दसवीं में जिले के 16 सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। हालात ये हैं कि गवर्नमेंट हाई स्कूल अजीजपुर खदावर के 31 में से एक भी बच्चा पास नहीं हो सका। इसी तरह से शहीदों के नाम पर बने स्कूलों में हर साल उनके शहादत दिवस पर उनसे प्रेरणा लेने पर जोर दिया जाता है, लेकिन पांच शहीदों के स्कूल ऐसे भी हैं जहां बच्चों का पास प्रतिशत 25 से भी कम है। इनमें ज्यादातर बच्चे हिसाब, अंग्रेजी और विज्ञान में पिछड़े हैं। उधर, डायरेक्टर जनरल स्कूल एजुकेशन ने 25 फीसदी से नीचे अंक आने वाले स्कूलों के टीचरों से जवाब तलब किया है। बता दें कि पिछले साल के मुकाबले पंजाब स्कूल एजूकेशन बोर्ड (पीएसईबी) की दसवीं कक्षा में जिले का परिणाम 52.92 प्रतिशत रहा है जोकि पिछले तीन के मुकाबले 23.49 फीसदी कम है। इस साल जिले में 8192 छात्र दसवीं की परीक्षा में बैठे, जिनमें से 4251 पास हुए हैं।
खराब रिजल्ट खासकरक 25 फीसदी सेकम रिजल्ट वाले स्कूलों के टीचरों पर गाज गिरना भी लगभग तय है। डीईओ सेकेंडरी रविंद्र शर्मा का कहना है कि अन्य जिलों के मुकाबले पठानकोट के सरकारी स्कूलों की परफार्मेंस फिर भी अच्छी रही है। 11 स्कूलों का रिजल्ट खराब रहा है, उन्हें डीजीएसई आफिस से जवाब देने के लिए बुलाया गया है। उसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है।
जिले में शहीदों के नाम पर बने पांच स्कूलों के नतीजे भी निराशाजनक, कइयों का रिजल्ट 25 फीसदी से भी कम
देश के पहले परमवीर चक्र विजेता कैप्टन जीएस सलारिया सीनियर सेकेंडरी स्कूल जंगल के 119 में से 25 बच्चे ही पास हो सके, जबकि शहीद कैप्टन अजय सिंह राणा गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल मामून के 43 में से 8, शहीद लेफ्टिनेंट त्रिवेणी सिंह गवर्नमेंट हाई स्कूल फतेहपुर के 128 में से सिर्फ 13, शहर में शहीद मेजर दीपक पड्डा गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल दौलतपुर के 122 में से 30, शहीद मेजर कुलबीर सिंह राणा गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल तंगोशाह के 68 में से 8 बच्चे ही पास हो सके हैं। इसी तरह से गवर्नमेंट हाई स्कूल हैब्बत पिंडी के 82 में से 20 बच्चे, हाई स्कूल कानवां में 32 में से 2, हाई स्कूल खडकड़ां ठुठोवाल के 31 में से 2, हाई स्कूल सारटी के 33 में से 8 स्टूडेंट्स और श्री चूनी लाल गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल फिरोजपुर कलां के 113 में से 27 स्टूडेंट्स ही पास हो सके। इसी तरह से गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल सुजानपुर के 80 में से 7, सीसे स्कूल नरोट मेहरा के 60 में से 8, परमानंद के 69 में से 11 और उच्चा थड़ा के 32 में से सिर्फ 5 स्टूडेंट्स ही पास हो सके हैं।