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आज भी गुमनामी के अंधेरे में हैं कानगढ़ की गुफाएं

3 वर्ष पहले
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दमोह-सागर जिले की सीमा पर ग्राम गुंजी धनगौर एवं बेलखेड़ी कन्हैयालाल गांव के बीच कानमढ़ पहाड़ी पर बनी गुफाएं हैं, लेकिन यह आज भी गुमनामी में हैं। अधिकांश लोगों की इनकी जानकारी नहीं हैं, जिसके चलते अभी तक यहां पर लोगों की आवाजाही कम ही है।

पहाड़ी के बीच करीब 30 फीट ऊंची व 20 फीट चौड़ी गुफाएं हैं। गुफा की पहाड़ी पर एक प्राचीन शिलालेख है, पास में ही एक प्राचीन मठ भी है। जिसमें नागदेवता का मंदिर है। यहां पर शिवजी एवं हनुमानजी का भी मंदिर है। ग्रामीणों में मान्यता है कि यह गुफा संभवत: नर्मदा नदी तक जाती है। स्थानीय निवासी एडवोकेट महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि उनके बुजुर्गों के अनुसार बहुत पहले मठ में एक संन्यासी रहते थे। जो नर्मदा नदी तक गुफा के द्वार से ही नदी तक जाते थे। यहां के वारे में ऐसी किवदंती भी है कि करीब सौ साल पहले एक बारात इस गुफा के नजदीक ठहरी थी। तब बारातियों के मन में गुफा देखने की जिज्ञासा हुई।

वह पूरी बारात गुफा के अंदर प्रवेश कर गई, लेकिन अंदर गए बाराती कभी वापस नहीं आए। जो लोग गुफा के बाहर थे केवल वही वहां से वापस आए। उन्होंने कहा कि गुफा के अंदर आसपास के लोग पलीता या अन्य रोशनी लेकर भी गए, लेकिन करीब सौ फीट जाने के बाद कुछ कोई आभास होने के बाद लोग वापस लौट आए। इस स्थान पर कई प्राचीन शिलालेख भी यहां-वहां पड़े हैं, जिन पर प्राचीन इबारत लिखी हुई है। इस इबारत के बारे में स्थानीय लोगों को भी कुछ पता नहीं हैं। उन्होंने कहा यदि पुरातत्व विभाग की टीम यहां का सर्वे कर तो निश्चित ही इस क्षेत्र के प्राचीनता के बारे में पता चल सकता है।

विरासत

पुरातत्व विभाग की टीम ने दो साल पहले किया था सर्वे, गुफा से जुड़ी बुजुर्ग बताते हैं कई किवदंतियां

...तो छोटे से शहर का नाम देश में होगा

एडवोकेट श्रीवास्तव ने बताया कि करीब दो साल पहले सागर से आई पुरातत्व विभाग की टीम ने यहां का सर्वे किया था। साथ ही गुफा के अंदर विशेष टार्च बुलाकर अंदर की जानकारी हासिल करने का प्रयास किया था, लेकिन इसके बाद विभाग द्वारा यहां की कोई खोज-खबर नहीं ली गई। उन्होंने बताया कि यदि पुरातत्व विभाग यहां का विशेष रूप से सर्वे कराए तो निश्चित ही यहां के रहस्य से पर्दा उठ सकेगा, साथ ही इस छोटे से क्षेत्र का नाम देश दुनिया के पुरातत्व नक्शे पर अंकित हो सकेगा।

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