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गैस कटर से 10 टन के टैंक की चद्दर काटी, 10 टन कोयला निकाला, तब निकाल पाए 2 शव
बाेराली में 30 साल से चल रही शराब फैक्टरी ओएसीस डिस्टलरी में शुक्रवार शाम 4.45 बजे बड़ा हादसा हो गया। बॉयलर का कोयला संग्रह टैंक टूट कर गिरने से दबे चार में से दो लोगों को तो तत्काल पहुंचे श्रमिकों ने निकाल लिया लेकिन बाकी दो 15 फीट लंबे और 20 टन वजनी टैंक में ढाई घंटे दबे रहे। करीब 10 टन वजनी टैंक की लोहे की मोटी चादर को जेसीबी व क्रेन मशीन की सहायता से गैस कटर के जरिये बड़ी मुश्किल से काटा जा सका। इसके बाद टैंक में भरा करीब 10 टन कोयला निकाला। तब दबे हुए दोनों लोग निकले लेकिन उनकी जान निकल चुकी थी। फैक्टरी में बड़ी संख्या में कर्मचारी व मजदूर काम करते हैं। यह आसपास के गांवों के हैं। जैसे ही हादसे की जानकारी मिली। वैसे ही गांवों से मजदूरों के परिजन घबराए हुए फैक्टरी की ओर दौड़े। दो घायल अशोक पिता गेंदालाल प्रजापत (40) नि. कराड़िया और कमल पिता रामचंद्र मालवीय (32) नि. कनवासा को कुछ ही देर में निकाल लिया गया लेकिन दो अन्य को नहीं निकाल पाए। एसडीओपी कैलाश मालवीय, टीआई सुनील गुप्ता, एसआई शरद पाटील समेत पुलिसकर्मी, राजस्व विभाग के कर्मचारी व फैक्टरी संचालक सौरभ सूद, अशोक बजाज व गांवों के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे।
इसलिए हुआ हादसा
घटनास्थल पर कम जगह होने के कारण दबे हुए लोगों को निकालने में ज्यादा समय लग गया।
चारों तरफ कोयले की राख की काली धुंध छा गई थी, दो लोग बाहर पड़े थे
मैं कुछ ही दूरी पर काम कर रहा था। अचानक तेज हवा चलने जैसी आवाज आई। देखा कि कोयला भरने का टैंक नीचे गिरा पड़ा था। चारों ओर कोयले की राख की काली धुंध छा गई थी। मैं आवाज सुनकर डरकर दूर भागा। कोयले की राख मेरे पूरे शरीर पर हो गई। कुछ देर बाद वापस आया तो देखा कि दो लोग बाहर पड़े हैं। उन्हें हम कर्मचारियों ने निकाल कर अस्पताल भेजा। हम समझें चलो किसी की जान नहीं गई लेकिन टैंक के नीचे देखा तो प्रभु और भारत दबे पड़े थे। टैंक इतना वजनदार है कि हम उसे हिला भी नहीं सके।
जैसा कि प्रत्यक्षदर्शी संदीप ने भास्कर को बताया
प्रत्यक्षदर्शी संदीप।
बॉयलर का कोयला संग्रह टैंक वेल्डिंग उखड़ने से लोहे की गर्डर से निकला
3 घंटे बाद निकाला शव
बॉयलर में कोयले की चूरी सप्लाय करने के लिए 10 टन क्षमता का कोल स्टोरेज टैंक को लोेहे की 10 मोटे गेज वाली गर्डर पर टिकाया गया था। उसके नीचे 10 फीट में कोयला बॉयलर को सप्लाय करने वाला सिस्टम लगा था। इन मोटी एंगलों को वेल्डिंग कर एक-दूसरे को जोड़ा गया था। वेल्डिंग में लोहे के मोटे सरिये का सपोर्ट देकर आपस में जोड़ा गया था।
मशीनों की नियमित जांच हमारी एक्सपर्ट टीम करती है। यदि वेल्डिंग उखड़ी है तो वेल्डिंग में कोई बड़ा खर्च नहीं लगता, जो कि कंपनी बचाने का सोचे। यह अचानक हुआ हादसा है। जिसका हमें भी दु:ख है। कंपनी मृतकों व घायलों की मदद करेगी। मशीनरी व कर्मचारियों का बीमा कराया हुआ है। अशोक बजाज, फैक्ट्री मैनेजर