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मांगों के लिए पेरेंट्स ने डीसी काे सौंपा मांगपत्र

3 वर्ष पहले
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अर्बन एस्टेट फेस-2 के सैंट जेवियर्स इंटरनेश्नल स्कूल में पढ़ते बच्चों के पेरेंट्स ने डीसी पटियाला काे मिलकर मांगपत्र दिया। उन्होंने स्कूल के प्रति आ रही समस्याएं बताईं अाैर उनके हल के लिए डीसी से मांग की। पेरेंटस की मांग है कि स्कूल की अाेर से सालाना 7 हजार रुपए चार्जेस लिए जा रहे हैं, ट्यूशन फीस में हर साल बढ़ोतरी की जा रही है। स्कूल की अाेर से क्या सुविधाएं बच्चों काे दी जा रही हैं इसका ब्योरा लिया जाए। स्कूल की अाेर से एक्टीविटी फंड के रूप में अलग पैसे लिए जा रहे हैं जबकि एक्टीविटी नहीं करवार्इ जा रही, एक दाे कमरे छाेड़ बाकी किसी क्लास में एसी नहीं है, जबकि स्कूल बनाया गया ताे फुली एसी बताया गया था। स्कूल की अाेर से ट्रांसपोर्ट चार्जेस हर साल बढ़ाए जा रहे हैं, गर्मियों की छुट्टियां के पैसे भी बच्चों से वसूले जा रहे हैं जाेकि बंद की जानी चाहिए। किताबों संबंधी मनमानी की जा रही है, एनसीर्इअारटी की जारी किताबें नहीं लगार्इ जा रहीं, प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी किताबें बच्चों काे लगार्इ जा रही हैं जाेकि बंद हाेनी चाहिए। बच्चों काे लेने आने वाले पेरेंट्स के खड़े हाेने के लिए कोई शेड नहीं लगाया गया, उन्हें धूप में खड़ा रहना पड़ता है। इसके अलावा पेरेंट्स ने अन्य मांगें पूरी करने की मांग की है।

भास्कर संवाददाता|पटियाला

अर्बन एस्टेट फेस-2 के सैंट जेवियर्स इंटरनेश्नल स्कूल में पढ़ते बच्चों के पेरेंट्स ने डीसी पटियाला काे मिलकर मांगपत्र दिया। उन्होंने स्कूल के प्रति आ रही समस्याएं बताईं अाैर उनके हल के लिए डीसी से मांग की। पेरेंटस की मांग है कि स्कूल की अाेर से सालाना 7 हजार रुपए चार्जेस लिए जा रहे हैं, ट्यूशन फीस में हर साल बढ़ोतरी की जा रही है। स्कूल की अाेर से क्या सुविधाएं बच्चों काे दी जा रही हैं इसका ब्योरा लिया जाए। स्कूल की अाेर से एक्टीविटी फंड के रूप में अलग पैसे लिए जा रहे हैं जबकि एक्टीविटी नहीं करवार्इ जा रही, एक दाे कमरे छाेड़ बाकी किसी क्लास में एसी नहीं है, जबकि स्कूल बनाया गया ताे फुली एसी बताया गया था। स्कूल की अाेर से ट्रांसपोर्ट चार्जेस हर साल बढ़ाए जा रहे हैं, गर्मियों की छुट्टियां के पैसे भी बच्चों से वसूले जा रहे हैं जाेकि बंद की जानी चाहिए। किताबों संबंधी मनमानी की जा रही है, एनसीर्इअारटी की जारी किताबें नहीं लगार्इ जा रहीं, प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी किताबें बच्चों काे लगार्इ जा रही हैं जाेकि बंद हाेनी चाहिए। बच्चों काे लेने आने वाले पेरेंट्स के खड़े हाेने के लिए कोई शेड नहीं लगाया गया, उन्हें धूप में खड़ा रहना पड़ता है। इसके अलावा पेरेंट्स ने अन्य मांगें पूरी करने की मांग की है।

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