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पावरकॉम मुआवजे के नाम पर किसानाें से कर रहा है खानापूर्ति

3 वर्ष पहले
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पावरकॉम की अनदेखी के कारण हरेक साल खेताें में खड़ी हजारों एकड़ फसल जलकर राख हाे जाती है अाैर पावरकॉम काे मुआवजे काे ताैर पर काे खानापूर्ति करने के लिए मुअावजा देता है, वे भी लंबी कार्रवाई के बाद। मर्इ 2018 तक के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब के पांच जाेन काे मिला कर कुल 1450 एकड़ के लगभग फसल जलने के कारण खराब हुई अाैर 153 केसाें की रिपाेर्ट तैयार हुई। इनमें से 39 केसाें काे मुअावजा देना याेग पाया गया।

39 मे से 12 काे ही मिला है अब तक मुअावजा

पावरकॉम की अनदेखी के कारण किसानाें की खड़ी फसल का नुकसान बहुत बड़ा हुआ है। गेंहूं की फसल से होने वाली आमदन का हिसाब लगाया जाए ताे किसान प्रति एकड़ 35 से 40 हजार अाने की उम्मीद रखता है, लेकिन इस के बदले पावरकॉम द्वारा महज 8 हजार प्रति एकड़ देकर खानापूर्ति की दी है। 1 मर्इ तक के आंकड़ों के अनुसार पावरकॉम द्वारा 153 केसाें में से केवल 39 केस मुअावजा लेने के याेग माने गए। जिन का कुल रकबा 523 एकड़ बनता है। पावरकॉम द्वारा कुल मुआवजे की राशि 42 लाख के करीब बनती है। पावरकॉम अभी तक केवल 12 केस काे ही मुअावजा दिया गया है। जिनके मुआवजे की राशि 21 लाख के करीब बनती है। इसके अलावा बाकी केसाें अभी पेंडिंग है। साल 2017 में पावरकॉम के पास 15 मर्इ तक फसल जलने के 199 केस सामने अाए थे, जिस कारण 1067 एकड़ रकबा जलकर खराब हुआ था, लेकिन उनमें से 103 केस ही मुआवजे लेने याेग्य पाए गए थे।

किसान एसोसिएशन ने पावरकॉम को कोसा| इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन के प्रधान सतनाम सिंह बैहरू ने कहा कि अभी भी बहुत सारे गांवों में पावरकॉम द्वारा पुराने अाैर वैलेडिटी खत्म हाे चुका सामान इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस कारण आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि 45000 हजार के स्थान पर 8000 हजार मुअावजा देना नाजायज है। इस संबंधी डायरेक्टर वितरण एनके शर्मा ने कहा कि पावरकॉम आग लगने के कारणों काे पता लगाने के कमेटी बनाई गई है। कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही मुअावजा दिया जाता है।

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