मुश्किल है।
गंदे पानी से नहर किनारे बसे गुज्जरों के पशु हो रहे बीमार | दूसरी तरफ गंदा पानी पीने से फरीदानगर फीडर नहर से साथ बसे गुज्जरों के डेरों पर पशु बीमार पड़ रहे हैं। गुज्जर रामदीन, लुकमान, रोशनदीन ने बताया कि पानी पीने के लिए जानवर नहर में चलते जाते हैं। नहर का पानी काफी गंदा है। पिछले एक साल जानवरों को कोई न कोई बीमार लग रही है। संक्रमण के कारण यह रोग आगे दूसरे दुधारू जानवरों को हो रहा है। गंदे पानी में ऐसे कीड़े होते हैं जोकि मवेशियों के शरीर के साथ चिपक जाते हैं और आगे संक्रमण फैलता जाता है।
ट्रीटमेंट प्लांट शुरू नहीं होने से कंपनियों को हो रहा नुकसान | ट्रीटमेंट प्लांट बनाने वाली विश्वा अयप्पा हैदराबाद ने अगले पांच साल तक प्लांट चलाना था, लेकिन अभी तक प्लांट शुरू नहीं होने से उसे 60 हजार रुपए बिजली बिल का भुगतान करना पड़ रहा है, जबकि कंपनी का डेढ़ करोड़ रुपए अभी सरकार के पास ही फंसा हुआ है। कंपनी के मैनेजर जीएल साई का कहना है कि कंपनी को ट्रीटमेंट प्लांट चलाए बिना ही मेंटिनेंस के लिए मशीनों को चलाना पड़ रहा है। उसका खर्च भी जेब से देना पड़ रहा है। साथ ही सरकार के पास डेढ़ करोड़ भी फंसा हुआ है।