पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • 10 हजार की अाबादी, सफाई सेवक 15, फिर भी भादसों सबसे साफ कस्बा

10 हजार की अाबादी, सफाई सेवक 15, फिर भी भादसों सबसे साफ कस्बा

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पटियाला से 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नगर पंचायत भादसों ने केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत सर्वेक्षण में नोर्थ जोन में सबसे साफ शहर का अवार्ड जीता है। भादसों की 2011 की जनसंख्या के मुताबिक अाबादी 7260 (अब लगभग 10 हजार) है। दिलचस्प पहलू यह है कि 11 वार्डों में बंटे भादसों कस्बे में सिर्फ 15 सफाई सेवक है। 11 स्वीपर सड़कों पर सफाई करने वाले अौर 4 ट्रालियों में गंदगी उठाने वाले। नगर पंचायत भादसों को इससे पहले पंजाब का पहला खुले में शौच जाने से मुक्त ओडीएफ सर्टिफाई शहर बनने का मान भी हासिल हो चुका है।

भादसों में साफ सफाई का जिम्मा संभालने वाली ब्रांड एंबेसडर लोकल बॉडी डिपार्टमेंट की डिप्टी डायरेक्टर जीवनजोत कौर ने इस बड़ी सफलता के पीछे पूरे प्लानिंग के साथ काम किया। उन्होंने पहले सरबत दा भला जैसे कई एनजीअो को साथ जोड़ा। 3 बड़े प्राइवेट बिल्डर्स का साथ लिया जिन्होंने साफ सफाई को लेकर अवेयरनेस मैटीरियल उपलब्ध करवाया। इसके बाद लोगों को अवेयर करने के लिए भादसों के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल पहुंचे। पहले यहां सभी स्टूडेंट्स को तैयार किया। सबसे बड़ा टारगेट था, हर घर से निकलने वाले कूड़े को दो हिस्सों गिला अौर सूखा अलग अलग करना। चूंकि सफाई सेवक 15 थे, इसलिए पब्लिक की शमूलियत के बिना सफल होना मुश्किल था। स्टूडेंट्स के ग्रुप बनाए। हर गली, हर मोहल्ले का मैप तैयार किया। हर घर को टारगेट पर रखा। रोज स्टूडेंट्स हर घर जाते अौर लोगों को कूड़ा इक्ट्ठा करने की तरकीब सिखाते। जब लगा कि लोग काफी हद तक साथ हो चले हैं तो पूरे शहर में एक साथ मैसिव क्लीन ड्राइव चलाई। जीवनजोत के मुताबिक उन्होंने कई शहरों के निगमों से सफाई सेवकों को बुलाकर एक दिन भादसों के हर गली-चौराहे से कूड़ा उठवा कर चकाचक कर दिया। फिर हर गली-मोहल्ले में लोगों से शपथ ली कि अब यह सफाई एेसे ही मंटेन रखेंगे। इस बीच 100 फीसदी खुले में शौच (ओपन-डेफेकेशन फ्री) जाने से मुक्ति भी हासिल की। धीरे धीरे भादसों का हर घर अपने घर के कूड़े को गीले अौर सूखे दो हिस्सों में बांटने लगा।

सफाई सेवकों को पहले योग करवाते थे, फिर सफाई

10 हजार की अाबादी के कूड़े को साफ करने के लिए सिर्फ 15 सफाई सेवक बहुत कम थे। सफाई सेवकों पर मानसिक बोझ न पड़े, इसलिए पहले सुबह इन्हें योगा करवाया जाता था। इसके बाद इन्हें सफाई के लिए शहर में भेजा जाता था। पीसीएस अॉफिसर जीवनजोत के मुताबिक उनके लिए यह एक नया एक्सपेरीमेंट था, लेकिन यह कारगर रहा। अब भादसों का हर घर सिर्फ इन 15 सफाई सेवकों पर डिपेंड नहीं है, वो अपना कूड़ा खुद संभालता है।

खबरें और भी हैं...