तालाब में रबी सीजन के बाद भी इस तरह जमा रहा बारिश का पानी।
रबी फसलों में सिंचाई करने के बाद अभी भी 70 लाख लीटर पानी बचा है
नितिन राजावत | शाजापुर
किसानों को अपनी फसल में सिंचाई के लिए अब बिजली बिल और डीजल पर रुपया खर्च नहीं करना पड़ेगा। जिले के ग्राम गोपीपुर लोहरवास के किसान जितेंद्र पाटीदार ने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से तकनीकी सीख कर खेती की लागत कम करने का नवाचार किया है। अपने खेत में पहले पॉलीथिन खेत तालाब बनाकर बारिश का पानी जमा किया। इसके बाद सौर ऊर्जा संयत्र और ड्रिप सिस्टम को जोड़ सिंचाई की शुरुआत की। इससे उसे बिजली कनेक्शन के 7 हजार और डीजल पंप पर खर्च होने वाले 10 हजार रुपए की सीधी बचत हो गई। साथ ही सोयाबीन सहित आलू-प्याज और लहसुन का 60-70 प्रतिशत उत्पादन भी बढ़ा लिया। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक जीआर अंबावतिया की मानें तो ड्रिप सिस्टम और तालाब के माध्यम से पानी पर्याप्त होने पर खेती में किसान दोगुना आय ले सकते हैं। जितेंद्र पिता मणिशंकर पाटीदार ने खेती से होने वाली आय को बढ़ाने के लिए नया सिस्टम तैयार किया। पॉलीथिन खेत तालाब, सोलर पंप और ड्रिप इरिगेशन सिस्टम से लगाकर पहले खेती की लागत कम की और उत्पादन भी बढ़ा लिया।
73 हजार वर्गफीट में बनाया तालाब
पाटीदार ने अपने खेत की 73 हजार वर्गफीट जमीन पर 28 फीट गहरा तालाब बनाया। इसकी भीतरी सतह पर 500 माइक्रोन की पॉलीथिन फिल्म लगाने से पूरे समय पानी जमा रहता है। रबी सीजन की फसलों में सिंचाई करने के बाद अभी भी 70 लाख लीटर पानी बचा है।
यह है जीरो एनर्जी इरिगेशन सिस्टम
कृषि वैज्ञानिक एसएस धाकड़ के अनुसार सिंचाई के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग ही जीरो एनर्जी इरिगेशन सिस्टम है। इसमें सौर ऊर्जा से पंप का संचालन और बारिश के पानी का संग्रहण शामिल है। पॉलिथीन तालाब में 500 माइक्रोन की पॉलीथिन शीट लगाने से सीपेज और वाष्पीकरण नहीं होता। तालाब की कुल जल संग्रहण क्षमता 2.5 करोड़ लीटर है और यह पानी कुल 10 हेक्टेयर भूमि पर कृषि की आवश्यकता को पूरा करने में समर्थ है। सोलर पंप के माध्यम से इस तालाब के पानी को बिना बिजली के ड्रिप इरिगेशन से सिंचाई की जा सकती है।