32 साल बाद भी पूर्व सरपंच को 3 बीघा जमीन का कब्जा नहीं मिला
बहादुरगढ़ स्थित राजा फार्म में तीन बीघे जमीन पर कब्जा हासिल करने के लिए पूर्व दलित सरपंच 32 साल से कानून से इंसाफ की आस लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। इस दौरान वे अपनी पिता समेत बड़े भाई तक को खाे चुके हैं, लेकिन पुलिस इंसाफ देने में असफल साबित हुई है। मामले की जांच एसपी हेडक्वार्टर कंवनदीप काैर ने कहा कि चूंकि मामला काफी पुराना है। इसलिए बिना केस देखे समझे कुछ कहना गलत हाेगा। पीड़ित पार्टी को पुलिस कार्रवाई से शिकायत है ताे वे सीधे अाकर मिल सकते हैं।
प्रेम सिंह के मुताबिक 30 साल तक उक्त जमीन पर उसका कब्जा था, लेकिन पुलिस विरोधी पार्टी सुखविंदर सिंह का पक्ष लेते हुए कब्जा उसे ही दिला दिया था जबकि उक्त जमीन का इकरारनामा समेत लाेन किश्ताें की रसीदें अधिकारियों को दिखाने के बाद भी पुलिस ने एक ना सुनी। उस समय खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चला दिया था।
अवैध कब्जा होता तो गुप्ता परिवार कोर्ट में जरूर जाता
पूर्व सरपंच प्रेम सिंह ने कहा कि दिसंबर 1986 में उनके पिता ने यह जमीन गुप्ता परिवार से खरीदी थी अाैर साैदे के बाद उन्हें पैसे देने जाते थे। पिता की माैत के बाद साल 2000 में गुप्ता परिवार ने उनकी मां महिंदर काैर के साथ इकरारनामा किया था। इस जमीन पर लाेन चल रहा था, जिसकी किस्त पूर्व सरपंच के परिवार ने चुकाई। इस लाेन की किस्तें चुकाने की रसीदें भी उनके पास हैं। प्रेम सिंह ने कहा कि यदि इस जमीन पर उनका अवैध कब्जा हाेता ताे गुप्ता परिवार अदालत में उनके खिलाफ जरूर जाते। साल 2014 में जब गुप्ता परिवार की अाेर से जमीनी साैदे को लेकर भाई जसदेव सिंह को लगा ताे उसने मानसिक परेशानी के चलते खुदकुशी कर ली। उसका सुसाइड नाेट पुलिस के पास है अाैर एसपी-डी इंक्वायरी कर रहे थे। दूसरी पार्टी ने राजनैतिक पहुंच का फायदा उठाते हुए जमीन के दूसरे दस्तावेज बनाकर पुलिस की मदद से जबरन कब्जा ले लिया। पूर्व सरपंच ने पुलिस और प्रशासन से इंसाफ की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर हक न मिला तो संघर्ष करेंगे।